कातिल अंगीठी: Gurugram में सोता रहा परिवार, दबे पांव आई मौत और छीन ली घर की खुशियां
मंगलवार रात ठंड बहुत अधिक थी, जिससे बचने के लिए परिवार ने कमरे के भीतर कोयले की अंगीठी जलाई थी। ठंड के कारण कमरे के खिड़की-दरवाजे पूरी तरह बंद थे।

Gurugram: दिल्ली-एनसीआर में पड़ रही कड़ाके की ठंड से बचने का एक प्रयास गुरुग्राम के एक परिवार के लिए मातम में बदल गया। बहोड़ा कलां इलाके की ‘ओम शांति ओम’ गली में मंगलवार रात कमरे में कोयले की अंगीठी जलाकर सो रहे एक ही परिवार के पांच लोग जहरीली गैस का शिकार हो गए। इस दर्दनाक हादसे में 13 वर्षीय किशोरी ‘गुड़िया’ की दम घुटने से मौत हो गई, जबकि माता-पिता समेत परिवार के चार अन्य सदस्य बेहोशी की हालत में पाए गए।
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई के रहने वाले रविंद्र पिछले एक दशक से गुरुग्राम में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। मंगलवार रात ठंड बहुत अधिक थी, जिससे बचने के लिए परिवार ने कमरे के भीतर कोयले की अंगीठी जलाई थी। ठंड के कारण कमरे के खिड़की-दरवाजे पूरी तरह बंद थे।
डॉक्टरों के अनुसार, बंद कमरे में कोयला जलने से ऑक्सीजन कम हो गई और कार्बन मोनोऑक्साइड ($CO$) जैसी जहरीली गैस भर गई। सोते समय परिवार को इसका अहसास नहीं हुआ और वे गहरी बेहोशी में चले गए।
बुधवार सुबह जब काफी देर तक रविंद्र के घर का दरवाजा नहीं खुला, तो आसपास के लोगों को अनहोनी की आशंका हुई। जब दरवाजा खोला गया तो अंदर का मंजर खौफनाक था। रविंद्र, उनकी पत्नी मिथलेश और बच्चे अचेत अवस्था में पड़े थे। आनन-फानन में सभी को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने 13 साल की गुड़िया को मृत घोषित कर दिया। अन्य चार सदस्यों का उपचार जारी है और उनकी स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।

गुरुग्राम में पिछले तीन दिनों में दम घुटने से मौत का यह दूसरा मामला है। प्रशासन और पुलिस ने नागरिकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। बंद कमरे में कभी भी अंगीठी या कोयला न जलाएं। यदि जलाना अनिवार्य हो, तो खिड़की या रोशनदान को कम से कम 25% खुला रखें। सोने से पहले अंगीठी को कमरे से बाहर निकाल दें। बिजली वाले हीटर का इस्तेमाल करते समय भी ताजी हवा का आवागमन सुनिश्चित करें।











