Gurugram: मानेसर निगम में सफाई में भारी कोताही,आउटसोर्स एजेंसी पर 9.2 करोड़ का रिकॉर्ड जुर्माना
मानेसर नगर निगम क्षेत्र में स्वच्छता संबंधी कार्यों के लिए अनुबंधित थी। एजेंसी की समय अवधि को 19 फरवरी, 2025 से 31 मई, 2025 तक बढ़ाया गया था। इसी अवधि के लिए एजेंसी ने निगम में लगभग 13 करोड़ रुपये (₹13,17,61,332) के बिलों के भुगतान के लिए आवेदन किया था।

Gurugram News Network – मानेसर नगर निगम क्षेत्र में साफ-सफाई, नाले की गाद निकालने और झाड़ी उखाड़ने का काम करने वाली आउटसोर्स एजेंसी पर गंभीर अनियमितताओं के चलते बड़ा जुर्माना लगाया गया है। निगम आयुक्त द्वारा गठित एक समिति ने एजेंसी के बिलों में से 9 करोड़ 20 लाख रुपये से अधिक की कटौती करते हुए यह जुर्माना लगाया है। एजेंसी पर जनशक्ति और मशीनरी की भारी कमी के साथ-साथ नियमों के उल्लंघन का आरोप है।
मानेसर नगर निगम क्षेत्र में स्वच्छता संबंधी कार्यों के लिए अनुबंधित थी। एजेंसी की समय अवधि को 19 फरवरी, 2025 से 31 मई, 2025 तक बढ़ाया गया था। इसी अवधि के लिए एजेंसी ने निगम में लगभग 13 करोड़ रुपये (₹13,17,61,332) के बिलों के भुगतान के लिए आवेदन किया था।

जांच में खुले बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई
समिति की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। सरकार द्वारा स्वीकृत अनुमान के अनुसार, एजेंसी को सड़क सफाई के लिए निम्नलिखित जनशक्ति और मशीनरी उपलब्ध करानी थी:

- जनशक्ति: 1997 कर्मी
- ट्रैक्टर ट्रॉली: 96
- रिक्शा रेहड़ी: 468
- जेसीबी: 4
यह अनुमान CPHEEO मानदंडों और प्रस्ताव के लिए अनुरोध (RFP) के आधार पर तैयार किया गया था। शहरी स्थानीय निकायों के निर्देशानुसार, जनवरी 2025 से सभी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (SWM) भुगतानों को SWM मॉनिटरिंग पोर्टल के माध्यम से संचालित किया जाना था।
पोर्टल पर उपलब्ध डेटा के अनुसार, एजेंसी द्वारा वास्तविक जनशक्ति और मशीनरी की तैनाती स्वीकृत अनुमान से काफी कम पाई गई:

- जनशक्ति: फरवरी से मई तक, मासिक औसत उपस्थिति अनुमानित 1997 जनशक्ति के मुकाबले डिवीजन एक में 250 से 381 और डिवीजन दो में 214 से 349 के बीच रही। इसका मतलब है कि 1300 से 1500 से अधिक जनशक्ति का अंतर पाया गया।
- रिक्शा रेहड़ी: 468 के मुकाबले केवल 101 ही लगाई गई थीं।
- ट्रैक्टर ट्रॉली: 94 के मुकाबले केवल 38 ही तैनात पाई गई थीं।
अनुबंध का स्पष्ट उल्लंघन और ज़मीनी स्तर पर प्रभाव:
समिति ने स्पष्ट किया कि स्वीकृत अनुमान में उल्लिखित जनशक्ति और मशीनरी की संख्या केवल दिशानिर्देश नहीं हैं, बल्कि वे बाध्यकारी शर्तें हैं। किसी भी कमी को अनुबंध का स्पष्ट उल्लंघन माना गया है।

समिति ने इस बात पर जोर दिया कि जनशक्ति और मशीनरी की कमी का सीधा असर ज़मीन पर स्वच्छता की गुणवत्ता पर पड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नाले रूके पड़े हैं और सड़कें ठीक से साफ नहीं हुई हैं। यह स्थिति सार्वजनिक असंतोष और शिकायतों में भी परिलक्षित होती है। समिति ने दोहराया कि सभी भुगतान सरकारी निधियों से किए जाते हैं, और यह सुनिश्चित करना उनका कर्तव्य है कि भुगतान केवल तभी किया जाए जब कार्य ठीक ढंग से और अनुबंध के दायरे में किया गया हो।
करोड़ों की कटौती, आंशिक भुगतान:
विस्तृत समीक्षा और लंबी चर्चा के बाद, समिति ने ठेकेदार द्वारा तैनात की गई वास्तविक जनशक्ति और मशीनरी के आधार पर स्वीकार्य भुगतान तय किया। 20 फरवरी से 19 मई की अवधि के लिए शुद्ध स्वीकार्य भुगतान 3,99,69,065 रुपये (लगभग ₹4 करोड़) आंका गया है।
एजेंसी द्वारा प्रस्तुत किए गए ₹13.17 करोड़ के बिल में से, विस्तृत सत्यापन और अनुबंध की शर्तों के अनुपालन में देखी गई कमियों के लिए कटौती के बाद, 9,17,92,267 रुपये (लगभग ₹9.17 करोड़) का दंड लगाया गया है। इस संबंध में जब निगम आयुक्त आयुष सिन्हा से बात करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।










