Real Estate Breaking : रहेजा डेवलपर्स दिवालिया घोषित होने की कगार पर, 137 करोड़ डकार कर नहीं दिए फ्लैट
कोर्ट के इस आदेश से सेक्टर-78 स्थित 'रेवांता' (Revanta) रिहायशी प्रोजेक्ट के 176 फ्लैट खरीदारों को वर्षों के इंतजार के बाद न्याय की एक बड़ी उम्मीद जगी है।

Real Estate Breaking : राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की नई दिल्ली स्थित प्रधान पीठ ने गुरुग्राम के रियल एस्टेट क्षेत्र में एक बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायाधिकरण ने रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड (Raheja Developers Ltd) के खिलाफ दिवाला समाधान प्रक्रिया (Insolvency Proceedings) शुरू करने की याचिका को स्वीकार कर लिया है।
कोर्ट के इस आदेश से सेक्टर-78 स्थित ‘रेवांता’ (Revanta) रिहायशी प्रोजेक्ट के 176 फ्लैट खरीदारों को वर्षों के इंतजार के बाद न्याय की एक बड़ी उम्मीद जगी है। न्यायाधिकरण ने अपने फैसले में माना कि डेवलपर द्वारा खरीदारों को तय समय सीमा के भीतर फ्लैटों का कब्जा न देने का प्रथम दृष्टया (Prima Facie) मजबूत मामला बनता है।
यह कानूनी याचिका सुरिंदर अग्रवाल सहित 176 पीड़ित खरीदारों द्वारा दायर की गई थी। इन आवंटियों के पास इस प्रोजेक्ट में कुल 99 रिहायशी यूनिट्स हैं। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने अपने खून-पसीने की कमाई से फ्लैटों की कुल कीमत का 90 से 95 प्रतिशत तक का भुगतान कंपनी को कर दिया था।
सभी खरीदारों ने मिलकर डेवलपर के पास करीब 137 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि जमा कराई थी, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी उन्हें आशियाना नसीब नहीं हुआ।
प्रोजेक्ट के एक आवंटी अर्जुन पुनिया ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया, “यह प्रोजेक्ट पिछले लगभग 15 साल से अधर में लटका हुआ है। एनसीएलटी में ढाई साल तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद आखिरकार हमारे पक्ष में फैसला आया है। इस आदेश से हम आवंटियों के बीच न्याय की एक नई किरण जागी है।”
अदालत के समक्ष पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार, रहेजा डेवलपर्स ने वर्ष 2011 में ‘रेवांता’ परियोजना की शुरुआत की थी। बुकिंग के समय कंपनी ने वादा किया था कि स्वतंत्र फ्लोर (Independent Floors) का कब्जा 36 महीने और ऊंची इमारतों (High-Rise Towers) में बने फ्लैटों का कब्जा 48 महीने के भीतर दे दिया जाएगा।
इसके बाद, हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HRERA) के समक्ष भी कंपनी ने प्रोजेक्ट को पूरा करने की अंतिम समय-सीमा 31 जुलाई 2022 घोषित की थी। इसके बावजूद खरीदारों को फ्लैट का पजेशन नहीं मिला। खरीदारों का आरोप है कि कंपनी ने कई बार अपनी गलती मानते हुए मुआवजा देने का लिखित आश्वासन दिया, लेकिन उसे कभी पूरा नहीं किया। यहाँ तक कि ‘हरेरा गुरुग्राम’ द्वारा दिए गए रिफंड और ब्याज भुगतान के आदेशों को भी कंपनी ने ठंडे बस्ते में डाल दिया।
सुनवाई के दौरान रहेजा डेवलपर्स ने अपने बचाव में कई दलीलें पेश कीं। कंपनी का कहना था कि प्रोजेक्ट के आसपास सड़क, सीवर, पानी और बिजली जैसी बाहरी आधारभूत ढांचागत सुविधाओं (External Infrastructure) की भारी कमी थी। इसके अलावा, साइट से हाई-वोल्टेज बिजली लाइनों को हटाने में हुई देरी और कई प्रशासनिक व कानूनी अड़चनों के कारण काम समय पर पूरा नहीं हो सका। कंपनी ने यह दावा भी किया कि परियोजना का बड़ा हिस्सा बनकर तैयार है और वह वित्तीय रूप से पूरी तरह सक्षम है।
हालांकि, एनसीएलटी की प्रधान पीठ ने दोनों पक्षों के अभिलेखों और उपलब्ध तथ्यों का गहन अध्ययन करने के बाद डेवलपर के तर्कों को अपर्याप्त माना और याचिका को मंजूरी दे दी।
गुरुग्राम में रहेजा डेवलपर्स की विभिन्न परियोजनाओं को लेकर पिछले काफी समय से विवाद चल रहे हैं। ऐसे में एनसीएलटी द्वारा दिवाला प्रक्रिया शुरू करने के इस आदेश को दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट बाजार के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। इस सख्त रुख से उन बिल्डरों को कड़ा संदेश गया है जो रकम ऐंठने के बावजूद सालों-साल प्रोजेक्ट्स को लटका कर रखते हैं।