New Districts: हरियाणा में बन सकते हैं 12 नए जिले, ‘मानेसर’ की दावेदारी सबसे मजबूत, जानें क्यों जिला बनना लगभग तय!

विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार की अध्यक्षता में बनी 4 सदस्यीय मंत्रिमंडलीय समिति; गुरुग्राम का बोझ कम करने के लिए मानेसर को जिला बनाने की मांग तेज।

New Districts/गुरुग्राम : हरियाणा सरकार प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे को और अधिक सुदृढ़ तथा जनसुविधाजनक बनाने के लिए बड़े पैमाने पर पुनर्गठन की तैयारी कर रही है। राज्य में लगभग एक दर्जन (12) नए जिले बनाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। इसके लिए सरकार ने विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार की अध्यक्षता में चार सदस्यीय उच्चस्तरीय मंत्रिमंडलीय समिति का गठन किया है।

इस समिति में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा, राजस्व मंत्री विपुल गोयल और कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा को शामिल किया गया है। यह समिति आगामी दिनों में (New Districts) नए जिले, उपमंडल, तहसील और अन्य प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन को लेकर अपनी विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी।

जिन नए जिलों (New Districts) के गठन की चर्चा सबसे गर्म है, उनमें गोहाना, डबवाली, असंध, मानेसर, पिहोवा, पटौदी, बरवाला, सफीदों, नारायणगढ़, रतिया और बहादुरगढ़ प्रमुख हैं। लेकिन इन सभी में गुरुग्राम के औद्योगिक क्षेत्र मानेसर (Manesar) की दावेदारी सबसे ज्यादा मजबूत मानी जा रही है।

New Districts : क्यों जिला बनने की दौड़ में सबसे आगे है मानेसर?

गुरुग्राम जिले का हिस्सा मानेसर अब महज एक कस्बा या औद्योगिक क्षेत्र नहीं रहा, बल्कि यह हरियाणा के सबसे बड़े आर्थिक इंजनों में से एक बन चुका है। विशेषज्ञों और प्रशासनिक हलकों के अनुसार, मानेसर को नया जिला बनाने के पीछे कई ठोस कारण हैं:

  1. देश का प्रमुख इंडस्ट्रियल हब (IMT Manesar):

    मानेसर में मारुति सुजुकी, होंडा, तोशिबा जैसी वैश्विक कंपनियों समेत हजारों ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां स्थित हैं। यह क्षेत्र हर साल सरकार को अरबों रुपये का राजस्व (Tax Revenue) कमाकर देता है।

  2. नगर निगम का पहले ही गठन:

    सरकार ने मानेसर के तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए दिसंबर 2020 में ही इसे नगर निगम (Municipal Corporation Manesar) घोषित कर दिया था। 29 से अधिक गांवों और नए सेक्टरों को इसमें शामिल किया जा चुका है। जिला बनने के लिए आवश्यक बुनियादी प्रशासनिक ढांचा यहाँ पहले से ही तैयार है।

  3. गुरुग्राम पर बढ़ता आबादी और प्रशासनिक दबाव:

    गुरुग्राम तेजी से फैल रहा है और इसकी आबादी में भारी उछाल आया है। गुरुग्राम के उपायुक्त और पुलिस कमिश्नर कार्यालय से मानेसर के कई दूर-दराज़ इलाकों की दूरी काफी अधिक हो जाती है। मानेसर के अलग जिला बनने से प्रशासनिक कामकाज में तेजी आएगी और गुरुग्राम का बोझ भी कम होगा।

  4. स्वतंत्र पुलिस कमिश्नरेट और सुरक्षा व्यवस्था:

    औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण मानेसर में रोजाना लाखों मजदूर, इंजीनियर और विदेशी प्रतिनिधि आते-जाते हैं। अलग जिला बनने से यहाँ स्वतंत्र पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की स्थायी तैनाती होगी, जिससे कानून-व्यवस्था और बेहतर होगी।

  5. जनसंख्या और क्षेत्रफल की कसौटी:

    प्रस्तावित नए जिले के लिए तय मानकों (जनसंख्या और गांवों की संख्या) पर मानेसर पूरी तरह खरा उतरता है। मानेसर और आसपास के पटौदी/फर्रुखनगर जैसे इलाकों को मिलाकर एक आदर्श जिला तैयार किया जा सकता है।

New Districts : समिति की रिपोर्ट पर टिकी सबकी निगाहें

मंत्रिमंडलीय समिति वर्तमान में सभी 12 संभावित स्थानों से आए प्रस्तावों, भौगोलिक स्थिति, दूरी, आबादी और आर्थिक व्यवहार्यता का विश्लेषण कर रही है। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री के अंतिम अनुमोदन के बाद नए जिलों की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। यदि मानेसर को जिले का दर्जा मिलता है, तो यह न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि उद्योग जगत के लिए भी एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक साबित होगा।

Manu Mehta

मनु मेहता पिछले लगभग 18 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों (ANI News, News Express, TV 9,… More »
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