Kundli देखने का सही क्रम, श्रेष्ठ भविष्यवाणी के लिए किसे दें सर्वोच्च महत्व?

श्रेष्ठ भविष्यवाणी के लिए चारों कुण्डलियों के उद्देश्य और उन्हें देखने का सही क्रम

Kundli ज्योतिषीय फलादेश करते समय सबसे बड़ा और आधारभूत प्रश्न यही होता है कि सटीकता के लिए किस चार्ट (कुण्डली) को प्राथमिक आधार माना जाए। क्या हमें केवल जन्म कुण्डली (लग्न) पर टिके रहना चाहिए, या ग्रह की वास्तविक स्थिति के लिए चलित को देखना चाहिए, या फिर ग्रह की शक्ति के लिए नवमांश को? बहुत से लोग किसी एक कुण्डली पर अत्यधिक निर्भर हो जाते हैं, जबकि सत्य, संतुलित और श्रेष्ठ ज्योतिष इन चारों कुण्डलियों को उनके क्रम और विशिष्ट उद्देश्य के अनुसार देखने से ही संभव होता है। इन चारों का सामूहिक अध्ययन ही जातक के जीवन की पूरी और सजीव तस्वीर प्रस्तुत करता है। आइए, इन चारों महत्वपूर्ण चार्टों की भूमिका और उनके महत्व के क्रम को समझते हैं |

 

1. 👑 लग्न कुण्डली (जन्म कुण्डली): जीवन का मूल ढाँचा और राजा

लग्न कुण्डली को प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण चार्ट माना जाता है। यह व्यक्ति के जन्म के समय आकाश की वास्तविक स्थिति पर आधारित होती है, जिसमें प्रथम भाव में उदय हो रही राशि अंकित होती है।

  • मूल भूमिका: यह जातक के शरीर, व्यक्तित्व, स्वभाव, सोचने के तरीके, स्वास्थ्य, जीवन की दिशा (कर्म) और मूल भाग्य को स्थापित करती है। यह बताती है कि किसी ग्रह का मूल प्रभाव किस भाव में पड़ेगा।

  • महत्व: यह कुण्डली का आधार है। कोई भी ग्रह किस भाव में बैठा है और वह जातक के जीवन के किस क्षेत्र को प्रभावित करेगा, इसकी असली भूमिका लग्न कुण्डली से ही समझ आती है। यदि लग्न कुण्डली में सूर्य दशम भाव में है, तो जातक में नेतृत्व क्षमता, पद और अधिकार की इच्छा स्वाभाविक रूप से होगी, भले ही अन्य चार्ट कुछ और दिखाएं। इसलिए, कुण्डली देखते समय पहला और सर्वोच्च आधार हमेशा लग्न कुण्डली होनी चाहिए।

2. 🎯 चलित कुण्डली: फल के सही भाव का निर्धारण

लग्न कुण्डली के बाद, फलादेश में सटीकता लाने के लिए चलित कुण्डली देखना अनिवार्य है।

  • मूल भूमिका: यह कुण्डली यह बताती है कि कोई ग्रह वास्तव में किस भाव का फल अधिक देगा। भाव मध्य (Cusp) के सिद्धांत के कारण, ग्रह लग्न कुण्डली में एक भाव में दिख सकता है, लेकिन यदि वह भाव संधि के बहुत निकट है, तो चलित कुण्डली में वह अगले भाव में स्थानांतरित हो जाता है।

  • महत्व: यदि किसी जातक की जन्म कुण्डली में शनि चतुर्थ भाव में है (घर, वाहन), लेकिन चलित कुण्डली में पंचम भाव (संतान, शिक्षा) में चला गया है, तो शनि चतुर्थ भाव के फल देने के साथ-साथ पंचम भाव से संबंधित संतान, शिक्षा, और मानसिक चिंता से जुड़े फल भी अधिक देगा। चलित कुण्डली देखकर ही हम भाव फल में होने वाली गलती से बच सकते हैं।

