Delhi Gurugram Border MCD Toll को लेकर सख्त हुआ सुप्रीम कोर्ट, 31 जनवरी तक हटाने की योजना मांगी

Delhi Gurugram Border MCD Toll : दिल्ली एनसीआर में बढते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने दिल्ली गुरुग्राम बॉर्डर पर बने MCD टोल प्लाजा को लेकर सवाल उठाए । इस सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने टोल प्लाजा को लेकर एक सख्त टिप्पणी की है । कोर्ट ने अधिकारियों को 31 जनवरी 2026 तक टोल को हटाने की योजना पर जवाब मांगा है ।
सर्वोच्च न्यायालय में बुधवार को एमसीडी (MCD) टोल प्लाज़ा से जुड़े ट्रैफिक और प्रदूषण के मुद्दे को लेकर सुनवाई के दौरान अदालत ने अधिकारियों से सख्त टिप्पणियाँ कीं। वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि गुरुग्राम-दिल्ली बॉर्डर पर स्थित टोल प्लाज़ा पर घंटों तक लंबी वाहनों की कतारें लग रही हैं, जिससे न केवल यातायात पर बुरा प्रभाव पड़ता है, बल्कि वायु प्रदूषण भी बढ़ता है।

चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया (CJI) ने कहा कि अगर जनवरी तक इन टोल प्लाज़ाओं को हटाना संभव नहीं है तो कम से कम एक ठोस योजना पेश की जाए जिससे 31 जनवरी 2026 तक “टोटल नो टोल प्लाज़ा” का लक्ष्य सुनिश्चित हो सके। CJI ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारी हर समय “पैसा कमाने के लिए टोल लगाने” की मानसिकता नहीं रखें, बल्कि यह सुनिश्चित करें कि लोगों को जाम और प्रदूषण से राहत मिले। कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए कहा कि राजस्व की चिंता सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं हो सकती, जब तक इससे ट्रैफिक और वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।

इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में एमसीडी टोल प्लाज़ा हटाने की याचिका पर बारीकी से विचार जारी है, तथा नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) पहले ही अदालत में 9 एमसीडी टोल प्लाज़ाओ को हटाने की मांग की है, यह बताते हुए कि ये टोल पॉइंट्स राष्ट्रीय राजमार्ग की सड़क सुविधा का पूरा लाभ नहीं दिला पा रहे और जाम तथा प्रदूषण को बढ़ा रहे हैं।
वकीलों ने कोर्ट को बताया कि विशेषकर NH-48 और अन्य बॉर्डर स्थित टोल प्लाज़ा पर भारी ट्रैफिक जाम होता है, जिससे दिल्ली-एनसीआर में आने-जाने वाले यात्रियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

अभी तक आधिकारिक निर्णय या अगले आदेश की तारीख कोर्ट में निर्धारित नहीं की गई है, लेकिन मामले पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी इस दिशा में संकेत देती है कि आगामी सुनवाई में टोल हटाने या किसी वैकल्पिक व्यवस्था पर फोकस किया जाएगा ताकि ट्रैफिक जाम और प्रदूषण को कम किया जा सके।
स्कूलों को लेकर भी हुई चर्चा
Supreme Court of India ने दिल्ली में कक्षा 5 तक के स्कूलों को दोबारा खोलने या हाइब्रिड मोड लागू करने के निर्देश देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मनेका गुरुस्वामी ने दलील दी कि स्कूल बंद रहने से गरीब अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है और कई बच्चे मिड-डे मील के लिए भी स्कूल जाते हैं।

इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि यह नीतिगत निर्णय हैं और न तो न्यायाधीश, न ही वकील सुपर-स्पेशलिस्ट हैं; ऐसे मामलों में सरकार को विशेषज्ञ सलाह के आधार पर फैसला लेने देना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि प्रदूषण और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए शीतकालीन अवकाश को पहले करने का विकल्प ही व्यावहारिक हो सकता है, लेकिन इस पर अंतिम निर्णय भी सरकार ही लेगी।










