Foreign Tour : गर्मी की छुट्टियों या आगामी महीनों में गुरुजन नहीं जा सकेंगे विदेश घूमने; सरकार ने लगाई पाबंदी!
हरियाणा शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला: सितंबर तक शिक्षकों और कर्मचारियों की विदेश यात्राओं पर रोक, सिर्फ मेडिकल इमरजेंसी में मिलेगी छूट

Foreign Tour : हरियाणा के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर है। अगर आप इस गर्मी की छुट्टियों या आगामी महीनों में विदेश घूमने (Foreign Tour) की प्लानिंग कर रहे थे, तो आपको तगड़ा झटका लग सकता है। हरियाणा सरकार के शिक्षा विभाग ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए विभाग के सभी अधिकारियों, शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की विदेश यात्राओं (Ex-India Leave, Foreign Tour) पर आगामी सितंबर महीने तक पूरी तरह से रोक लगा दी है।
📄 सरकारी पत्र (आदेश) का हवाला
शिक्षा विभाग के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, विभाग के संज्ञान में आया था कि बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी शैक्षणिक सत्र के दौरान विदेश यात्रा (Foreign Tour) की अनुमति मांग रहे थे।
आदेश की मुख्य बात: “छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से चलते रहें, इसलिए निदेशालय ने निर्णय लिया है कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र में सितंबर महीने तक किसी भी कर्मचारी को विदेश यात्रा (Ex-India Leave) की मंजूरी नहीं दी जाएगी। पहले से लंबित और नए आवेदनों पर यह रोक तुरंत प्रभाव से लागू होती है।”
🛑 केवल इन मामलों में मिलेगी छूट
सरकार ने साफ किया है कि यह पाबंदी सामान्य रूप से घूमने-फिरने, रिश्तेदारों से मिलने या निजी आयोजनों के लिए (Foreign Tour) जाने वाले कर्मचारियों पर सख्ती से लागू होगी। हालांकि, मानवीय आधार पर केवल एक ही परिस्थिति में छूट दी जाएगी:
मेडिकल इमरजेंसी: यदि कर्मचारी या उसके किसी बेहद करीबी पारिवारिक सदस्य को गंभीर स्वास्थ्य समस्या है और विदेश जाना अनिवार्य है, केवल तभी विशेष अनुमति दी जाएगी। इसके लिए पुख्ता मेडिकल दस्तावेज दिखाने होंगे।
❓ क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
शिक्षा विभाग के इस अचानक आए फैसले के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण माने जा रहे हैं:
पढ़ाई का नुकसान बचाना: शैक्षणिक सत्र की शुरुआत और बीच के महीनों में शिक्षकों के (Foreign Tour) छुट्टी पर जाने से छात्रों का सिलेबस पिछड़ जाता है।
परीक्षा परिणामों में सुधार: विभाग इस बार बोर्ड और नॉन-बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों को लेकर काफी गंभीर है, जिसके लिए शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है।
प्रशासनिक काम: सत्र के शुरुआती महीनों में दाखिले, किताबों का वितरण और अन्य प्रशासनिक काम चरम पर होते हैं, जिसमें स्टाफ की कमी बाधा बन रही थी।
नोट: शिक्षा विभाग के इस फैसले से उन शिक्षकों में थोड़ा निराशा का माहौल जरूर है जो छुट्टियों में विदेश जाने (Foreign Tour) का प्लान बना चुके थे, लेकिन विभाग ने साफ कर दिया है कि छात्रों का भविष्य उनकी पहली प्राथमिकता है।