हरियाणा में लागू होगी ‘No PUC, No Fuel’ व्यवस्था! जल्द आएगी नई EV पॉलिसी, गुरुग्राम बैठक में सरकार का बड़ा फैसला
जानें अब बिना PUC सर्टिफिकेट पेट्रोल-डीजल मिलेगा या नहीं और क्या-क्या बदलने वाला है ?

No PUC, No Fuel : अगर आप भी NCR में गाड़ी चलाते हैं, तो समय रहते अपनी गाड़ी का PUC सर्टिफिकेट जरूर अपडेट करवा लें, ताकि आने वाले दिनों में आपको पेट्रोल पंपों पर परेशानी का सामना न करना पड़े!
No PUC, No Fuel : दिल्ली-एनसीआर में हर साल गहराते वायु प्रदूषण के संकट से निपटने के लिए हरियाणा सरकार ने कमर कस ली है। इस दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राज्य सरकार जल्द ही ‘नो पीयूसीसी-नो फ्यूल’ (No PUCC, No Fuel) व्यवस्था लागू करने जा रही है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आपकी गाड़ी का पॉल्यूशन कंट्रोल सर्टिफिकेट (PUC) अमान्य या एक्सपायर होगा, तो आपको पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं मिलेगा।
No PUC, No Fuel : हाल ही में गुरुग्राम में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इस बैठक की सह-अध्यक्षता हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने की।
नई EV नीति से बदलेगी हरियाणा की तस्वीर
प्रदूषण मुक्त परिवहन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक और बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार आगामी कैबिनेट बैठक में हरियाणा की नई इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति को मंजूरी देने जा रही है।
इस नई नीति के तहत:
सार्वजनिक परिवहन का कायाकल्प: एनसीआर सहित पूरे प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े का तेजी से विस्तार किया जाएगा।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: शहरों और प्रमुख राजमार्गों पर चार्जिंग स्टेशनों का मजबूत नेटवर्क स्थापित होगा।
पर्यावरण-अनुकूल परिवहन: पुरानी और अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों को सड़कों से हटाने के लिए सख्त अभियान चलाया जाएगा।
‘हरित चौराहे’ और ट्रैफिक हॉटस्पॉट पर विशेष नजर (No PUC, No Fuel)
बैठक के दौरान सड़कों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम को भी वायु प्रदूषण की एक बड़ी वजह माना गया। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि जहां भी गाड़ियों की लंबी कतारें लगती हैं, उन ‘ट्रैफिक हॉटस्पॉट’ का तुरंत समाधान किया जाए।
सड़कों के पुनर्विकास के साथ-साथ ‘हरित चौराहों’ (Green Intersections) के विकास पर जोर दिया जा रहा है, ताकि उड़ती धूल और वाहनों के उत्सर्जन को कम किया जा सके। साथ ही पूरे क्षेत्र में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम (CAAQMS) का दायरा भी बढ़ाया जाएगा।
कचरा प्रबंधन और उद्योगों के लिए सख्त निर्देश (No PUC, No Fuel)
बैठक में केवल वाहनों तक ही बात सीमित नहीं रही, बल्कि प्रदूषण के अन्य मुख्य कारणों पर भी कड़े फैसले लिए गए:
निर्माण एवं विध्वंस (C&D) कचरा: इमारतों के निर्माण और तोड़फोड़ से उड़ने वाली धूल पर रोक लगाने के लिए वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
ठोस कचरा निस्तारण: कचरे के उठान और उसके वैज्ञानिक निस्तारण की गति तेज की जाएगी।
औद्योगिक प्रदूषण: औद्योगिक इकाइयों से होने वाले धुएं और हानिकारक उत्सर्जन पर केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कड़ी निगरानी रखेंगे।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित विभाग इन योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित न रखें, बल्कि तय समय-सीमा के भीतर धरातल पर उतारकर दिखाएं |
