Waterlogging से मुक्ति: गुरुग्राम को अब IIT गांधीनगर देगा ड्रेनेज का ब्लूप्रिंट
निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने इस पहल की पुष्टि करते हुए बताया कि आईआईटी गांधीनगर की टीम ने निगम को अपनी कार्यप्रणाली का प्रस्तुतीकरण दे दिया है। उन्होंने कहा यह एमओयू एक साल के लिए किया गया है।

Waterlogging : मानसून के दौरान हर साल घुटनों तक पानी में डूबने वाली साइबर सिटी गुरुग्राम को अब जलभराव की गंभीर समस्या से स्थायी निजात मिलने की उम्मीद है। इस दीर्घकालिक समाधान के लिए नगर निगम गुरुग्राम (MCG) ने देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान आईआईटी गांधीनगर के साथ एक बड़ा तकनीकी समझौता किया है। एक साल के लिए हुए इस समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत, आईआईटी की विशेषज्ञ टीम शहर में रहकर जल निकासी (ड्रेनेज) के लिए एक विस्तृत और वैज्ञानिक मॉडल तैयार करेगी।
निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने इस पहल की पुष्टि करते हुए बताया कि आईआईटी गांधीनगर की टीम ने निगम को अपनी कार्यप्रणाली का प्रस्तुतीकरण दे दिया है। उन्होंने कहा यह एमओयू एक साल के लिए किया गया है। आईआईटी की टीम बताएगी कि शहर को जलभराव से कैसे मुक्ति दिलाई जा सकती है। इसी मॉडल के आधार पर निगम भविष्य की सभी ड्रेनेज योजनाएं तैयार करेगा।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक निगम को हर मानसून में पंपों और मैनुअल सफाई जैसे अस्थायी उपायों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब आईआईटी गांधीनगर की टीम एक संपूर्ण ‘मास्टर ड्रेनेज मॉडल’ तैयार करेगी, जिसका आधार भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) सर्वेक्षण के आंकड़े होंगे।
निगम ने आईआईटी टीम को पहले ही शहर की टोपोग्राफी (स्थलाकृति), मौजूदा ड्रेनेज नेटवर्क और बार-बार जलभराव वाले स्थानों की सटीक जानकारी वाला जीआईएस डेटा सौंप दिया है। इस वैज्ञानिक विश्लेषण के माध्यम से टीम इन प्रमुख बिंदुओं पर काम करेगी:
निकासी के सटीक स्थान: शहर के उन क्षेत्रों की पहचान करना जहाँ नए ड्रेनेज स्ट्रक्चर (जल निकासी की संरचनाएं) बनाने की तत्काल आवश्यकता है।
मौजूदा प्रणाली का ऑडिट: वर्तमान जल निकासी व्यवस्था की कार्यक्षमता और डिजाइन का गहन मूल्यांकन करना।

दीर्घकालिक तकनीकी समाधान: यह सुझाव देना कि किस क्षेत्र में भूमिगत चैंबर, उच्च क्षमता वाले पंपिंग स्टेशन या नए नाले बनाने जैसे तकनीकी हस्तक्षेपों की जरूरत है।
गुरुग्राम में जलभराव की समस्या अनियोजित शहरीकरण और शहर की विशिष्ट भौगोलिक बनावट के कारण दशकों से एक बड़ी चुनौती रही है। हीरो होंडा चौक, नरसिंहपुर, इफको चौक और कई सेक्टरों की सड़कें हल्की बारिश में भी जलमग्न हो जाती हैं, जिससे न केवल ट्रैफिक जाम होता है, बल्कि शहर की अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ता है। पुराने और संकरे नाले, सीवर का पानी ड्रेनेज लाइनों में मिलना और अतिक्रमण इस समस्या को और भी विकराल बना देते हैं।
आईआईटी के साथ यह करार जल निकासी की समस्या को जड़ से खत्म करने की दिशा में सबसे बड़ी और वैज्ञानिक पहल मानी जा रही है। एक साल के अध्ययन के बाद, निगम को एक स्पष्ट, तकनीकी ब्लूप्रिंट मिलेगा जिससे वह जल निकासी की योजनाओं के लिए आवंटित फंड का सही और प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित कर सकेगा। यह मॉडल गुरुग्राम को अस्थायी राहत की बजाय स्थायी राहत दिलाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।













