Haryana New Policy : लाइसेंस कॉलोनियों में खुलेंगे नर्सिंग होम, सरकार ने बदले नियम, जानें किसे मिलेगा फायदा
गुरुग्राम की बड़ी रिहायशी सोसायटियों और लाइसेंसशुदा कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को छोटी बीमारियों या इमरजेंसी के लिए बड़े अस्पतालों (Tertiary Care Hospitals) में भागना पड़ता था।

Haryana New Policy : हरियाणा सरकार ने राज्य के शहरी विकास और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने अब लाइसेंसशुदा कॉलोनियों (Licensed Colonies) में नर्सिंग होम खोलने के नियमों में ढील देते हुए इसे आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले से विशेष रूप से गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में रहने वाले लाखों लोगों को उनके घर के पास ही आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।
अब तक लाइसेंसशुदा कॉलोनियों में कमर्शियल गतिविधियों और क्लीनिक को लेकर काफी कड़े नियम थे। नए प्रावधानों के तहत रिहायशी इलाकों के भीतर निर्धारित मापदंडों को पूरा करने वाले भूखंडों पर नर्सिंग होम बनाए जा सकेंगे। इसके लिए भूखंड के आकार, सड़क की चौड़ाई और पार्किंग व्यवस्था से संबंधित कुछ मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। सरकार ने इसके लिए लाइसेंस शुल्क और अन्य औपचारिकताओं को भी स्पष्ट किया है।
गुरुग्राम को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
गुरुग्राम की बड़ी रिहायशी सोसायटियों और लाइसेंसशुदा कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को छोटी बीमारियों या इमरजेंसी के लिए बड़े अस्पतालों (Tertiary Care Hospitals) में भागना पड़ता था। इस फैसले के बाद कॉलोनी के भीतर ही प्राथमिक उपचार और नर्सिंग केयर मिल सकेगी। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों और पैरा-मेडिकल स्टाफ के लिए स्थानीय स्तर पर नौकरियों के द्वार खुलेंगे। छोटे और सामान्य ऑपरेशन्स या इलाज के लिए अब बड़े अस्पतालों में भीड़ कम होगी। (Haryana New Policy)
ये होंगे मुख्य नियम व शर्तें
क्या होगा प्लाट का आकार व स्थान
हाइपर और हाई पोटेंशियल यानी गुरुग्राम फरीदाबाद जोन में न्यूनतम 350 वर्ग गज प्लॉट आवश्यक।
मीडियम व लो जोन (अन्य जिले) में न्यूनतम 250 वर्ग गज प्लॉट आवश्यक।
नर्सिंग होम केवल सर्विस रोड या सेक्टर/मास्टर रोड पर ही अनुमति प्राप्त कर सकेंगे।
एक सेक्टर में अधिकतम चार साइट की अनुमति होगी।
प्लानिंग व पार्किंग नियम एक नजर में
एफएआर, सेटबैक और ऊंचाई आदि हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 के अनुसार होंगे।
पार्किंग प्लॉट के भीतर ही करनी होगी, स्टिल्ट पार्किंग अनिवार्य।
एंबुलेंस सहित सभी वाहनों की पार्किंग साइट के अंदर ही होगी।
बेसमेंट का उपयोग क्लीनिक, एक्स-रे और लैब के लिए किया जा सकेगा।
ऐसे कर सकेंगे आवेदन
अनुमति के लिए ऑनलाइन आवेदन हरियाणा सरकार के टीसीपी पोर्टल के माध्यम से करना होगा।
मालिकाना दस्तावेज, शपथ पत्र और आवश्यक शुल्क जमा करना होगा।
इसके अतिरिक्त ईडीसी जैसे अन्य शुल्क नहीं लगेंगे।
ये होगा कन्वर्शन शुल्क
हाइपर जोन: 10000 रुपये प्रति वर्ग गज
हाई जोन: 8000 रुपये प्रति वर्ग गज
मीडियम जोन: 6000 रुपये प्रति वर्ग गज
लो जोन: 4000 रुपये प्रति वर्ग गज
इन नियमों का भी करना होगा पालन
भवन योजना की स्वीकृति और ओसी लेना अनिवार्य होगा।
अस्पताल कचरा निस्तारण और प्रदूषण बोर्ड में पंजीकरण जरूरी।
केवल डायग्नोस्टिक सुविधाएं और मरीजों के लिए सीमित फार्मेसी की अनुमति।
स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर निरीक्षण करेगा।
आसपास के निवासियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए।









