गुरुग्राम में Water Supply ठप्प, 4 दिन से नहीं आया पानी, मचा हाहाकार-कब आएगा पानी ?
GMDA के दावे फेल, 72 घंटे बाद भी सूखे नल; अब मुख्यमंत्री के गुरुग्राम आगमन पर जनता पूछेगी सवाल!

Water Supply : पाइपलाइनें सूखी, ‘जल अकाल
गुरुग्राम: साइबर सिटी गुरुग्राम में पीने के पानी की किल्लत ने अब ‘जल अकाल’ का रूप ले लिया है। बीते शुक्रवार से शहर की प्यास बुझाने वाली पाइपलाइनें सूखी पड़ी हैं और सोमवार सुबह तक हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ गए हैं। ओल्ड गुरुग्राम की लाखों की आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है, जबकि प्रशासन के मरम्मत के सारे दावे कागजी साबित हुए हैं।

क्यों ठप्प हुई सप्लाई? दरअसल, पानी के इस महा-संकट की मुख्य वजह चंदू बुढेड़ा वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से आने वाली मास्टर सप्लाई लाइन में आई लीकेज है। GMDA (गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण) ने शनिवार सुबह से इस लीकेज की रिपेयरिंग का काम शुरू किया था। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया था कि रविवार शाम तक काम पूरा हो जाएगा और सोमवार सुबह तक लोगों के घरों में पानी पहुंच जाएगा। लेकिन सोमवार सुबह जब दफ्तर और स्कूल जाने के लिए लोगों ने नल खोले, तो उन्हें केवल निराशा हाथ लगी।
दफ्तर जाने वालों की बढ़ी मुसीबत, टैंकर माफियाओं की चांदी 72 घंटे बीत जाने के बाद भी पानी की सप्लाई बहाल न होने से सबसे ज्यादा परेशानी कामकाजी वर्ग को हुई है। घरों में पानी की मोटरें खाली चल रही हैं। इस मजबूरी का फायदा उठाकर टैंकर माफिया सक्रिय हो गए हैं। एक पानी के टैंकर की कीमत 5,000 से 6,000 रुपये तक पहुंच गई है। लोग अपनी जमा-पूंजी खर्च कर और आपस में चंदा इकट्ठा कर पानी खरीदने को मजबूर हैं।

मुख्यमंत्री के दौरे पर उठेंगे सवाल हैरानी की बात यह है कि एक तरफ शहर पानी की त्राहि-त्राहि से जूझ रहा है, वहीं आज मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी गुरुग्राम में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने पहुंच रहे हैं। शहरवासियों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि 4 दिन से शहर प्यासा है और जिम्मेदार अधिकारी समाधान निकालने में विफल रहे हैं। चर्चा है कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों के दौरान स्थानीय निवासी और सामाजिक संगठन पानी की इस समस्या को लेकर कड़े सवाल पूछ सकते हैं।
प्रशासन की चुप्पी से बढ़ा गुस्सा जनता का कहना है कि मरम्मत के नाम पर उन्हें 72 घंटों से गुमराह किया जा रहा है। यदि जल्द ही सप्लाई बहाल नहीं हुई, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है। अब सबकी नजरें प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर कब तक गुरुग्राम की प्यास बुझेगी।











