Haryana News : हरियाणा में स्टिल्ट प्लस 4 फ्लोर के लिए हाइकोर्ट को सख्त, जारी किया नया आदेश
मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजिव बेरी की खंडपीठ ने तीन सदस्यीय संयुक्त आयोग का गठन किया है। आयोग मौके पर जाकर निरीक्षण करेगा और 10 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करेगा।

Haryana News : स्टिल्ट पार्किंग के साथ चार मंज़िल निर्माण नीति को चुनौती देने वाले चर्चित जनहित मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab & Haryana Highcourt) ने बृहस्पतिवार को अहम आदेश पारित किया है। अदालत ने गुरुग्राम के नियोजित रिहायशी सेक्टरों की आंतरिक सड़कों की वास्तविक स्थिति का आंकलन करने के लिए भौतिक निरीक्षण (Physical Inspection) कराने के निर्देश दिए हैं।
3 सदस्यीय संयुक्त आयोग गठित, 10 दिन में रिपोर्ट
मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजिव बेरी की खंडपीठ ने तीन सदस्यीय संयुक्त निरीक्षण आयोग का गठन किया है, जो मौके पर जाकर आंतरिक सड़कों की चौड़ाई और हालात का निरीक्षण करेगा। आयोग को 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी ।
कौन-कौन होगा आयोग में शामिल
हाईकोर्ट द्वारा गठित आयोग में हरियाणा सरकार के एडिशनल एडवोकेट जनरल या उनके नामित प्रतिनिधि, याचिकाकर्ता की अधिवक्ता निवेदिता शर्मा या उनके प्रतिनिधि, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गुरुग्राम के सचिव (सीजेएम) राकेश कादयान शामिल होंगे । आयोग 31 जनवरी और 1 फरवरी को गुरुग्राम के विभिन्न सेक्टरों में जाकर निरीक्षण करेगा।
सड़क की चौड़ाई को लेकर विवाद
अदालत ने पाया कि पक्षकारों के बीच आंतरिक सड़कों की वास्तविक चौड़ाई को लेकर गंभीर मतभेद हैं। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि डीएलएफ फेज-1 सहित कई लाइसेंस्ड कॉलोनियों में सड़कें मात्र 12 से 15 फीट (करीब 2.5 से 3 मीटर) चौड़ी हैं, जो नियोजित कॉलोनियों के मानकों के विपरीत है।

आपात सेवाओं पर खतरे का आरोप
याचिकाकर्ता की अधिवक्ता निवेदिता शर्मा ने अदालत में दलील दी कि सड़क का अर्थ केवल चलने योग्य (Motorable) हिस्सा होता है, न कि उसके आसपास का क्षेत्र। इतनी संकरी सड़कों पर फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और कचरा उठाने वाले वाहनों की आवाजाही बाधित हो रही है, जिससे सुरक्षा और आपात सेवाओं पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। यह स्थिति निरीक्षण के दौरान आयोग को मौके पर दिखाई जाएगी।
स्टिल्ट + चार फ्लोर नीति से बढ़ी दिक्कतें
मामला हरियाणा सरकार की स्टिल्ट पार्किंग के साथ चार मंज़िल निर्माण नीति से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस नीति के बाद गुरुग्राम में बिल्डर फ्लोर निर्माण बेकाबू हो गया है, जिससे ट्रैफिक जाम, पार्किंग संकट, अवैध व्यावसायिक गतिविधियां, जल निकासी और सीवरेज समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं। अदालत को बताया गया कि चार फ्लोर निर्माण ने शहर के पहले से कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है ।

बिल्डर और टाउन प्लानिंग की दलील
गुरुग्राम होम डेवलपर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र यादव ने कहा कि अप्रूव्ड प्लानिंग के अनुसार सड़कों की चौड़ाई 9, 10, 12, 18 और 24 मीटर तय है, हालांकि मोटरेबल हिस्सा 4 से 9 मीटर होता है। शेष क्षेत्र रैंप, सर्विसेज और ग्रीन एरिया के रूप में शामिल रहता है।
वहीं, सीनियर टाउन प्लानर रेणुका सिंह ने बताया कि किसी भी कॉलोनी या सेक्टर के सर्विस प्लान हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण से स्वीकृत होते हैं और ऑक्यूपेशन व कंप्लीशन सर्टिफिकेट से पहले सभी सेवाओं की पुष्टि की जाती है।

डीटीपी मुख्यालय की दिव्या डोगरा ने स्पष्ट किया कि सड़क की परिभाषा केवल मेटल्ड रोड तक सीमित नहीं है। घरों के बीच आने वाला पूरा क्षेत्र राइट ऑफ वे (ROW) होता है और उसे भी सड़क का हिस्सा माना जाता है।
हाईकोर्ट का रुख
हाईकोर्ट ने साफ किया कि केवल दलीलों के आधार पर फैसला देना उचित नहीं होगा। जमीनी हकीकत जानने के लिए फिजिकल इंस्पेक्शन जरूरी है, इसी कारण संयुक्त आयोग का गठन किया गया है।










