BIG News : बंधवाड़ी लैंडफिल साइट का पानी हुआ जहरीला, गांवों का पानी पीने लायक नहीं बचा
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 12 महीनों से लगातार हर महीने आने वाली जांच में ये सभी नमूने मानकों पर फेल मिल रहे हैं।

BIG News : गुरुग्राम और अरावली के पर्यावरण के लिए नासूर बन चुकी बंधवाड़ी लैंडफिल साइट को लेकर हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) की जांच में एक बेहद चौंकाने वाला और डरावना खुलासा हुआ है। प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, बंधवाड़ी प्लांट और उसके आसपास के गांवों का भूमिगत जल (Groundwater) अब इंसानों और पशुओं के पीने लायक नहीं बचा है।
पिछले एक साल में लिए गए पानी और लीचेट (कचरे का गंदा पानी) के सभी 80 से अधिक नमूने लैब जांच में पूरी तरह फेल पाए गए हैं। इस घोर लापरवाही और अरावली को प्रदूषित करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अब तक नगर निगम गुरुग्राम पर कुल 6 करोड़ रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगा चुका है।(Big News)
प्रदूषण बोर्ड के नियमों के तहत एक विशेष तकनीकी टीम हर महीने बंधवाड़ी लैंडफिल साइट, आसपास के नलकूपों और बोरवेल से पानी व लीचेट के नमूने एकत्र कर सरकारी लैब में भेजती है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 12 महीनों से लगातार हर महीने आने वाली जांच में ये सभी नमूने मानकों पर फेल मिल रहे हैं।
पानी में रासायनिक तत्वों और भारी धातुओं (Heavy Metals) की मात्रा निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक पाई गई है। अकेले पिछले 12 महीनों में ही नगर निगम पर 1 करोड़ 20 लाख रुपये का अतिरिक्त पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया है, जिससे कुल जुर्माने की राशि बढ़कर अब 6 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।(Big News)
पर्यावरणविदों का आरोप है कि रात के अंधेरे में खतरनाक लीचेट को खुलेआम अरावली के जंगलों में बहाया जा रहा है। अरावली की पहाड़ियों और ढलानों पर बहकर यह जहरीला पानी जंगलों के भीतर तक पहुंच रहा है। इससे न केवल वन्यजीवों के जीवन पर संकट मंडरा रहा है, बल्कि यही पानी धीरे-धीरे रिसकर जमीन के भीतर जा रहा है, जो पूरे इलाके के वाटर टेबल को जहरीला बना रहा है। कचरे के स्थायी निस्तारण को लेकर नगर निगम और मुख्य एजेंसियों ने अब तक कोई ठोस वैज्ञानिक प्रबंध नहीं किया है।
स्थानीय पर्यावरणविदों और बंधवाड़ी, ग्वालपहाड़ी व मांगर गांव के निवासियों का कहना है कि जमीनी पानी के दूषित होने के कारण अरावली के इस बेल्ट में स्थित गांवों में कैंसर, त्वचा रोग (Skin Diseases) और पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि लीचेट का जंगलों में बहना तुरंत बंद नहीं हुआ, तो आने वाले मानसून में यह स्थिति और भी भयावह हो जाएगी। बारिश के पानी के साथ मिलकर यह जहर दिल्ली-एनसीआर के अन्य नजदीकी इलाकों के भूजल को भी अपनी चपेट में ले लेगा। (Big News)
अधिकारियों के बयान:
बंधवाड़ी में लीचेट का नियमों के अनुसार निस्तारण नहीं किया जा रहा है। इसी को लेकर निगम पर हर महीने दस लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा रहा है।
आकांक्षा तंवर, क्षेत्रीय अधिकारी, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड,
बधवाड़ी में नियमों के अनुसार लीचेट का निस्तारण करवाया जा रहा है। इसके बाद भी अगर एजेंसी द्वारा लापरवाही बरती जा रही है तो कार्रवाई की जाएगी।
संदीप सिंह सिहाग, कार्यकारी अभियंता, नगर निगम, गुरुग्राम