Millennium City को जलभराव से बचाने की तैयारी: Gmda CEO ने किया निरीक्षण, 15 जून तक काम पूरा करने के निर्देश

यह ड्रेन लेग-4 से मिलकर बरसाती पानी को सीधे नजफगढ़ ड्रेन तक पहुंचाएगी, जिससे एसपीआर (SPR) और द्वारका एक्सप्रेसवे के आसपास के क्षेत्रों में पानी नहीं भरेगा।

Millennium City : मानसून के दस्तक देने से पहले साइबर सिटी गुरुग्राम को जलभराव (वॉटरलॉगिंग) की सालाना समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) ने अपनी ताकत झोंक दी है। रविवार को जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पी सी  मीणा ने खुद मोर्चा संभालते हुए शहर की प्रमुख ड्रेनेज परियोजनाओं और जलभराव संभावित संवेदनशील इलाकों का मैराथन फील्ड निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान सीईओ ने अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि सभी निर्माण और सफाई कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे होने चाहिए ताकि बारिश के दौरान जनता को कोई परेशानी न हो। निरीक्षण की शुरुआत में  मीणा ने वाटिका चौक से राष्ट्रीय राजमार्ग-48 (NH-48) के समानांतर बन रही 4.5 किलोमीटर लंबी लेग-4 ड्रेन का जायजा लिया। इस ड्रेन की विशेषताएं निम्नलिखित हैं

यह ड्रेन लगभग 9 मीटर चौड़ी और 3 मीटर गहरी है, जिसकी जल वहन क्षमता 1400 क्यूसेक है। अधिकारियों ने बताया कि 6 महीने पहले तक इस प्रोजेक्ट का 75 फीसदी काम बाकी था, लेकिन त्वरित कार्रवाई से अब 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। शेष बचे 120 मीटर के हिस्से को 15 जून तक हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा।

लेग-4 ड्रेन के पूरी तरह चालू होने से लेग-3 (बादशाहपुर ड्रेन) पर पानी का दबाव काफी कम हो जाएगा। गेट प्रणाली (Gate System) के जरिए अतिरिक्त वर्षा जल को लेग-4 की तरफ डायवर्ट किया जा सकेगा, जिससे इससे जुड़े इलाकों में जल निकासी तेजी से होगी।

सीईओ ने ताऊ देवीलाल स्टेडियम के पास निर्माणाधीन ड्रेन के काम की भी समीक्षा की। 15 जून तक इस ड्रेन का काम पूरा होने की संभावना है। इसके शुरू होने से मेदांता रोड, नजदीकी अंडरपास और सेक्टर-32 के निवासियों को जलभराव से बड़ी राहत मिलेगी।

राष्ट्रीय राजमार्ग-48 पर नरसिंहपुर के पास होने वाले भारी जलभराव को रोकने के लिए जीएमडीए एक नई रणनीति पर काम कर रहा है। हाईवे के पास जमा होने वाले बरसाती पानी को खांडसा गांव के बाहरी हिस्से से सीधे लेग-3 ड्रेन में डाला जाएगा। इससे पानी को हीरो होंडा चौक तक ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

सनबीम फैक्ट्री के पास ट्रेंचलेस (बिना खुदाई) तकनीक से बैरल और नई ड्रेन का निर्माण किया जा रहा है। हाईवे के नीचे तीन बैरल बनाने का काम चल रहा है, जो एक्सप्रेसवे और सर्विस रोड दोनों तरफ की जल निकासी को सुदृढ़ करेगा।

समीक्षा के आखिरी चरण में श्री मीणा सेक्टर-37D पहुंचे, जहां लेग-3 और लेग-4 मास्टर ड्रेनों को मानेसर ड्रेन से जोड़ने का काम चल रहा है। इसके साथ ही, सेंट्रल पेरिफेरल रोड (CPR) के साथ बनी 6.5 किलोमीटर लंबी आरसीसी बॉक्स ड्रेन की डी-सिल्टिंग (गाद सफाई) के काम का भी निरीक्षण किया गया। (Millennium City)

यह ड्रेन लेग-4 से मिलकर बरसाती पानी को सीधे नजफगढ़ ड्रेन तक पहुंचाएगी, जिससे एसपीआर (SPR) और द्वारका एक्सप्रेसवे के आसपास के क्षेत्रों में पानी नहीं भरेगा।

सीईओ पी. सी. मीणा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ड्रेनों की एंड-टू-एंड कनेक्टिविटी और निर्बाध जल प्रवाह (Smooth Flow) सुनिश्चित किया जाए, इसमें किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

Sunil Yadav

सुनील यादव पिछले लगभग 15 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों में ( India Tv, Times Now,… More »
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