Gurugram से मुख्यमंत्री ने नई Industry Policy को किया लांच, 1.10 लाख करोड़ आया निवेश
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गर्व के साथ घोषणा की कि हरियाणा अब औद्योगिक विकास के अगले और सबसे आधुनिक चरण के लिए पूरी तरह तैयार है

Gurugram की औद्योगिक विकास यात्रा को एक नई और ऐतिहासिक गति देते हुए राज्य सरकार ने आज साइबर सिटी गुरुग्राम में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान अपनी महत्वाकांक्षी “मेक इन हरियाणा” नीति के साथ-साथ 9 नई क्षेत्रीय (सेक्टोरल) नीतियों का आधिकारिक तौर पर अनावरण किया।
सरकार की इस दूरदर्शी पहल का उद्योग जगत ने अभूतपूर्व स्वागत किया है। नीतियों के लॉन्च होने के तुरंत बाद राज्य को विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में लगभग 1,10,000 करोड़ रुपये के वास्तविक निवेश प्रस्ताव (MoUs) प्राप्त हुए, जिसमें करीब 30,000 करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रोजेक्ट्स शामिल हैं।
यह मेगा इवेंट हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी एवं उद्योग मंत्री श्री राव नरबीर सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में देशभर से दिग्गज उद्योगपति, वैश्विक निवेशक, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के संचालक, उभरते स्टार्टअप्स, विदेशी प्रतिनिधिमंडल और सरकार के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए।
कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह और निवेशकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गर्व के साथ घोषणा की कि हरियाणा अब औद्योगिक विकास के अगले और सबसे आधुनिक चरण के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि राज्य सरकार तेज प्रशासनिक व्यवस्था, मजबूत आधारभूत संरचना (Infrastructure), सुगम निवेशक सुविधाएं, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और उद्योग-पारदर्शिता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हरियाणा अब केवल निवेश का गंतव्य नहीं, बल्कि उद्योगों का वास्तविक साझेदार बनकर उभरेगा।
राज्य के उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह ने नई नीतियों के विजन को रेखांकित करते हुए कहा कि इन नीतिगत बदलावों का मुख्य उद्देश्य राज्य में विनिर्माण (Manufacturing) को मजबूत करना, क्षेत्र-विशेष विकास को बढ़ावा देना और एमएसएमई (MSME) सेक्टर को हरसंभव सहयोग देना है।
उन्होंने कहा कि ये नीतियां वैश्विक निवेश को आकर्षित कर हरियाणा में एक ऐसा मजबूत और भविष्य-उन्मुख औद्योगिक तंत्र (Future-Ready Industrial Ecosystem) तैयार करेंगी, जो आने वाले कई दशकों तक राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेगा।
सरकार ने मुख्य “मेक इन हरियाणा” नीति के साथ जो 9 क्षेत्रीय नीतियां लॉन्च की हैं, वे विशेष रूप से निम्नलिखित उभरते और उच्च-क्षमता वाले क्षेत्रों (Emerging Sectors) पर केंद्रित हैं।
विनिर्माण (Manufacturing) और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग,विद्युत वाहन (Electric Vehicles) और इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing), डेटा सेंटर्स (Data Centers) और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC), टॉयज़ एंड स्पोर्ट्स गुड्स (खिलौने और खेलकूद का सामान)
औद्योगिक विस्तार को रफ्तार देने के लिए नीति में कई ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव किए गए हैं। राज्य के पुराने ए, बी, सी, डी (A/B/C/D) ब्लॉक वर्गीकरण प्रणाली को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर अब एक बेहद सरल, पारदर्शी और आधुनिक क्षेत्र वर्गीकरण ढांचा लागू किया गया है। पूरे राज्य में समान और संतुलित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए पहली बार व्यापक वित्तीय प्रोत्साहन लागू किए गए हैं।
