Sohna में पाइपलाइन फटने से मची अफरा-तफरी, आग की लपटों के बीच NDRF का बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन, जानें क्या है पूरा सच
दोपहर 12:30 बजे के करीब दिखाया गया कि एक जेसीबी खुदाई के दौरान अनजाने में मुंबई-मनमाड-बिजवासन पाइपलाइन को क्षतिग्रस्त कर देती है।

Sohna : मंगलवार दोपहर सोहना के गांव खत्रिका में उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब जमीन के नीचे से अचानक पेट्रोल का फव्वारा फूट पड़ा और देखते ही देखते पूरा इलाका आग की लपटों में घिर गया। लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही सायरन बजाती एनडीआरएफ और दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। हालांकि, जब असलियत सामने आई तो ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। दरअसल, यह भारत पेट्रोलियम (BPCL) द्वारा आयोजित एक विशाल ‘लेवल-3’ ऑफ-साइट मॉक-ड्रिल थी।
मॉक-ड्रिल का परिदृश्य इतना वास्तविक था कि आसपास के लोग दंग रह गए। दोपहर 12:30 बजे के करीब दिखाया गया कि एक जेसीबी खुदाई के दौरान अनजाने में मुंबई-मनमाड-बिजवासन पाइपलाइन को क्षतिग्रस्त कर देती है। पेट्रोल के रिसाव के बीच पास से गुजर रही हाई-टेंशन बिजली की तारों से निकली एक छोटी सी चिंगारी ने भीषण आग का रूप ले लिया। (Sohna)
आपात स्थिति की सूचना मिलते ही पूरा सरकारी अमला सक्रिय हो गया। आपदा प्रबंधन की कुशलता को परखने के लिए किए गए इस अभ्यास में कई एजेंसियों ने हिस्सा लिया। सहायक कमांडेंट देवेंद्र के नेतृत्व में 26 जवानों ने मोर्चा संभाला। 22 सदस्यीय टीम ने आग के बीच फंसे लोगों को निकालने में मदद की। फायर प्रॉक्सिमिटी सूट पहने जवानों ने धधकती आग के बीच से 3 घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला। गेल, बीपीसीएल और सोहना फायर स्टेशन के 4 फायर टेंडरों ने मिलकर आग पर काबू पाया।
इस ड्रिल के दौरान एसीपी सोहना जितेंद्र सिंह और डीडीएमए की परियोजना अधिकारी पूनम रानी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी तैनात रहे। विशेषज्ञों ने जोर दिया कि किसी भी हादसे के पहले 60 मिनट यानी ‘गोल्डन ऑवर’ में की गई कार्रवाई ही जान-माल के नुकसान को कम कर सकती है। अधिकारियों ने ड्रिल के दौरान एजेंसियों के बीच दिखे तालमेल (Coordination) को ‘उत्कृष्ट’ करार दिया।
बीपीसीएल के उत्तरी क्षेत्र प्रमुख मालदे लगारिया ने बताया कि पेट्रोलियम पाइपलाइन घनी आबादी वाले क्षेत्रों के पास से भी गुजरती है। ऐसे में ड्रिल के जरिए न केवल तकनीकी खामियों को परखा जाता है, बल्कि स्थानीय पुलिस, प्रशासन और मेडिकल टीमों को भी प्रशिक्षित किया जाता है ताकि वास्तविक संकट के समय बिना किसी चूक के मिशन को अंजाम दिया जा सके। (Sohna)









