ED का Vatika Group पर बड़ा एक्शन, मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में वाटिका ग्रुप के दो प्रमोटर गिरफ्तार

Vatika Group : प्रवर्तन निदेशालय (ED) के गुरुग्राम जोनल कार्यालय ने वाटिका लिमिटेड के प्रमोटर-डायरेक्टर अनिल भल्ला और गौतम भल्ला को गिरफ्तार किया है । दोनों की गिरफ्तारी 28 सितंबर 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 19 के तहत की गई। ईडी ने यह जानकारी 30 सितंबर को जारी प्रेस रिलीज में दी है।
ईडी ने बताया कि यह कार्रवाई M/s Vatika Limited के खिलाफ दर्ज ECIR के आधार पर की गई। मामले में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज कई FIR शामिल हैं। इन मामलों में IPC की धारा 420, 406 और 120-B के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और साजिश से जुड़े आरोप हैं।
260 करोड़ रुपये लेकर प्लॉट नहीं देने का आरोप
ईडी की जांच के अनुसार, वर्ष 2010 से 2012 के बीच सात खरीदार संस्थाओं ने वाटिका लिमिटेड को करीब 260 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। यह रकम गुरुग्राम के सेक्टर 84, 85 और 88A स्थित वाटिका इंडिया नेक्स्ट और वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 परियोजनाओं में रिहायशी प्लॉट के लिए दी गई थी ।
जांच में सामने आया कि वर्ष 2014 और 2015 में प्लॉट वाइज एग्रीमेंट किए गए थे। इसके बाद प्लॉट की मूल लोकेशन में बदलाव या उन्हें दूसरी जगह स्थानांतरित किए जाने की बात सामने आई ।
ईडी के मुताबिक, करीब 1.10 लाख वर्ग गज जमीन से जुड़े प्लॉट के लिए लगभग 90 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। आरोप है कि करीब 14 वर्ष बीतने के बावजूद पूरी जमीन/प्लॉट खरीदारों को नहीं दिए गए। ईडी के अनुसार, करीब 140.73 करोड़ रुपये मूल्य के प्लॉट का हिस्सा अभी भी खरीदारों को नहीं दिया गया है।
ED, Gurugram, has arrested Anil Bhalla (CMD) and Gautam Bhalla (Promoter) of M/s Vatika Limited under Section 19 of the PMLA, 2002 in a matter related to fraudulent inducement non-delivery of residential plots and other related offences. The accused were produced before the… pic.twitter.com/tNcmTnkV74
— ED (@dir_ed) September 30, 2026
अनिल भल्ला और गौतम भल्ला पर अहम फैसलों में भूमिका का आरोप
जांच के दौरान ईडी को ऐसे दस्तावेज और सामग्री मिलने का दावा किया गया है, जिनसे संकेत मिलता है कि अनिल भल्ला ने जांच के दायरे में आने वाले लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी की । वहीं, ईडी के अनुसार गौतम भल्ला वाटिका समूह के प्रमुख प्रमोटरों में से एक हैं और उन्होंने अनिल भल्ला के साथ मिलकर समूह की गतिविधियों और संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लिए।
22 कंपनियों के जरिए जमीन रखने का आरोप
ईडी ने प्रेस रिलीज में बताया कि परियोजना की जमीन करीब 22 समूह कंपनियों के माध्यम से रखी गई थी। जांच में आरोप है कि इनमें से कई कंपनियों के पास अपने कर्मचारी या स्वतंत्र व्यावसायिक गतिविधियां नहीं थीं । इन कंपनियों का इस्तेमाल कथित तौर पर जमीन के प्रबंधन और कॉरपोरेट गारंटी देने के लिए किया जाता था। ईडी ने यह भी कहा है कि समूह द्वारा खरीदारों से प्राप्त रकम का इस्तेमाल केवल उन्हीं परियोजनाओं के लिए नहीं किया गया, जिनके लिए पैसा लिया गया था, बल्कि रकम को अन्य समूह और प्रमोटर से जुड़ी संस्थाओं में भी स्थानांतरित किया गया।
473 करोड़ रुपये के सौदे में 14 प्लॉट बेचने का आरोप
ईडी के अनुसार, वर्ष 2024 में Scaler Ventures ने करीब 473.18 करोड़ रुपये का भुगतान कर वाटिका समूह के साथ Agreement to Sell और Bulk Agreement किया था। इस सौदे के तहत 165 प्लॉट शामिल थे । जांच एजेंसी का आरोप है कि इनमें से केवल 15 प्लॉट वापस खरीदे गए, जबकि बचे 150 प्लॉट में से 14 प्लॉट तीसरे पक्ष को करीब 13.62 करोड़ रुपये में बेच दिए गए ।
ईडी का आरोप है कि इन 14 प्लॉट को बेचने से पहले Scaler Ventures की सहमति नहीं ली गई थी। एजेंसी के मुताबिक, इन प्लॉट की बिक्री से जुड़ी रकम भी करीब 154.36 करोड़ रुपये की अपराध की आय (Proceeds of Crime) का हिस्सा मानी गई है।
पहले की छापेमारी में लग्जरी कारें और करोड़ों की संपत्ति मिली
ईडी ने बताया कि इससे पहले PMLA की धारा 17 के तहत कई स्थानों पर तलाशी ली गई थी। इस कार्रवाई के दौरान आरोपियों के आवासीय परिसरों से दो Mercedes-Benz कार, एक BMW कार, करीब 1.3 करोड़ रुपये मूल्य के सोने और हीरे के आभूषण बरामद किए गए । इसके अलावा करीब 3.04 करोड़ रुपये के बैंक खाते और एफडीआर भी बरामद कर फ्रीज किए गए।
4 दिन की रिमांड पर भेजा
ईडी के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को 29 सितंबर 2026 को गुरुग्राम स्थित माननीय विशेष PMLA अदालत के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने मामले में आगे की कार्यवाही के लिए उन्हें 3 अक्टूबर 2026 तक ईडी कस्टडी (रिमांड) में भेजा है । ईडी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है।
इस मामले में वाटिका ग्रुप का पक्ष जानने के लिए वाटिका की पीआर एजेंसी से संपर्क किया गया लेकिन उनकी तरफ से कोई पक्ष नहीं दिया गया ।
