NGT Ban Ineffective: अरावली पहाड़ी का पतन जारी, अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी
NGT की रोक बेअसर; रसूखदारों के 420 अवैध फार्महाउसों पर मेहरबान प्रशासन, तोड़फोड़ के नाम पर सिर्फ 'खानापूर्ति

NGT Ban Ineffective : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के कड़े आदेशों और सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बावजूद गुरुग्राम के सोहना क्षेत्र में स्थित अरावली की पहाड़ियों का सीना छलनी किया जा रहा है। अधिकारियों की कथित मिलीभगत और घोर लापरवाही के चलते अरावली पहाड़ी क्षेत्र में अवैध निर्माण का कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। नगर परिषद सोहना द्वारा की जाने वाली कार्रवाई अब केवल कागजी खानापूर्ति और दिखावा बनकर रह गई है, जबकि धरातल पर कंक्रीट का जंगल लगातार बढ़ता जा रहा है।
NGT Ban Ineffective : राजनेता, जज और अफसरों के 420 अवैध फार्महाउस
अरावली के रायसीना (वार्ड नंबर एक) और आसपास के प्रतिबंधित क्षेत्रों में पर्यावरण नियमों को ताक पर रखकर आलीशान निर्माण किए गए हैं। जांच में सामने आया है कि इस पहाड़ी क्षेत्र में करीब 420 अवैध फार्महाउस चिन्हित किए गए हैं। ये फार्महाउस देश-प्रदेश की जानी-मानी हस्तियों, जिनमें रसूखदार राजनेता, प्रशासनिक अधिकारी और पूर्व जज शामिल हैं, के बताए जाते हैं। इन आलीशान फार्महाउसों में विलासिता के तमाम साधन उपलब्ध हैं। प्रशासनिक और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने के कारण ही इन अवैध निर्माणों पर कभी कोई बड़ी और निर्णायक कार्रवाई नहीं होती।
NGT Ban Ineffective : नोटिसों का खेल: कार्रवाई के नाम पर केवल ‘बुलडोजर ड्रामा’
अरावली को बचाने की जिम्मेदारी जिस नगर परिषद पर है, उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हाल ही में परिषद के बुलडोजर ने पहाड़ी में चल रहे एक अवैध रास्ते के निर्माण और बाउंड्रीवाल को जमींदोज किया। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई महज एक ड्रामा थी। सवाल यह उठता है कि जब 6 से 8 फीट ऊंची बाउंड्रीवाल या आलीशान विला का निर्माण शुरू होता है, तब परिषद की टीमें क्यों सोई रहती हैं? निर्माण पूरा हो जाने के बाद ही अधिकारियों को अवैध निर्माण क्यों याद आता है? पहाड़ी की निगरानी के लिए बकायदा दो टीमें नियुक्त हैं, फिर भी उनकी नाक के नीचे निर्माण कार्य जारी रहना सीधे तौर पर मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
क्या कहते हैं नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारी?
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब हमारी टीम ने संबंधित अधिकारियों से बात की, तो उन्होंने अपनी ओर से नियमित कार्रवाई किए जाने का दावा किया:

अरावली पहाड़ी में परिषद की टीम लगातार निगरानी रखती है। जैसे ही कहीं अवैध निर्माण कार्य का पता चलता है, तुरंत कार्रवाई की जाती है। अभी चार दिन पहले भी एक अवैध रास्ते और बाउंड्री वाल को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया था। समय-समय पर ऐसी कार्रवाई होती रहती है। क्षेत्र में बाकायदा गश्त की जाती है और कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।—राजपाल, म्यूनिस्पल इंजीनियर, नगर परिषद सोहना
NGT Ban Ineffective : मिलीभगत के चलते बेअसर साबित हो रहे कानून
अधिकारियों के दावों के उलट, अरावली की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। कानूनन इस संवेदनशील क्षेत्र में अवैध निर्माण, अवैध खनन या हरे पेड़ों को काटने जैसी किसी भी गतिविधि पर पूर्ण प्रतिबंध है। लेकिन धरातल पर अधिकारियों की लापरवाही और सांठगांठ के चलते एनजीटी के आदेश हवा में उड़ाए जा रहे हैं। जब तक छोटे कर्मचारियों और बड़े अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी और रसूखदारों के इन 420 फार्महाउसों पर बिना किसी दबाव के पीला पंजा नहीं चलेगा, तब तक अरावली के इस पतन को रोक पाना नामुमकिन नजर आता है।