Gurugram के नामी अस्पताल ने बिल न चुकाने पर शव देने से किया इनकार, NHRC के एक्शन के बाद परिजनों को सौंपा

18 लाख का बिल न भरने पर अस्पताल ने नहीं दिया शव, NHRC के हस्तक्षेप के बाद मिली देह

Gurugram/गुरुग्राम
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर निवासी 31 वर्षीय अंकुर गुप्ता की Gurugram के मेदांता अस्पताल में इलाज के दौरान मौत के बाद बकाया बिल को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया। मृतक के परिजनों का आरोप था कि अस्पताल प्रबंधन ने ₹18.55 लाख से अधिक का अतिरिक्त बकाया बिल जमा न कराने पर शव रोकने का प्रयास किया, जबकि परिवार पहले ही ₹23.67 लाख से अधिक का भुगतान कर चुका था। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के कड़े रुख और त्वरित कार्रवाई के बाद अस्पताल प्रशासन ने बिना बकाया भुगतान के ही शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया।


आर्थिक तंगी से लाचार मां ने लगाई थी आयोग से गुहार

शिकायतकर्ता सुषमा रानी के अनुसार, उनके बेटे अंकुर गुप्ता का फेफड़ों के गंभीर संक्रमण का इलाज Gurugram के मेदांता अस्पताल में चल रहा था। इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। सुषमा रानी ने अपनी बेहद खराब आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए आयोग से मदद की गुहार लगाई थी कि वह अतिरिक्त ₹18,55,422 देने में असमर्थ हैं। उन्होंने Gurugram के अस्पताल द्वारा शव रोकने को मौलिक अधिकारों और मानवीय गरिमा का हनन बताया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की त्वरित कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत मामले का संज्ञान लिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया यह पीड़िता के मानवाधिकारों का उल्लंघन प्रतीत होता है। आयोग के महानिदेशक (जांच) को निर्देश दिए गए कि वे दूरभाष के माध्यम से तथ्य जुटाएं और 24 घंटे के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें। इसके अलावा, सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी अस्पताल प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी थी, जिसके बाद प्रक्रिया में तेजी आई।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का पत्र:
nhrc

Gurugram के अस्पताल प्रशासन का पक्ष:
मामले पर Gurugram के मेदांता अस्पताल प्रशासन ने सफाई देते हुए कहा, “शनिवार दोपहर स्वजन शव लेने पहुंचे थे। उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए बकाया बिल भुगतान में असमर्थता जताई थी। इसके बाद प्रबंधन से बातचीत और जरूरी कागजी कार्रवाई में थोड़ा समय लगा। देर शाम स्वजन को शव सौंप दिया गया था। अस्पताल में बिल को लेकर विवाद जैसी कोई स्थिति नहीं थी।”

Manu Mehta

मनु मेहता पिछले लगभग 18 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों (ANI News, News Express, TV 9,… More »
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