मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसे Ramprastha Builder के निदेशक को राहत नहीं, कोर्ट ने बीमारी की दलील को नकारा
रामप्रस्था समूह पर आरोप है कि उन्होंने गुरुग्राम के सेक्टर-37D, सेक्टर-92 और सेक्टर-95 में विभिन्न आवासीय परियोजनाओं के नाम पर 2,000 से अधिक निवेशकों से लगभग 1,100 करोड़ रुपये जुटाए।

Ramprastha Builder : हजारों घर खरीदारों की मेहनत की कमाई डकारने और करोड़ों रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी रामप्रस्था समूह (Ramprastha Group) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। गुरुग्राम की जिला अदालत ने समूह के निदेशक संदीप यादव की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। यादव ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राहत की मांग की थी, जिसे अदालत ने अपर्याप्त माना।
जिला सत्र एवं न्यायाधीश वाणी गोपाल शर्मा की अदालत में सुनवाई के दौरान संदीप यादव के वकीलों ने तर्क दिया कि आरोपी ‘प्रोस्टेट हाइपरट्रॉफी’ और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहा है। याचिका में कहा गया कि संदीप की उम्र 61 वर्ष हो चुकी है और उन्हें जेल के बजाय बेहतर इलाज की जरूरत है। (Ramprastha Builder)
हालांकि, प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अभियोजन पक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया। अदालत को बताया गया कि नागरिक अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार आरोपी की स्थिति सामान्य है और कोई पुरानी गंभीर बीमारी का रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया है। कोर्ट ने जेल प्रशासन को समय-समय पर मेडिकल बोर्ड से राय लेने के निर्देश देते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।
रामप्रस्था समूह पर आरोप है कि उन्होंने गुरुग्राम के सेक्टर-37D, सेक्टर-92 और सेक्टर-95 में विभिन्न आवासीय परियोजनाओं के नाम पर 2,000 से अधिक निवेशकों से लगभग 1,100 करोड़ रुपये जुटाए। खरीदारों का आरोप है कि 10 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उन्हें घरों का पजेशन नहीं दिया गया। मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करते हुए ईडी ने 21 जुलाई 2025 को संदीप यादव को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी अब तक बिल्डर कंपनी की करीब 600 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क (Attach) कर चुकी है।









