GMDA का अजीब दावा – 200MM बरसात के बाद भी गुरुग्राम में नहीं हुआ जलभराव, नहीं लगने दिया जाम, आप भी अपनी राय दीजिए !

GMDA : पिछले तीन दिनों में गुरुग्राम में हुई जोरदार बारिश के बाद जो हालात हुए वो सबके सामने हैं । गुरुग्राम का शायद ही कोई ऐसा इलाका बचा हो जहां पर पानी ना भरा हो । सोशल मीडिया पर आम जनता ने ऐसी सैंकड़ों वीडियो अपलोड किए जिनमें गुरुग्राम के दयनीय हालात दिखे लेकिन इसके उलट तीन दिन बाद GMDA ने अजीब सा दावा किया है । GMDA ने प्रेस नोट जारी कर दावा किया है कि गुरुग्राम में अधिकतर इलाकों में जलभराव नहीं हुआ क्योंकि जीएमडीए ने बेहतर काम किया है । जीएमडीए ने ये भी दावा किया है कि तीन दिन में 200 एम एम बारिश होने के बावजूद जाम नहीं लगा ।
GMDA का दावा पढ़िए
GMDA के प्रवक्ता आर.एस. सांगवान ने प्रेस नोट जारी कर दावा किया है कि गुरुग्राम में पिछले तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के बीच जीएमडीए और एमसीजी की इस बार रणनीति काफ़ी कारगर रही और प्रमुख मार्गों पर यातायात चलता रहा। तीन दिनों में 200 मिमी से अधिक बारिश रिकॉर्ड होने के बावजूद पिछले वर्षों में जलभराव के लिए बदनाम रहे शहर के ज्यादातर हॉटस्पॉट पानी से मुक्त रहे। जहां कहीं पानी जमा भी हुआ, वहां दो-तीन घंटे में निकासी हो गई। इसका सीधा असर शहर की रफ्तार पर दिखाई दिया। पिछले वर्षों की तरह कई घंटों तक सड़कों पर पानी जमा रहने और ट्रैफिक थमने की स्थिति इस बार बड़े स्तर पर देखने को नहीं मिली।
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गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने नगर निगम गुरुग्राम के समन्वय के साथ मानसून से पहले पुरानी ड्रेनेज व्यवस्था में सुधार, ड्रेनों की सफाई, नए ड्रेन लिंक, सैकड़ों रोड गली इनलेट और ग्रीन बेल्ट के लेवल को सुधारने जैसे उपाय किए थे। जीएमडीए के सीईओ पी.सी. मीणा के मार्गदर्शन में किए गए इन कामों का उद्देश्य नई और महंगी परियोजनाओं के बजाय मौजूदा जल निकासी व्यवस्था की क्षमता बढ़ाना था।वही एमसीजी आयुक्त श्री प्रदीप दहिया स्वयं सक्रिय नज़र आए और उन्होंने कई हॉटस्पॉट स्थलों का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को पानी निकासी जल्द करवाने के लिए निर्देशित किया ।
तीन प्रमुख ड्रेनों की सफाई से बढ़ी पानी ले जाने की क्षमता
GMDA के मुताबिक शहर की जल निकासी व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले लेग-1, लेग-2 और लेग-3 ड्रेन की मानसून से पहले व्यापक सफाई और डिसिल्टिंग कराई गई। ड्रेनों में जमा गाद और मलबा हटने से उनकी पानी ले जाने की क्षमता बढ़ी। इसके साथ ही सतही ड्रेनों की सफाई कराई गई और सड़कों पर सैकड़ों नए रोड गली इनलेट बनाए गए, ताकि बारिश का पानी जल्द से जल्द मुख्य ड्रेनेज नेटवर्क तक पहुंच सके।
सड़कों के किनारे बनी ग्रीन बेल्ट में वर्षों से जमा मलबे को भी बड़े स्तर पर हटाया गया। कई जगह ग्रीन बेल्ट का लेवल नीचे किया गया, ताकि बारिश का पानी सड़क पर रुकने के बजाय सीधे जमीन और ग्रीन बेल्ट की ओर जा सके।
नरसिंहपुर में सबसे बड़ा बदलाव
जीएमडीए के प्रवक्ता सांगवान ने बताया कि पिछले वर्षों में नरसिंहपुर गुरुग्राम के सबसे बड़े जलभराव वाले इलाकों में शामिल रहा है। बारिश के बाद यहां कई घंटों तक पानी जमा रहता था और दिल्ली-जयपुर हाईवे पर भी यातायात प्रभावित होता था। इस बार स्थिति अलग रही।
जीएमडीए ने करीब डेढ़ महीने के रिकॉर्ड समय में नरसिंहपुर के लिए नई ड्रेन तैयार की। दिल्ली-जयपुर हाईवे के नीचे से पानी को दूसरी ओर ले जाने के लिए ट्रेंचलेस तकनीक से ड्रेन बनाई गई। इस काम में उस समय तेजी लानी पड़ी जब पानी की निकासी के लिए प्रस्तावित कल्वर्ट के निर्माण को अंतिम चरण में एनएचएआई की ओर से आगे नहीं बढ़ाया गया।
