Gurugram Court : अधिग्रहित जमीन पर बने मकान अवैध, टैक्स या बिजली कनेक्शन से नहीं बनते मालिक
सिविल जज (जूनियर डिवीजन) रश्मीत कौर की अदालत ने इन याचिकाओं को खारिज करते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि हाउस टैक्स देना या बिजली का कनेक्शन होना इस बात का सबूत नहीं है कि निर्माण कानूनी है। ये सुविधाएं नागरिक अधिकार हो सकती हैं, लेकिन ये किसी भी अवैध ढांचे को कानूनी मान्यता प्रदान नहीं करतीं।

Gurugram Court : हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) की अधिग्रहित भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों को जिला अदालत से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने सूर्य विहार इलाके में अवैध निर्माणों को गिराने की प्रक्रिया पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि जमीन सरकार द्वारा अधिग्रहित की जा चुकी है, तो उस पर किया गया कोई भी निर्माण पूरी तरह अवैध है।
यह मामला सूर्य विहार के निवासियों द्वारा दायर की गई उन याचिकाओं से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने एचएसवीपी (HSVP) द्वारा जारी तोड़फोड़ के नोटिस को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता तपे सिंह और धर्मपाल ने अदालत में दलील दी थी कि उन्होंने साल 1997 में यह जमीन खरीदी थी और वे पिछले कई दशकों से वहां रह रहे हैं। उन्होंने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए बिजली के बिल और हाउस टैक्स के भुगतान की रसीदें भी पेश कीं।

सिविल जज (जूनियर डिवीजन) रश्मीत कौर की अदालत ने इन याचिकाओं को खारिज करते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि हाउस टैक्स देना या बिजली का कनेक्शन होना इस बात का सबूत नहीं है कि निर्माण कानूनी है। ये सुविधाएं नागरिक अधिकार हो सकती हैं, लेकिन ये किसी भी अवैध ढांचे को कानूनी मान्यता प्रदान नहीं करतीं।
सुनवाई के दौरान एचएसवीपी के वकील विवेक वर्मा ने पुख्ता दस्तावेज पेश किए। रिकॉर्ड के अनुसार, जिस जमीन पर ये मकान बने हैं, उसका अधिग्रहण 5 मार्च 1992 को ही पूरा हो चुका था। कानूनन, अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होते ही जमीन का मालिकाना हक सरकार के पास चला जाता है। ऐसे में 1997 में की गई जमीन की कोई भी खरीद-फरोख्त कानूनी रूप से अमान्य है।

अदालत के इस फैसले के बाद एचएसवीपी के लिए सूर्य विहार में अवैध निर्माणों को हटाने का रास्ता साफ हो गया है। प्रशासन अब जल्द ही इन क्षेत्रों में तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर सकता है। यह फैसला उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो अधिग्रहित भूमि पर प्रॉपर्टी डीलरों के झांसे में आकर निवेश कर देते हैं।