3. 💪 नवमांश कुण्डली: ग्रह की आंतरिक शक्ति और स्थायित्व की जाँच

नवमांश कुण्डली को धर्म, विवाह और भाग्य की कुण्डली कहा जाता है, लेकिन इसकी वास्तविक भूमिका ग्रह की आंतरिक शक्ति (Potential) और फलों के स्थायित्व को बताना है।

  • मूल भूमिका: यह बताती है कि लग्न कुण्डली में दिख रहा ग्रह कितना टिकाऊ और शक्तिशाली है। यदि कोई ग्रह लग्न कुण्डली में उच्च या स्वराशि में दिख रहा है लेकिन नवमांश में नीच या कमजोर है, तो उसका फल अस्थायी या संघर्षपूर्ण होता है। इसके विपरीत, यदि ग्रह जन्म कुण्डली में कमजोर दिखे, लेकिन नवमांश में बलवान हो, तो समय आने पर वह निश्चित रूप से अच्छा फल देता है।

  • महत्व: यदि शुक्र जन्म कुण्डली में नीच या अस्त है, लेकिन नवमांश में उच्च या स्वराशि में है, तो विवाह संबंधी सुख या कला में सफलता देरी से सही पर मिलती जरूर है। ग्रह की वास्तविक ताकत, जिसका फल जीवनभर मिलेगा, जानने के लिए नवमांश को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

4. 🧠 चंद्र कुण्डली: मानसिक अनुभव और घटनाओं की अनुभूति

चंद्रमा मन का कारक है। चंद्र कुण्डली यह दिखाती है कि जातक किसी घटना या जीवन के फल को कैसे महसूस करेगा।

  • मूल भूमिका: लग्न कुण्डली कर्म और घटना बताती है, नवमांश स्थायित्व बताता है, और चंद्र कुण्डली मन की प्रतिक्रिया बताती है। यह बताती है कि क्या जातक अपने जीवन के फलों से मानसिक रूप से संतुष्ट है या नहीं।

  • महत्व: यदि लग्न कुण्डली में बहुत अच्छा धन योग है, लेकिन चंद्र कुण्डली में शनि या राहु चंद्रमा से कठोर भावों में स्थित हैं, तो व्यक्ति कमाई होने के बाद भी तनाव, चिंता और असंतुष्टि महसूस करेगा। गोचर (Transits) का सबसे पहला प्रभाव मन पर पड़ता है, इसलिए दैनिक और मासिक गोचर देखने के लिए चंद्र कुण्डली का प्रयोग आवश्यक है।

निष्कर्ष: महत्व का सही क्रम

श्रेष्ठ ज्योतिष वह है जो इन चारों को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक संयुक्त प्रणाली के रूप में देखता है।

  1. प्रथम (आधार): लग्न कुण्डली से जीवन का ढाँचा और मुख्य दिशा समझें।

  2. द्वितीय (सटीकता): चलित कुण्डली से ग्रह के फल देने वाले सही भाव को तय करें।

  3. तृतीय (गहराई): नवमांश कुण्डली से यह देखें कि ग्रह का फल कितना टिकाऊ और मजबूत है।

  4. चतुर्थ (अनुभूति): चंद्र कुण्डली से यह जानें कि जातक उस फल को मानसिक रूप से कैसे स्वीकार करेगा।

जो ज्योतिषी केवल चंद्र कुण्डली देखकर भविष्यवाणी करता है, वह मन की कहानी तो बताएगा, लेकिन जीवन की पूरी तस्वीर नहीं। सटीक भविष्यवाणी के लिए, लग्न को राजा, चलित को मंत्री, नवमांश को शक्ति और चंद्र को मन मानना ही सबसे उत्तम दृष्टिकोण है।

Manu Mehta

मनु मेहता पिछले लगभग 18 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों (ANI News, News Express, TV 9,… More »
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