Kherki Daula Toll Plaza शिफ्टिंग का झंझट नहीं हुआ खत्म, तीसरी साइट पर भी विवाद की सुगबुगाहट

Kherki Daula Toll Plaza : गुरुग्राम में खेड़की दौला टोल प्लाजा को शिफ्ट करने का काम एक बार फिर से अधर में लटकता हुआ नजर आ रहा है । पहले पंचगांव चौक और फिर सहरावन में टोल को शिफ्ट करने का प्लान लगभग फेल हो चुका है । अब जब टोल के लिए तीसरी जगह कुकड़ोला में शिफ्ट करने की बात चली तो वहां पर भी विरोध के स्वर उठने लगे हैं । ऐसे में अब इलाके से सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने कहा है कि आने वाले दस दिनों में टोल शिफ्टिंग के लिए केन्द्रीय सड़क एंव परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मिलकर विचार विमर्श किया जाएगा ।
दिल्ली–जयपुर हाईवे पर टोल प्लाजा शिफ्टिंग का मुद्दा एक बार फिर गर्म हो गया है। सहरावन गांव के पास टोल बनाने की सारी संभावनाएं अब पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। इसकी वजह कोई सामान्य तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी दो बड़ी एजेंसियों की आपत्तियाँ हैं। एजेंसियों ने साफ चेतावनी दी है कि टोल प्लाजा को आगे-पीछे कुछ मीटर खिसकाने से भी खतरा कम नहीं होगा।

इस चेतावनी के बाद अब टोल प्लाजा के लिए कुकड़ोला मोड़ के सामने नई जगह पर विचार चल रहा है। अगले 10 दिनों के भीतर बड़ा फैसला होने जा रहा है, क्योंकि 1 दिसंबर से संसद सत्र शुरू होने के साथ ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी दिल्ली में मौजूद रहेंगे।
खेड़कीदौला का झंझट खत्म नहीं! दो जगहें रिजेक्ट — तीसरी साइट पर भी विवाद की आहट
दिल्ली–गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर वाहनों के जमाव का प्रतीक बन चुके खेड़कीदौला टोल प्लाजा को हटाने की कवायद कई सालों से चल रही है, लेकिन हर बार योजना किसी न किसी वजह से पटरी से उतर रही है।

पहला प्लान—पचगाँव चौक पर टोल बनाने का काम शुरू हुआ, तभी ग्रामीणों ने चौक पर अंडरपास/फ्लाईओवर की माँग छेड़ दी।
दूसरा प्लान—सहरावन के पास जमीन को समतल करने की प्रक्रिया चल ही रही थी कि सुरक्षा एजेंसियों ने आपत्ति ठोक दी।
कुछ दिनों बाद दूसरी एजेंसी ने भी कड़ा विरोध जताते हुए इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संवेदनशील’ क्षेत्र बता दिया।
अब दोनो साइटों के फेल होने के बाद केवल एक अंतिम विकल्प बचा है—कुकड़ोला के सामने टोल प्लाजा।

कुकड़ोला में भी भड़का विरोध! वन्यजीवों का घर खतरे में?
जैसे ही कुकड़ोला सामने आया, विरोध की नई लहर उठ खड़ी हुई । कृष्णा अरावली फाउंडेशन के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त मुख्य नगर योजनाकार प्रो. केके यादव का कहना है कि कुकड़ोला के पास अरावली की पहाड़ियों में काफी संख्या में वन्यजीव रहते हैं । नजदीक स्थित बड़ा तालाब उनका प्रमुख जल स्रोत है। हाईवे पर टोल प्लाजा बन गया तो जानवरों का नैसर्गिक आवागमन और शांत क्षेत्र पूरी तरह प्रभावित होगा।
उनका तर्क है कि यदि टोल प्लाजा बनाना ही है तो इसे बिलासपुर के नजदीक, यानी पचगाँव से भी आगे बनाया जाए। मानेसर–पचगाँव के बीच टोल बनाना ‘पर्यावरण और वन्यजीवों दोनों’ के खिलाफ होगा।

अगले 10 दिनों में बड़ा फैसला — मंत्री, सांसद और NHAI मिलकर करेंगे अंतिम वार
NHAI ने पूरा मामला आधिकारिक रूप से केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय को भेज दिया है। संसद सत्र के दौरान दिल्ली में मौजूद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की अगुवाई में स्थानीय सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह, NHAI के शीर्ष अधिकारी बैठक कर आखिरी मंजूरी देंगे । राव इंद्रजीत सिंह ने संकेत दिए हैं कि अब हर पहलू—राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर पर्यावरण तक—को जांचने के बाद ही अंतिम जगह तय होगी। योजना को अब हर हाल में आगे बढ़ाना है।”
दिल्ली–गुरुग्राम–जयपुर रूट के लाखों यात्रियों की नजर अब सरकार और NHAI के इस फैसले पर टिकी है । 10 दिनों में साफ होगा कि कुकड़ोला को मंजूरी मिलेगी, या टोल प्लाजा को एक बार फिर आगे धकेला जाएगा। इस बार फैसला जितना बड़ा होगा, उतना ही हाईवे के भविष्य और ट्रैफिक व्यवस्था पर असर डालेगा।










