Court Premises की दुर्दशा पर कोर्ट सख्त, चार विभागों को 7 दिन का अल्टीमेटम
अदालत ने याचिकाकर्ताओं के तर्कों पर सहमति जताते हुए कहा कि जिस स्थान को 'न्याय का मंदिर' माना जाता है, उसे अस्वच्छ, दुर्गंधयुक्त और असुरक्षित होने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

Court Premises : गुरुग्राम में न्याय के केंद्र, जिला अदालत परिसर की दयनीय स्थिति पर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) मनीष कुमार की अदालत ने कड़ा संज्ञान लिया है। डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन गुरुग्राम द्वारा दायर एक याचिका में कोर्ट परिसर के भीतर गंदगी, टूटे बुनियादी ढांचे और सुरक्षा की कमी को उजागर किया गया था, जिसके बाद 24 नवंबर को अदालत ने चार प्रमुख प्राधिकरणों – नगर निगम गुरुग्राम (MCG), गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA), लोक निर्माण विभाग (PWD), और जिला प्रशासन – को सख्त निर्देश जारी किए हैं।
अदालत ने याचिकाकर्ताओं के तर्कों पर सहमति जताते हुए कहा कि जिस स्थान को ‘न्याय का मंदिर’ माना जाता है, उसे अस्वच्छ, दुर्गंधयुक्त और असुरक्षित होने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
सामूहिक विफलता का आरोप
बार एसोसिएशन ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि इन सार्वजनिक प्राधिकरणों की “सामूहिक विफलता” के कारण अदालत परिसर में समस्याएं विकराल हो चुकी हैं। न्यायाधीश मनीष कुमार ने प्रथम दृष्टया अवलोकन के आधार पर पाया कि कोर्ट में बहते हुए सीवर, जगह-जगह रुका हुआ गंदा पानी, अत्यधिक कूड़े का ढेर, टूटी हुई आंतरिक सड़कें और सबसे गंभीर रूप से आवारा कुत्तों व बंदरों का आतंक फैला हुआ
सुनवाई के दौरान, एमसीजी ने अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करते हुए दलील दी कि कोर्ट परिसर के अंदर की सीवर लाइनें पीडब्ल्यूडी के अधिकार क्षेत्र में आती हैं। हालांकि, अदालत ने इस तरह के अंतर-विभागीय क्षेत्राधिकार विवादों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों और न्याय की उम्मीद में आने वाले वादियों को सार्वजनिक प्राधिकरणों के आपसी विवादों के कारण कष्ट नहीं पहुँचाया जा सकता। अदालत ने जोर दिया कि किसी भी सार्वजनिक संस्थान में स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित करना हर प्राधिकरण का प्राथमिक और सर्वोपरि कर्तव्य है।
सफाई, मरम्मत और सुरक्षा के लिए कड़े आदेश
बार एसोसिएशन के वकील मनीष शांडिल्य के माध्यम से, अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे संयुक्त रूप से परिसर से सभी मौजूदा बाधाओं को तत्काल प्रभाव से दूर करें। मुख्य निर्देशों में शामिल हैं:
- बुनियादी ढांचा और जल निकासी: सभी सीवर और जल निकासी लाइनों की डी-सिल्टिंग और सफाई सुनिश्चित करना ताकि पानी का मुक्त प्रवाह हो सके। टूटी हुई आंतरिक सड़कों की तत्काल मरम्मत करना और कहीं भी रुके हुए गंदे पानी को हटाना।
- दैनिक स्वच्छता: पूरे कोर्ट परिसर से प्रतिदिन झाड़ू लगाना, सफाई करना और कचरा हटाना सुनिश्चित करना।
- जानवरों का आतंक समाप्त करना: अधिवक्ताओं, वादियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परिसर से आवारा कुत्तों, बंदरों और अन्य जानवरों को पूरी तरह से हटाना, साथ ही उनकी पुन: प्रविष्टि को रोकने के लिए आवश्यक उपाय स्थापित करना।
हर सोमवार को देनी होगी साप्ताहिक रिपोर्ट
अदालत ने कार्रवाई की निगरानी के लिए एक सख्त समय सीमा निर्धारित की है। आदेश दिया गया है कि एमसीजी आयुक्त, जीएमडीए के सीईओ, पीडब्ल्यूडी के कार्यकारी अभियंता और गुरुग्राम के उपायुक्त को एक सप्ताह के भीतर एक संयुक्त और व्यापक कार्रवाई रिपोर्ट के साथ व्यक्तिगत हलफनामे दाखिल करने होंगे। इन हलफनामों में स्थायी समाधान के लिए उठाए गए कदमों और समयबद्ध कार्य योजना का विस्तृत विवरण होना चाहिए। इसके अलावा, जब तक सभी बाधाएं पूरी तरह से समाप्त नहीं हो जातीं, तब तक अधिकारियों को हर सोमवार को अदालत में एक साप्ताहिक स्थिति रिपोर्ट भी पेश करनी होगी।