MCG के 9 अफ़सरों पर गाज, बिना मंजूरी 100 करोड़ के कूड़ा टेंडर देने पर चार्जशीट का आदेश
ULB मुख्यालय ने MCG आयुक्त को एक कड़ा पत्र भेजा है, जिसमें साफ़ तौर पर कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों के ख़िलाफ़ सात दिनों के भीतर चार्जशीट की कॉपी मुख्यालय भेजी जाए।

MCG : नगर निगम गुरुग्राम (MCG) में नियमों को ताक पर रखकर ठेके देने वाले अधिकारियों पर शहरी स्थानीय निकाय (ULB) मुख्यालय ने बड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया है। मुख्यालय ने बिना प्रशासनिक मंजूरी के बंधवाड़ी लैंडफिल साइट पर कूड़ा निस्तारण (वेस्ट रिमेडिएशन) के टेंडर एजेंसियों को सौंपने के मामले में MCG के नौ वरिष्ठ अधिकारियों के ख़िलाफ़ तत्काल चार्जशीट दाखिल करने का आदेश दिया है।
ULB मुख्यालय ने MCG आयुक्त को एक कड़ा पत्र भेजा है, जिसमें साफ़ तौर पर कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों के ख़िलाफ़ सात दिनों के भीतर चार्जशीट की कॉपी मुख्यालय भेजी जाए। इस मामले में चार महीने से अधिक समय तक कोई जवाब न देने को मुख्यालय ने “गंभीर लापरवाही” माना है और निगम के रवैये पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
मामला 2024 का है जब MCG ने बंधवाड़ी प्लांट में पुराने कूड़े के निस्तारण के लिए तीन अलग-अलग बड़े टेंडर लगाए थे:
5.0 लाख मीट्रिक टन (फ़ेज़-5)
5.0 लाख मीट्रिक टन (फ़ेज़-6)
4.0 लाख मीट्रिक टन (फ़ेज़-7)
नियमों के अनुसार, इतने बड़े टेंडर को जारी करने से पहले MCG को मुख्यालय से प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी लेना अनिवार्य होता है। लेकिन MCG अधिकारियों ने इस प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए बिना मंजूरी के ही इन टेंडरों को एजेंसियों को सौंप दिया और काम भी शुरू करवा दिया।
मुख्यालय ने अपने पूर्व पत्र 7 जुलाई का हवाला देते हुए पूछा था कि प्रशासनिक मंजूरी के बिना लीगेसी वेस्ट (पुराने कूड़े) के रिमेडिएशन का काम शुरू कैसे हुआ। बार-बार पत्राचार के बावजूद, अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफ़ारिश नहीं की गई थी, जिसके बाद अब मुख्यालय ने सीधे चार्जशीट के निर्देश दिए हैं।
हरियाणा सिविल सर्विसेज (शिकायत एवं अपील) नियम-2016 के तहत जिन नौ अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, उनमें तत्कालीन चीफ इंजीनियर मनोज यादव, तत्कालीन एसई विकास यादव, सीएमओ, तत्कालीन एक्सईएन, एसडीओ आरके मोंगिया, अकाउंट ऑफ़िसर सुनील कुमार, तत्कालीन डीआरओ, जेई सरजीत कुमार, कंसल्टेंट ओपी गोयल और राजीव कुमार जैसे वरिष्ठ नाम शामिल हैं।
शुरुआत में तत्कालीन निगम आयुक्त द्वारा इन टेंडर को लगाने के लिए 14 सदस्यीय समिति बनाई गई थी, लेकिन अब कार्रवाई के लिए कुछ नामों को छाँट दिया गया है।

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए गुरुग्राम के निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने कहा मामला अभी संज्ञान में आया है। जो भी अधिकारी इस मामले में शामिल हैं, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए सिफ़ारिश जल्द ही तय समय सीमा के अंदर मुख्यालय को भेजी जाएगी।”
मुख्यालय ने सख़्ती दिखाते हुए चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में आरोप-पत्रों की प्रतियाँ नहीं भेजी गईं, तो इसे गैर-अनुपालन माना जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों पर सीधे तौर पर कार्रवाई तय होगी। यह घटना MCG में प्रशासनिक नियमों के उल्लंघन पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।