इसके बाद जीएमडीए ने एनएचएआई से आवश्यक स्वीकृति लेकर खुद ट्रेंचलेस ड्रेन तैयार कराई। इसका परिणाम इस मानसून में साफ दिखाई दिया। पहले बारिश का पानी प्राकृतिक बहाव से हीरो होंडा चौक पर जमा होता था और फिर मशीनों के जरिए उसे उठाकर लेग-3 में डाला जाता था। इस प्रक्रिया में काफी समय लगता था। नई व्यवस्था से पानी की निकासी का रास्ता आसान हुआ और नरसिंहपुर इस बार बड़े जलभराव से बचा रहा।
तीन दिन WFH की एडवाइज़री जारी कर जाम ना लगने देने की वाहवाही लूटने लगे अधिकारी
जीएमडीए का दावा है कि सदर्न परिफेरी रोड़ (एसपीआर) पर भी इस बार जलभराव नहीं होने से यातायात सामान्य रहा। इसके पीछे जीएमडीए की नई लेग-4 ड्रेन को अहम माना जा रहा है। वाटिका चौक से सेक्टर-37डी तक बनाई गई इस ड्रेन को रिकॉर्ड समय में तैयार किया गया। इससे एसपीआर और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले बारिश के पानी की निकासी में मदद मिली और लेग-3 पर पानी का दबाव भी कम हुआ।
इसका फायदा यह हुआ कि लेग-3 दूसरे इलाकों का पानी भी प्रभावी ढंग से ले सकी। पिछले वर्षों में जलभराव के कारण जिन प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित होता था, इस बार वहां वाहनों की आवाजाही काफी हद तक सामान्य रही । लेकिन प्रेस नोट में जीएमडीए ने ये भी कहीं भी नहीं कहा कि जिला प्रशासन ने लगातार तीन दिन तक निजी कंपनियों से वर्क फ्रॉम होम की एडवाइजरी जारी की गई । अब दावा किया जा रहा है कि जाम नहीं लगने दिया गया ।
इन हॉटस्पॉट इलाकों में भी नहीं हुआ जलभराव
जीएमडीए का दावा है कि इस बार ऐसी शानदार व्यवस्था की गई है कि शहर के सुभाष चौक, नरसिंहपुर , उमंग भारद्वाज चौक , मेजर सुशी आईमा मार्ग , सेक्टर 22/23, सिग्नेचर टावर , ए आई टी चौक , मेदान्ता रोड़ , राजीव चौक तथा राजीव चौक से –सुभाष चौक जैसे प्रमुख स्थानों पर भी इस बार बड़े स्तर पर जलभराव नहीं हुआ।
मेदांता रोड, राजीव चौक और ताऊ देवीलाल स्टेडियम क्षेत्र की निकासी सुधारने के लिए स्टेडियम परिसर के भीतर से नई ड्रेन बनाई गई। इससे बारिश के पानी को प्राकृतिक बहाव के अनुरूप निकालने में मदद मिली।
केवल बारिश का पानी ही नहीं निकला , जीएमडीए ने भू जल रिचार्ज के भी किए उपाय
जीएमडीए की तैयारी केवल जलभराव रोकने तक सीमित नहीं रही। बारिश के पानी को भूजल रिचार्ज के लिए इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया गया। आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों के साथ मिलकर रेन वाटर हार्वेस्टिंग की नई तकनीक पर काम किया गया। एआईटी चौक पर तैयार किए गए रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर के जरिए पानी को जमीन की अधिक पानी सोखने वाली परतों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। ऐसे तीन स्ट्रक्चर तैयार किए गए हैं। इनके जरिए बारिश के पानी को तेजी से निकालने के साथ साथ भूजल स्तर को रिचार्ज करने का दोहरा उद्देश्य पूरा किया जा रहा है। भविष्य में गुरुग्राम जिले के अन्य स्थानों पर भी ऐसे स्ट्रक्चर विकसित किए जाने की योजना है।
जहां पानी भरा, वहां की भी योजना तैयार, बरसात के बाद पहनाया जाएगा अम्लिजामा
हालांकि इस बार ज्यादातर संवेदनशील स्थानों पर स्थिति नियंत्रण में रही, लेकिन शीतला माता रोड और बादशाहपुर के पास आयरिया मॉल के सामने कुछ स्थानों पर जलभराव हुआ। जीएमडीए और एमसीजी ने इन स्थानों को भी चिन्हित कर लिया है। बारिश समाप्त होने के बाद इन स्थानों की विस्तृत समीक्षा कर स्थायी समाधान के लिए आवश्यक कार्य किए जाएंगे।
इस मानसून की बारिश ने गुरुग्राम की ड्रेनेज व्यवस्था की नई तस्वीर सामने रखी है। जहां पहले कुछ घंटों की बारिश के बाद शहर के प्रमुख मार्ग जलभराव से जूझते थे, वहीं इस बार 200 मिमी से अधिक बारिश के बावजूद ज्यादातर प्रमुख सड़कें और यातायात गलियारे चलते रहे। जीएमडीए की रणनीति में नई परियोजनाओं के साथ-साथ मौजूदा व्यवस्था की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया, जिसका असर इस बार जमीन पर दिखाई दिया।
