Jaskaran Murder Case : शव के टुकड़े करने वाले कातिल को आजीवन कारावास, अदालत ने सख्त फैसला
जांच में सामने आया कि जस्करन जैसे ही हरनेक के घर पहुंचा, आरोपियों ने हथौड़े से हमला कर उसकी जान ले ली। साक्ष्य छिपाने के लिए उन्होंने शव के टुकड़े किए और उन्हें प्लास्टिक बैगों में भरकर लुधियाना (पंजाब) के पास अलग-अलग नहरों और खेतों में फेंक दिया।

Jaskaran Murder Case : गुरुग्राम की एक जिला अदालत ने साल 2018 में हुए सनसनीखेज जस्करन सिंह हत्याकांड में अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुनीत सहगल की अदालत ने मुख्य आरोपी के नौकर जगदीश को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
यह रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना 14 अक्टूबर 2018 की है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, डीएलएफ फेज-2 निवासी 80 वर्षीय हरनेक सिंह ढिल्लों (मुख्य आरोपी, जिसकी अब मृत्यु हो चुकी है) ने जस्करन सिंह से कनाडा की पीआर (स्थायी निवास) दिलाने के नाम पर 60 लाख रुपये लिए थे। जब जस्करन ने अपने पैसे वापस मांगना शुरू किया, तो हरनेक ने अपने नौकर जगदीश के साथ मिलकर उसकी हत्या की खौफनाक साजिश रची।
जांच में सामने आया कि जस्करन जैसे ही हरनेक के घर पहुंचा, आरोपियों ने हथौड़े से हमला कर उसकी जान ले ली। साक्ष्य छिपाने के लिए उन्होंने शव के टुकड़े किए और उन्हें प्लास्टिक बैगों में भरकर लुधियाना (पंजाब) के पास अलग-अलग नहरों और खेतों में फेंक दिया।
सजा सुनाते समय न्यायाधीश पुनीत सहगल ने दोषी के प्रति किसी भी प्रकार की उदारता दिखाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा ऐसे जघन्य और क्रूर अपराध में कम सजा देना न्याय प्रणाली के प्रति जनता के विश्वास को कमजोर करेगा। ऐसी नरमी से अपराधियों का मनोबल बढ़ता है, जिससे अंततः समाज को ही नुकसान होता है।
दोषी को सजा दिलाने वाले 5 मुख्य सबूत
मृतक जस्करन को आखिरी बार मुख्य आरोपी के घर में प्रवेश करते देखा गया था। आरोपियों की गाड़ी गुरुग्राम से लुधियाना के रास्ते में टोल कैमरों में कैद हुई थी। बरामद अंगों के अवशेषों का मिलान मृतक के परिवार से हुआ, जिससे पहचान पुख्ता हुई। एक पड़ोसी ने घटना के वक्त घर से चीखने की आवाज सुनी थी, जिसे आरोपी ने ‘बंदर घुसने’ की बात कहकर टाल दिया था। घर से मिले खून के धब्बे और हत्या में इस्तेमाल हथियार।
अदालत ने केवल सजा ही नहीं सुनाई, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए दोषी पर लगाए गए जुर्माने की राशि और अतिरिक्त सहायता के रूप में पीड़ित परिवार को 1 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।









