Big Breaking : कंबोडिया के ठगों को 2100 ई-सिम भेजने वाला मास्टरमाइंड गिरफ्तार, डिजिटल अरेस्ट सिंडिकेट का भंडाफोड़
इस पूरे गिरोह का खुलासा तब हुआ जब अक्तूबर 2025 में एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई कि खुद को NIA अधिकारी बताने वाले एक व्यक्ति ने उसे वीडियो कॉल पर 'डिजिटल अरेस्ट' की धमकी दी।

Big Breaking : गुरुग्राम पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे एक बेहद हाई-टेक ‘डिजिटल अरेस्ट’ सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार से गिरोह के मुख्य सदस्य रजत (28) को गिरफ्तार किया है, जो कंबोडिया और चीन में बैठे साइबर ठगों को भारतीय ई-सिम (e-SIM) और फर्जी लोन ऐप का बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराता था।
आरोपी रजत ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह राजस्थान के अजमेर से फर्जी तरीके से खरीदे गए भौतिक सिम कार्ड मंगवाता था। वह इन सिम कार्डों को एप्पल आईफोन के जरिए ई-सिम में बदलता था। इसके बाद टेलीग्राम के माध्यम से वह कंबोडिया में बैठे ठगों को QR कोड भेज देता था। प्रत्येक ई-सिम के बदले उसे 22 USDT (क्रिप्टो करेंसी) मिलती थी। पुलिस के मुताबिक, वह अब तक 2100 से अधिक ई-सिम विदेश भेज चुका है।
सिर्फ सिम कार्ड ही नहीं, रजत कंबोडियाई ठगों के लिए एप्पल ऐप स्टोर और गूगल प्ले स्टोर पर फर्जी लोन ऐप का रजिस्ट्रेशन (Enrollment) भी करवाता था। प्रति ऐप रजिस्ट्रेशन के लिए उसे 3000 रुपये मिलते थे। इन ऐप्स का उपयोग बाद में भोले-भाले लोगों को लोन के जाल में फंसाकर उनसे अवैध वसूली और डेटा चोरी के लिए किया जाता था।
इस पूरे गिरोह का खुलासा तब हुआ जब अक्तूबर 2025 में एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई कि खुद को NIA अधिकारी बताने वाले एक व्यक्ति ने उसे वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी दी। ठगों ने पीड़ित के बैंक खाते में अवैध कमीशन आने का डर दिखाकर लाखों रुपये ट्रांसफर करवा लिए थे। एसीपी प्रियांशु दीवान और निरीक्षक संदीप कुमार की टीम ने तकनीकी कड़ियों को जोड़ते हुए आरोपी को बंगाल से धर दबोचा।
पुलिस ने आरोपी के पास से ठगी में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का जखीरा बरामद किया है। इनमें 87 जियो सिम कार्ड, 42 हाई-एंड मोबाइल फोन और 01 लैपटॉप बरामद किया। इस मामले में अब तक उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिम बंगाल से कुल 08 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।









