Dwarka Expressway Update : एक्सप्रेसवे के साथ अब ओल्ड दिल्ली रोड का होगा कायाकल्प, जाने नया प्लॉन
दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे (NH-48) पर ट्रैफिक का अत्यधिक दबाव रहता है। कापसहेड़ा, बिजवासन और नजफगढ़ जैसे इलाकों से गुरुग्राम जाने वाले लोग अक्सर रजोकरी बॉर्डर पर फंस जाते हैं।

Dwarka Expressway Update : दिल्ली से गुरुग्राम के बीच रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए साल 2026 की शुरुआत एक बड़ी खुशखबरी लेकर आई है। द्वारका एक्सप्रेसवे (Dwarka Expressway) के जरिए सफर को रफ्तार देने के बाद अब सरकार ने इसके फीडर रूट्स यानी सहायक सड़कों को बेहतर बनाने का मास्टर प्लान तैयार किया है। इस कड़ी में ओल्ड दिल्ली-गुरुग्राम रोड की तस्वीर बदलने की तैयारी शुरू हो गई है।
PWD का 10.70 करोड़ का मास्टर प्लान लोक निर्माण विभाग (PWD) ने ओल्ड दिल्ली-गुरुग्राम रोड की मरम्मत और चौड़ीकरण के लिए 10.70 करोड़ रुपये का एस्टिमेट तैयार किया है। योजना के मुताबिक, समालखा चौक (द्वारका एक्सप्रेसवे के पास) से लेकर कापसहेड़ा बॉर्डर तक के करीब 2.5 किलोमीटर लंबे हिस्से को पूरी तरह से री-डिवेलप किया जाएगा। इस हिस्से के विकसित होने से न केवल सड़क की हालत सुधरेगी, बल्कि वाहन चालकों को गड्ढों और संकरी सड़कों से भी निजात मिलेगी।

वर्तमान में दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे (NH-48) पर ट्रैफिक का अत्यधिक दबाव रहता है। कापसहेड़ा, बिजवासन और नजफगढ़ जैसे इलाकों से गुरुग्राम जाने वाले लोग अक्सर रजोकरी बॉर्डर पर फंस जाते हैं। ओल्ड दिल्ली-गुड़गांव रोड के सुधरने से यह रोड द्वारका एक्सप्रेसवे और साउथ दिल्ली के महरौली-गुरुग्राम रोड के बीच एक मजबूत लिंक का काम करेगी। सड़क चौड़ी होने से कापसहेड़ा और बिजवासन के आसपास लगने वाले भीषण जाम में कमी आएगी। द्वारका एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें भी इन इलाकों में पहुंचने के लिए एक स्मूथ कनेक्टिविटी मिलेगी।
कनेक्टिविटी का नया हब यह सड़क समालखा चौक से शुरू होकर कापसहेड़ा बॉर्डर को पार करते हुए गुरुग्राम में शीतला माता मंदिर के पास महरौली-गुरुग्राम रोड से जुड़ती है। जानकारों का मानना है कि इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद द्वारका एक्सप्रेसवे का असली फायदा उन लोगों को भी मिलेगा जो दिल्ली के ग्रामीण और बाहरी इलाकों में रहते हैं।

PWD अधिकारियों के अनुसार, इस सड़क का बुनियादी ढांचा कई दशक पुराना है, जिसे अब आधुनिक ट्रैफिक लोड के हिसाब से अपग्रेड किया जा रहा है। आने वाले कुछ महीनों में इसका काम धरातल पर










