कानूनी लड़ाई नहीं, रिश्ते की हुई जीत: 18 साल बाद पति-पत्नी ने Lok Adalat में थामा फिर एक-दूसरे का हाथ

मामले की सुनवाई अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश एवं नेशनल लोक अदालत की पीठासीन अधिकारी पूनम कंवर की अदालत में हुई। यह मुकदमा पति रविंदर सिंह और पत्नी अंजू बाला के बीच हिंदू विवाह अधिनियम के तहत चल रहा था।

जिला एवं सत्र न्यायालय गुरुग्राम में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने 18 वर्षों से अलग रह रहे एक विवाहित जोड़े के लिए पुनर्मिलन का मंच तैयार किया। प्रभावी मध्यस्थता (Mediation) के माध्यम से पति-पत्नी ने तलाक की याचिका वापस ले ली और सम्मानपूर्वक फिर से वैवाहिक जीवन शुरू करने का निर्णय लिया।

मामले की सुनवाई अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश एवं नेशनल लोक अदालत की पीठासीन अधिकारी पूनम कंवर की अदालत में हुई। यह मुकदमा पति रविंदर सिंह और पत्नी अंजू बाला के बीच हिंदू विवाह अधिनियम के तहत चल रहा था।

रविंदर सिंह और अंजू बाला का विवाह 4 दिसंबर 2001 को हुआ था। इस वैवाहिक संबंध से उन्हें 9 अप्रैल 2004 को एक पुत्र अरमान का आशीर्वाद मिला। दोनों ही पक्ष शिक्षित और अपने-अपने पेशे में स्थापित हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार वैवाहिक मतभेदों के चलते दोनों के बीच 5 जुलाई 2008 को अलगाव हो गया था। पारिवारिक स्तर पर विवाद सुलझाने के कई प्रयास असफल रहे। इसके बाद, पति ने वर्ष 2016 में हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 (वैवाहिक अधिकारों की बहाली) के तहत याचिका दायर की थी, जिसके बाद 27 अक्टूबर 2020 को धारा 13(1)(IA)(IB) के तहत तलाक की याचिका दाखिल की गई थी।

राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान, पीठासीन अधिकारी पूनम कंवर और विधिक सहायता सदस्य अलरीना सेनापति की उपस्थिति में दोनों पक्षों के बीच गहन संवाद स्थापित किया गया। इस दौरान दोनों पक्षों की भावनाओं और भविष्य को देखते हुए एक सकारात्मक समाधान निकाला गया।

समझौते के तहत, पति रविंदर सिंह ने अपनी तलाक याचिका वापस लेने का संकल्प लिया और पत्नी को सम्मानपूर्वक अपने साथ रखने की सहमति जताई। वहीं, पत्नी अंजू बाला ने भी पुरानी बातों को भूलकर पति के साथ अपने वैवाहिक घर लौटने और नया जीवन शुरू करने पर सहमति दे दी।

समझौते के बाद, पत्नी अंजू बाला भावुक क्षणों के बीच अदालत परिसर से ही अपने पति रविंदर सिंह के साथ वैवाहिक घर के लिए रवाना हो गईं। इस सफल पुनर्मिलन को देखकर अदालत में मौजूद सभी लोगों ने राहत और खुशी व्यक्त की। इस मामले ने राष्ट्रीय लोक अदालत की महत्ता को एक बार फिर रेखांकित किया है, जो कानूनी जटिलताओं को छोड़कर आपसी सहमति से विवादों का समाधान करती है।

Sunil Yadav

सुनील यादव पिछले लगभग 15 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों में ( India Tv, Times Now,… More »
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