भारतीय रेलवे का नया इतिहास: 180 की रफ़्तार पर दौड़ी Vande Bharat स्लीपर, नहीं छलका भरे गिलास से पानी!
कोटा-नागदा सेक्शन पर CRS ट्रायल हुआ सफल; अब राजधानी से भी तेज़ और आरामदायक होगा आपका सफर।

रफ़्तार का नया राजा! Vande Bharat स्लीपर ने 180 KM/H की स्पीड से मचाई खलबली
नई दिल्ली/कोटा: भारतीय रेल ने आज दुनिया को अपनी इंजीनियरिंग का लोहा मनवा दिया है। कोटा-नागदा रेल खंड के बीच जब वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का ट्रायल शुरू हुआ, तो पटरियों पर सिर्फ ट्रेन नहीं, बल्कि भारत का भविष्य दौड़ रहा था। ट्रेन ने 180 किमी/घंटा की अपनी टॉप स्पीड को छुआ, लेकिन इस दौरान जो हुआ, उसने सबको हैरान कर दिया।
भरे गिलास का ‘जादुई’ टेस्ट: रफ़्तार 180 की, स्थिरता हिमालय सी
इस ट्रायल की सबसे दिलचस्प बात वह वीडियो रही, जिसमें ट्रेन के अंदर टेबल पर पानी से लबालब भरा एक गिलास रखा गया था। जब ट्रेन 180 किमी/घंटा की रफ़्तार पर थी, तब भी उस गिलास से पानी की एक बूंद तक नहीं छलकी। यह इस बात का सबूत है कि ट्रेन के कोचों में इस्तेमाल किया गया उन्नत ‘सस्पेंशन सिस्टम’ और ‘एंटी-वाइब्रेशन तकनीक’ कितनी सटीक है। यात्रियों के लिए इसका मतलब है—सुपरफ़ास्ट रफ़्तार में भी बिना किसी झटके के सुकून की नींद।
वॉटर टेस्ट: भारी बारिश भी बेअसर
सुरक्षा की कसौटी पर परखने के लिए ट्रेन का वॉटर टेस्ट (Water Test) भी किया गया। हाई-प्रेशर वॉटर जेट्स के जरिए यह जांचा गया कि क्या तेज़ रफ़्तार के दौरान कोच के अंदर पानी का रिसाव होता है। नतीजा शत-प्रतिशत सफल रहा; कोच की सीलिंग और दरवाजों ने पानी को अंदर आने से पूरी तरह रोक दिया।
स्लीपर वर्जन की 5 बड़ी खासियतें:
कवच सुरक्षा: यह ट्रेन स्वदेशी एंटी-कोलिजन सिस्टम ‘कवच’ से लैस है, जो दो ट्रेनों की भिड़ंत को नामुमकिन बनाता है।
एंटी-बैक्टीरियल कोटिंग: ट्रेन के इंटीरियर को खास तौर पर डिज़ाइन किया गया है ताकि सफर के दौरान संक्रमण का खतरा न रहे।
ऑटोमैटिक सेंसर लाइटिंग: वॉशरूम और गैलरी में स्मार्ट लाइटिंग दी गई है, जो सेंसर के जरिए काम करती है।
बेहतर कुशनिंग: स्लीपर बर्थ को पहले से ज़्यादा आरामदायक बनाया गया है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा में थकान न हो।
ध्वनि रोधक कोच: बाहर कितना भी शोर हो, ट्रेन के अंदर की आवाज़ बिल्कुल कम रहेगी।
राजधानी एक्सप्रेस का विकल्प बनेगी ‘वंदे भारत’
रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) की हरी झंडी मिलने के बाद, यह ट्रेन जल्द ही दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे व्यस्त रूटों पर दौड़ती नज़र आएगी। यह न केवल समय बचाएगी, बल्कि यात्रियों को हवाई जहाज़ जैसा अनुभव पटरियों पर देगी।
रेलवे एक्सपर्ट्स का कहना है: “यह सिर्फ एक रफ़्तार का टेस्ट नहीं था, बल्कि भारतीय रेलवे की गुणवत्ता (Quality) का प्रमाण था। 180 की स्पीड पर पानी न छलकना भारत के लिए गर्व की बात है।”














