Crime News: लोन कंपनी का डेटा चुराकर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 7 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने ठगी के पूरे तरीके का खुलासा किया। यह गिरोह तीन स्तरों पर काम करता था। सबसे पहले, गिरोह के कुछ सदस्य, जो खुद लोन कंपनी में काम करते थे (इरफान अंसारी, सुमित ढिका, और सुमित कुमार), कंपनी के वर्तमान ग्राहकों का डेटा चुराते थे। यह डेटा वे गिरोह के सरगना मोहम्मद मुजफ्फर अली को बेचते थे।

Crime News: साइबर सिटी में एक बड़े ऑनलाइन धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जो लोन कंपनियों के ग्राहकों को निशाना बनाता था। यह गिरोह डेटा चुराकर लोगों को सस्ते ब्याज पर लोन दिलाने या पुराने लोन को बंद कराने का झांसा देकर ठगी करता था। गुरुग्राम पुलिस की साइबर अपराध पश्चिम इकाई ने इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से पांच मोबाइल फोन व 70 हजार रुपये की नकदी बरामद की है।
मामला तब सामने आया जब एक प्रमुख लोन कंपनी ने 28 अगस्त 2025 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। कंपनी ने बताया कि उनके ग्राहकों के गोपनीय डेटा लीक हो रहे हैं और कुछ अज्ञात लोग इसका इस्तेमाल धोखाधड़ी के लिए कर रहे हैं। शिकायत में कहा गया था कि ये लोग कंपनी के ग्राहकों को कम ब्याज दर पर लोन देने का लालच देकर ठग रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, सहायक पुलिस आयुक्त प्रियांशु दीवान की देखरेख में और निरीक्षक संदीप कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया। आरोपियों की पहचान मोहम्मद मुजफ्फर अली, अमीर हुसैन, मोहम्मद कासिफ, मोहम्मद इरफान अंसारी, अंकित कुमार, सुमित ढिका और सुमित कुमार के रूप में हुई।
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने ठगी के पूरे तरीके का खुलासा किया। यह गिरोह तीन स्तरों पर काम करता था। सबसे पहले, गिरोह के कुछ सदस्य, जो खुद लोन कंपनी में काम करते थे (इरफान अंसारी, सुमित ढिका, और सुमित कुमार), कंपनी के वर्तमान ग्राहकों का डेटा चुराते थे। यह डेटा वे गिरोह के सरगना मोहम्मद मुजफ्फर अली को बेचते थे।
दूसरे स्तर पर, मुजफ्फर अली यह डेटा अपने साथियों अमीर हुसैन और मोहम्मद कासिफ को देता था। ये दोनों ग्राहकों को फोन करके उनके लोन की पूरी जानकारी देते, जिससे उन्हें यकीन हो जाता था कि वे असली कंपनी के ही प्रतिनिधि हैं। इसके बाद, वे ग्राहकों को बताते थे कि उनका मौजूदा लोन महंगे ब्याज पर है और वे उसे कम ब्याज दर वाले लोन में बदल सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें अपना पुराना लोन चुकाना होगा।
तीसरे स्तर पर, ग्राहकों से पैसे ट्रांसफर कराने के लिए ये ठग कंपनी के नाम पर फर्जी यूपीआई आईडी और क्यूआर कोड भेजते थे, जो उनके साथी अंकित कुमार के बैंक खाते से जुड़े होते थे। अंकित दिल्ली में एक सीएससी सेंटर चलाता था। जब ग्राहक उस पर पैसे ट्रांसफर करते थे, तो वह पैसा सीधे अंकित के खाते में जाता था। इसके बाद अंकित नकदी के रूप में मुजफ्फर अली को पैसे देता था। ठगी के बाद, ग्राहक को लोन क्लोज होने का एक फर्जी दस्तावेज भेज दिया जाता था।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह कमीशन के आधार पर काम करता था। मुजफ्फर, कॉल करने वालों को 7-15%, अंकित को 20-30% और डेटा लीक करने वाले कर्मचारियों को प्रति ग्राहक डेटा 5 हजार रुपये का कमीशन देता था। पुलिस ने सभी आरोपियों को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और मामले की जांच जारी है।












