Gurugram: ED की बड़ी कार्रवाई,माहिरा ग्रुप की 557.43 करोड़ की संपत्तियां कुर्क
कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से वित्तीय अपराधों, विशेष रूप से मनी लॉन्ड्रिंग और जनता से धोखाधड़ी के मामलों में लगातार बढ़ती सख्ती को दर्शाती है। PMLA के तहत ईडी को यह अधिकार है कि वह अपराध से अर्जित की गई संपत्ति को जब्त कर सके, ताकि अपराधी उसका लाभ न उठा सकें।

Gurugram News Network – प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत माहिरा ग्रुप से जुड़ी कंपनियों की कुल 557.43 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। यह कदम फ्लैट देने के नाम पर आम लोगों से बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और जालसाजी के गंभीर आरोपों के बाद उठाया गया है।
ईडी के निशाने पर मुख्य रूप से माहिरा इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड (जिसे पहले साई आयना फार्म्स प्रा. लि. के नाम से जाना जाता था), माहिरा बिल्डटेक और सिज़ार बिल्डवेल जैसी कंपनियाँ हैं। इन कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने निवेशकों को लुभावनी योजनाओं का झांसा देकर उनसे पैसे वसूले, लेकिन बदले में उन्हें न तो फ्लैट दिए और न ही उनके पैसे लौटाए। यह सीधा-सीधा आम जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ और आर्थिक धोखाधड़ी का मामला है, जिसकी शिकायतें लगातार ईडी तक पहुँच रही थीं।

जो संपत्तियाँ कुर्क की गई हैं, उनमें गुरुग्राम के कई प्रमुख सेक्टरों, जैसे सेक्टर 68, सेक्टर 63ए, सेक्टर 103, सेक्टर 104, सेक्टर 92, सेक्टर 88बी और सेक्टर 95 में स्थित लगभग 35 एकड़ की बेशकीमती आवासीय और व्यावसायिक भूमि शामिल है। इसके अलावा, विभिन्न कंपनियों से संबंधित सात अन्य संपत्तियों और लगभग 97 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FDR) को भी जब्त किया गया है। यह दिखाता है कि धोखाधड़ी की कमाई को किस तरह विभिन्न संपत्तियों में निवेश किया गया था।
कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से वित्तीय अपराधों, विशेष रूप से मनी लॉन्ड्रिंग और जनता से धोखाधड़ी के मामलों में लगातार बढ़ती सख्ती को दर्शाती है। PMLA के तहत ईडी को यह अधिकार है कि वह अपराध से अर्जित की गई संपत्ति को जब्त कर सके, ताकि अपराधी उसका लाभ न उठा सकें।
यह कार्रवाई उन हजारों निवेशकों के लिए एक उम्मीद की किरण है, जिन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई इन योजनाओं में लगा दी थी। मामले की जांच अभी भी जारी है, और उम्मीद है कि इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों पर भी शिकंजा कसा जाएगा। ईडी का यह कदम रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाने और निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।









