Gurugram में प्रॉपर्टी खरीदने से पहले पढ़ें ये खबर, बिल्डर फ्रॉड का बड़ा खुलासा
बिल्डर और कर्मिशियल प्रोपर्टी बेचने वाले बिल्डर और कंपनी के सीईओ के द्वारा की गई धोखाधड़ी के मामलों की जांच ED और गुरुग्राम पुलिस अपने-अपने स्तर पर जांच कर रही है।

Gurugram : साइबर सिटी गुरुग्राम का रियल एस्टेट बाजार एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कोई नई गगनचुंबी इमारत नहीं, बल्कि एक बड़ा निवेश घोटाला है। शहर के मशहूर कमर्शियल हब 32nd Avenue के संस्थापक और सीईओ ध्रुव दत्त शर्मा की गिरफ्तारी ने रियल एस्टेट सेक्टर में हड़कंप मचा दिया है।
पुलिस के मुताबिक यह करीब ₹500 करोड़ से अधिक की सुनियोजित धोखाधड़ी करने का आरोप है। वहीं इसके अलावा गुरुग्राम में कई बिल्डर ने लोगों को मकान और कर्मिशियल प्रोपर्टी बेचने के बहाने करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया है।
रेजिडेंशियल और कर्मिशियल प्रोपर्टी बेचने वाले बिल्डर और कंपनी के सीईओ के द्वारा की गई धोखाधड़ी के मामलों की जांच ED और गुरुग्राम पुलिस अपने-अपने स्तर पर जांच कर रही है। दोनों एजेंसियों ने बिल्डर और कंपनी के सीईओ को गिरफ्तार कर मामले में जांच शुरू कर दी है। जबकि ED ने बिल्डर की जमीन के साथ-साथ उनकी संपत्ति को भी जब्त कर लिया है। मामले में जांच की जा रही है।
हालांकि बड़ा सवाल है कि हजारों निवेशकों ने मिलेनियम सिटी में अपना आशियाने के लिए करोडों रुपये का निवेश किया था,लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी न तो फ्लैट ही मिला। अभी भी अपने फ्लैट के लिए हजारों निवेशक आज भी अपने आशियाने के लिए भटक रहे हैं और टाउन एडं कंट्री प्लानिंग के कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर है। ऐसे में अभी तक फ्लैट मालिकों को अपना घर कब तक मिलेगा,इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
34 वर्षीय ध्रुव दत्त शर्मा का प्रोफाइल बेहद प्रभावशाली रहा है। अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़े ध्रुव को साल 2018 में मशहूर ‘फोर्ब्स’ मैगजीन ने एशिया के ’30 अंडर 30′ लिस्ट में शामिल किया था। गुरुग्राम के सबसे महंगे इलाकों में से एक ‘DLF Camellias’ में रहने वाले ध्रुव ने दिल्ली-एनसीआर से लेकर गोवा तक कई बड़े प्रोजेक्ट्स में हाथ डाला, लेकिन इसी रूतबे और चमक-धमक की आड़ में निवेशकों की मेहनत की कमाई के साथ खिलवाड़ के आरोप लगे हैं। (Gurugram)
आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच में सामने आया है कि इस घोटाले में ‘डबल सेलिंग’ का सहारा लिया गया। यानी एक ही कमर्शियल यूनिट को अलग-अलग निवेशकों को बेच दिया गया। साथ ही, निवेशकों को ‘एश्योर्ड रेंटल रिटर्न’ (निश्चित किराए) का लालच देकर निवेश कराया गया, लेकिन बाद में वादे से मुकर गए। आरोप है कि निवेशकों का पैसा निजी विलासिता और लग्जरी प्रोजेक्ट्स में डाइवर्ट कर दिया गया। (Gurugram)
निवेशक कैसे बचें बिल्डरों के जाल से
रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, यह केस उन लोगों के लिए एक सबक है जो सुनहरे भविष्य के सपने लेकर निवेश करते हैं। धोखाधड़ी से बचने के लिए ये कदम उठाएं।
RERA रजिस्ट्रेशन अनिवार्य:
निवेश से पहले चेक करें कि प्रोजेक्ट संबंधित राज्य की ‘रेरा’ (RERA) अथॉरिटी में रजिस्टर्ड है या नहीं। अथॉरिटी की वेबसाइट पर बिल्डर का पिछला रिकॉर्ड देखें।
एश्योर्ड रिटर्न के लालच से बचें:
अगर कोई बिल्डर बैंक ब्याज से कहीं ज्यादा या बहुत अधिक किराए का वादा करता है, तो सतर्क हो जाएं। अक्सर ऐसे वादे कानूनी रूप से सुरक्षित नहीं होते।
स्वतंत्र टाइटल सर्च:
सिर्फ बिल्डर के कागजों पर भरोसा न करें। किसी स्वतंत्र वकील से जमीन के मालिकाना हक (Title Search) की जांच पिछले 30 सालों के रिकॉर्ड के साथ करवाएं।
कागजी कार्रवाई और रजिस्ट्रेशन:
केवल ‘अलॉटमेंट लेटर’ के भरोसे न बैठें। अपने ‘सेल एग्रीमेंट’ को हमेशा रजिस्टर करवाएं और हर क्लॉज को ध्यान से पढ़ें।
साइट विजिट और अपडेट:
समय-समय पर निर्माण स्थल पर जाकर काम की प्रगति देखें। केवल विज्ञापन या ब्रोशर देखकर पैसा न लगाएं।









