इस नदी की कब्र पर बसा है Gurugram ! इसीलिए मॉनसून में डूबता है ‘Cyber City’, क्या एक दिन आएगी जलप्रलय ?
किसी समय में गुरुग्राम और दिल्ली एनसीआर की जीवनदायिनी एक नदी यहां से गुजरती थी लेकिन बढते हुए शहरीकरण और विकास ने उस जीवनदायिनी को जमीन के नीचे हमेशा के लिए सुला दिया

Gurugram जिसे हम आज गगनचुंबी इमारतों, साइबर हब और लग्जरी अपार्टमेंट्स के लिए जानते हैं, उसके इतहास के पीछे एक कड़वा सच छिपा है । आज की कंक्रीट की चकाचौंध के नीचे एक प्राचीन नदी की ‘कब्र’ दफन है । क्या जब बारिश होती है तो गुरुग्राम डूब जाता है ? विकास की रफ्तार ने इस प्राकृतिक संजीवनी को जमीन के नीचे दफ्न कर दिया इसीलिए इसका खामियाजा हर मॉनसून में गुरुग्राम वासियों को भुगतना पड़ता है ।
किसी समय में गुरुग्राम और दिल्ली एनसीआर की जीवनदायिनी एक नदी यहां से गुजरती थी लेकिन बढते हुए शहरीकरण और विकास ने उस जीवनदायिनी को जमीन के नीचे हमेशा के लिए सुला दिया । विशेषज्ञों का मानना है कि गुरुग्राम की आधुनिक बसावट ने इस प्राकृतिक जलमार्ग का गला घोंट दिया है, जिसका परिणाम शहर को हर साल ‘जलप्रलय’ के रूप में भुगतना पड़ता है ।

कौन सी है वह नदी जो इतिहास में खो गई ?
जिसे आज हम साहिबी नदी (Sahibi River) के नाम से जानते हैं, वह कभी इस इलाके की जीवनरेखा हुआ करती थी । साहिबी नदी राजस्थान के सीकर जिले की पहाड़ियों से निकलकर अलवर (राजस्थान), रेवाड़ी और गुरुग्राम (हरियाणा) होते हुए दिल्ली में प्रवेश करती थी । यह एक बरसाती नदी थी जो मानसून के दौरान लबालब भरी रहती थी । गुरुग्राम का एक बड़ा हिस्सा इसी नदी के जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area) और प्राकृतिक ढलान पर बसा है ।
इसीलिए जब कभी मॉनसून आता है तो बारिश का पानी गुरुग्राम को डुबो देता है । पानी को निकलने के रास्ते पर बड़ी बड़ी इमारतें बन गई और पानी को रास्ता नहीं मिल पाता ।

साहिबी नदी से ‘नजफगढ़ नाला’ बनने का सफर
इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि साहिबी नदी दिल्ली के पास नजफगढ़ झील का निर्माण करती थी और अंत में यमुना में मिल जाती थी। लेकिन जैसे-जैसे शहरीकरण बढ़ा, नदी के बहाव क्षेत्र को नियंत्रित करने के लिए बांध (जैसे मसानी बैराज) बनाए गए और इसके रास्तों पर निर्माण कार्य शुरू हो गया ।
नदी का अंत: आज यह नदी दिल्ली में प्रवेश करते ही ‘नजफगढ़ नाला’ कहलाती है।
प्रदूषण की मार: जो नदी कभी पीने का पानी देती थी, आज वह शहर का गंदा पानी और औद्योगिक कचरा ढोने वाला एक विशाल नाला बनकर रह गई है।
बसावट की बड़ी गलती: क्यों डूबता है गुरुग्राम?
भू-गर्भ वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का कहना है कि गुरुग्राम की सबसे बड़ी समस्या इसकी प्राकृतिक ढलान के साथ छेड़छाड़ है।

नेचुरल ड्रेनेज का खात्मा: गुरुग्राम की अरावली पहाड़ियों से निकलने वाला बारिश का पानी प्राकृतिक रूप से साहिबी नदी और नजफगढ़ झील की ओर जाता था। शहर बसते समय इन प्राकृतिक नालों (Natural Drains) को पाटकर इमारतें खड़ी कर दी गईं।
वॉटर रिचार्ज खत्म: नदी के सूखने और उस पर निर्माण होने से जमीन के नीचे पानी जाने के रास्ते बंद हो गए हैं, जिससे भूजल स्तर (Ground Water) भी तेजी से गिर रहा है।
कंक्रीट का जंगल: मिट्टी न होने के कारण बारिश का पानी जमीन में नहीं समा पाता और सड़कों पर ‘सैलाब’ का रूप ले लेता है।
क्या फिर से जी उठेगी साहिबी ?
हाल ही में दिल्ली और हरियाणा सरकार के बीच इस लुप्त होती नदी को पुनर्जीवित करने पर चर्चा हुई है। एनजीटी (NGT) के निर्देशों के बाद नजफगढ़ नाले को फिर से ‘साहिबी नदी’ के रूप में पहचान देने और इसकी सफाई के प्रयास शुरू हुए हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक गुरुग्राम के प्राकृतिक जल निकासी रास्तों (Natural Drainage) को अतिक्रमण मुक्त नहीं किया जाता, तब तक ‘मिलेनियम सिटी’ को हर साल डूबने से बचाना मुश्किल होगा।











