Haryana School News : महिला शिक्षक की चाइल्ड केयर लीव (CCL) पर विवाद, महिला आयोग पहुंची शिकायत
गुरुग्राम की महिला शिक्षक सरोज यादव ने अपनी शिकायत में बताया कि सेकेंडरी शिक्षा विभाग में सीसीएल के स्पष्ट नियम होने के बावजूद उनका पालन नहीं किया जा रहा।

Haryana School News : हरियाणा के शिक्षा विभाग में महिला शिक्षकों को मिलने वाले चाइल्ड केयर लीव (CCL) को लेकर उपजा विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। अवकाश मंजूरी की जटिल प्रक्रिया और अधिकारियों की कथित मनमानी से परेशान होकर एक महिला शिक्षक ने हरियाणा राज्य महिला आयोग का दरवाजा खटखटाया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मातृत्व उत्तरदायित्व निभाने के लिए मिलने वाली इस छुट्टी को विभाग ने ‘कमाई का जरिया’ और ‘मानसिक प्रताड़ना’ का हथियार बना लिया है।
पंचकूला के चक्कर और ‘रिजेक्शन’ का खेल
गुरुग्राम की महिला शिक्षक सरोज यादव ने अपनी शिकायत में बताया कि सेकेंडरी शिक्षा विभाग में सीसीएल के स्पष्ट नियम होने के बावजूद उनका पालन नहीं किया जा रहा। सरोज के अनुसार छुट्टी की फाइल स्कूल प्रिंसिपल, खंड शिक्षा अधिकारी (BEO), जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और जिला उपायुक्त (DC) से होते हुए पंचकूला मुख्यालय पहुंचती है।अतिरिक्त निदेशक स्तर पर फाइलों को बिना किसी ठोस कारण के या बिना पढ़े ही रद्द कर दिया जाता है। यदि छुट्टी मंजूर होती भी है, तो वह आवेदन की तारीख से न होकर विभाग की मर्जी के अनुसार बाद की तारीखों से दी जाती है, जिससे छुट्टी का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है।
शिकायतकर्ता सरोज यादव ने बताया कि 2 अप्रैल 2026 से 30 मई 2026 तक के लिए अवकाश मांगा था, जिसे समय पर स्वीकृति नहीं मिली। मुझे अपने बच्चों की देखभाल के लिए आकस्मिक अवकाश (CL) का सहारा लेना पड़ा।
सीसीएल के नियम
नियमों के मुताबिक, महिला कर्मचारी बच्चों की 18 वर्ष की आयु तक पूरी सेवा अवधि में 730 दिन (2 साल) का अवकाश ले सकती हैं। एक बार में कम से कम 30 दिन की छुट्टी अनिवार्य है। एक वर्ष में अधिकतम 4 बार आवेदन किया जा सकता है। शिक्षकों का आरोप है कि ये नियम केवल कागजों तक सीमित हैं, जमीनी हकीकत में फाइलों पर गलत ‘ऑब्जेक्शन’ लगाकर उन्हें लटकाया जाता है।
शिक्षक संघ की मांग: प्रिंसिपल को मिले अधिकार
हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन (HSLA) ने इस प्रक्रिया पर कड़े सवाल उठाए हैं। जिला प्रधान सुदीप राठी का कहना है कि राजस्थान और दिल्ली की तर्ज पर छुट्टी मंजूर करने का अधिकार स्कूल प्रिंसिपल को मिलना चाहिए। प्रिंसिपल को वास्तविक स्थिति का पता होता है।
राज्य उपाध्यक्ष डॉ. सुषेन चौधरी ने मांग की है कि पूरी प्रक्रिया को पूर्णत ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया जाए ताकि किसी भी स्तर पर फाइल को अनावश्यक न रोका जा सके। स्टेट लेवल से छुट्टी मंजूर होना अव्यावहारिक है क्योंकि वहां बैठे अधिकारियों को शिक्षक की पारिवारिक परिस्थितियों का ज्ञान नहीं होता।
| समस्या | शिक्षक की मांग |
| पंचकूला मुख्यालय के बार-बार चक्कर | प्रक्रिया का सरलीकरण और ऑनलाइन पोर्टल |
| बिना कारण फाइल रिजेक्ट होना | रिजेक्शन का लिखित और स्पष्ट कारण |
| मनमानी तारीखों पर छुट्टी मिलना | आवेदन की तिथि से ही मंजूरी |
| प्रिंसिपल के पास अधिकारों का अभाव | विकेंद्रीकरण (स्कूल स्तर पर निर्णय) |