उद्योगों की प्रोजेक्ट वायबिलिटी (Project Viability) को बेहतर बनाने और निवेश को तेजी देने के लिए सरकार द्वारा 30 प्रतिशत तक का ‘कैपिटल सपोर्ट’ (पूंजीगत सहायता) दिया जाएगा। इसके साथ ही नेट एसजीएसटी (Net SGST) रीइंबर्समेंट इंसेंटिव्स का लाभ भी मिलेगा।
इन्नोवेशन-लेड मैन्युफैक्चरिंग’ को बढ़ावा देने के लिए नीतियों में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) इंसेंटिव्स का विशेष प्रावधान किया गया है, जिसके तहत कंपनियों को 50 करोड़ रुपये तक की सहायता मिलेगी। वैश्विक स्तर पर पैठ बनाने के लिए ‘एक्सपोर्ट-लिंक्ड इंसेंटिव्स’ भी जोड़े गए हैं।
जियोपॉलिटिकल व्यवधानों (Geopolitical Disruptions) के कारण प्रभावित होने वाली एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड यूनिट्स को दूसरे क्षेत्रों में विविधीकरण (Diversification) के लिए वन-टाइम (एकमुश्त) वित्तीय सहायता दी जाएगी।
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए रिन्यूएबल एनर्जी अपनाने, कार्बन क्रेडिट जनरेशन, ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) सिस्टम और ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन से जुड़े विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे।
भारत सरकार की पीएलआई (PLI) जैसी योजनाओं के तहत लाभ पाने वाले उद्योगों को हरियाणा सरकार की तरफ से अतिरिक्त 50 प्रतिशत का ‘टॉप-अप बेनिफिट’ दिया जाएगा।
राज्य में औद्योगिक विस्तार को गति देने के लिए बड़े पैमाने पर ‘मेगा प्राइवेट इंडस्ट्रियल पार्क्स’ के विकास को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जाएगा।
तकनीक के इस दौर में निवेशकों की सहूलियत के लिए सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस “सिंगल विंडो 2.0” प्रणाली का भी शुभारंभ किया। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म हरियाणा में निवेशकों के अनुभव को पूरी तरह से बदल कर रख देगा। इस पोर्टल के माध्यम से निवेशक निम्नलिखित हाई-टेक सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे:
एआई-आधारित निवेश ब्लूप्रिंट और सिंगल-क्लिक जीआईएस (GIS) भूमि पहचान प्लेटफॉर्म।
इंसेंटिव इवैल्यूएशन (प्रोत्साहन मूल्यांकन) और अप्रूवल मैपिंग।
पोर्टल पर एक एआई चैटबॉट/एजेंट उपलब्ध रहेगा, जिससे निवेशक सीधे संवादात्मक (Conversational) तरीके से जुड़कर अपनी समस्याओं का रियल-टाइम समाधान पा सकेंगे। इसके जरिए इंसेंटिव की गणना और उपयुक्त औद्योगिक भूमि की पहचान एक ही जगह हो जाएगी।
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का एक अन्य सबसे बड़ा आकर्षण राज्य के आगामी वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन “हैपनिंग हरियाणा” (Happening Haryana) की आधिकारिक घोषणा रही। इस वैश्विक सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हरियाणा को विश्व के निवेश मानचित्र पर सबसे मजबूत और पसंदीदा राज्य के रूप में स्थापित करना है।
समारोह के समापन पर मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, जीसीसी, डेटा सेंटर्स, खाद्य प्रसंस्करण और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ₹1,10,000 करोड़ के समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान किया गया। उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि ये निवेश प्रस्ताव केवल कागजी नहीं हैं, बल्कि ये वास्तविक धरातल पर उतरने के लिए तैयार हैं। इससे राज्य के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए और सुनहरे अवसर पैदा होंगे। (Gurugram)
मजबूत कनेक्टिविटी, दिल्ली-एनसीआर तक रणनीतिक पहुंच, लगातार फैलते इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर और तेजी से बढ़ते मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के चलते हरियाणा आज निवेश के मामले में पूरे भारत का सबसे पसंदीदा राज्य (Preferred Destination) बनकर चमक रहा है। (Gurugram)