पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी बिलाल अपनी शादी से पहले उमा को रास्ते से हटाना चाहता था, क्योंकि वह उस पर निकाह का दबाव बना रही थी।
दो साल का लिव-इन रिश्ता, फिर बना हत्या की वजह
पुलिस के अनुसार, उमा पहले से शादीशुदा थी और एक बच्चे की मां थी। वह काफी समय से अपने पति से अलग रह रही थी और परिवार से भी संपर्क में नहीं थी। करीब दो साल पहले उसकी मुलाकात सहारनपुर के नकुड़ क्षेत्र के रहने वाले पेशे से ड्राइवर बिलाल से हुई थी। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और वे लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे।
इसी दौरान बिलाल के परिजनों ने उसकी दूसरी जगह शादी तय कर दी। शादी की तारीख 14 दिसंबर रखी गई थी, लेकिन उमा लगातार उससे शादी की मांग कर रही थी।
शादी से पहले हत्या की साजिश
पुलिस पूछताछ में बिलाल ने कबूल किया कि उसे डर था कि अगर उमा उसके घर पहुंच गई तो उसकी शादी टूट सकती है। इसी डर में उसने उमा की हत्या की योजना बना ली।
6 दिसंबर की शाम वह उमा को घुमाने के बहाने कार में बैठाकर निकला। यमुनानगर के प्रतापनगर क्षेत्र में सुनसान जगह पर कार रोककर उसने सीट बेल्ट से उमा का गला घोंट दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
पहचान छिपाने के लिए सिर किया अलग
हत्या के बाद आरोपी ने पहचान छिपाने के लिए उमा की गर्दन काट दी और उसके कपड़े उतार दिए। धड़ को बहादुरपुर (प्रतापनगर) के पास पॉपुलर की नर्सरी में फेंक दिया, जबकि कटा हुआ सिर और कपड़े वह कलेसर के जंगल में फेंक आया, ताकि जंगली जानवर सबूत नष्ट कर दें।
SIT और CCTV से आरोपी तक पहुंची पुलिस
इस ब्लाइंड मर्डर केस को सुलझाने के लिए पुलिस ने विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया। घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों में एक यूपी नंबर की कार संदिग्ध हालत में नजर आई। यह कार हथिनी कुंड बैराज की ओर जाती हुई भी कैमरों में कैद हुई।
मोबाइल लोकेशन, CCTV फुटेज और चश्मदीदों की जानकारी जोड़ते हुए पुलिस आखिरकार आरोपी बिलाल तक पहुंची।
निकाह की तैयारी के बीच गिरफ्तारी
जब पुलिस आरोपी के घर पहुंची, तब वहां उसकी शादी की तैयारियां चल रही थीं। आरोपी की बारात 14 दिसंबर को निकलने वाली थी, लेकिन उससे एक दिन पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
इस मामले की जानकारी देते हुए कमलदीप गोयल, पुलिस अधीक्षक यमुनानगर, ने बताया कि आरोपी से पूछताछ जारी है और कोर्ट में पेश कर उसका रिमांड मांगा जाएगा।
पांच दिन बाद हुआ पोस्टमॉर्टम
सिर बरामद न होने के कारण शव की पहचान में देरी हुई, जिसके चलते पांच दिन बाद पोस्टमॉर्टम कराया गया। डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार, महिला के साथ दुष्कर्म के कोई सबूत नहीं मिले हैं। शरीर पर संघर्ष के निशान भी नहीं पाए गए, जिससे संकेत मिलता है कि गला काटने से पहले उसकी मौत हो चुकी थी।
सिर, हथियार और कपड़े अब भी बरामद नहीं
पुलिस के अनुसार, हत्या में इस्तेमाल हथियार, मृतका का सिर और कपड़े अभी तक बरामद नहीं हो सके हैं। आरोपी ने जंगल में सिर फेंकने की बात कही है, लेकिन अंधेरा होने के कारण वह सटीक जगह नहीं बता पा रहा।
परिजनों से संपर्क, अंतिम संस्कार पहले ही हो चुका
पुलिस ने मृतका उमा के पिता और भाई से संपर्क साध लिया है। पहचान न होने के कारण महिला का अंतिम संस्कार पहले ही अज्ञात मानकर किया जा चुका था। यह मामला न केवल रिश्तों में भरोसे की टूटन को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे निजी स्वार्थ इंसान को हैवान बना सकता है। पुलिस अब हर एंगल से जांच कर रही है, ताकि इस खौफनाक वारदात से जुड़े सभी पहलुओं का खुलासा हो सके।