Raksha Bandhan: जब संजय दत्त को जेल में बहनों ने बांधी थी राखी, सलाखों के पीछे भावुक हुआ था भइया-बहन का प्यार
रक्षाबंधन पर जब जेल का दरवाजा खुला और बहनों की ममता के आगे झुक गया नियम-कानून; संजय दत्त की आंखों से बह निकले थे आंसू

Raksha Bandhan :
बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त के जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन साल 2007 का रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) उनके और उनके परिवार के लिए सबसे ज्यादा भावुक और यादगार दिनों में से एक रहा। 1993 के मुंबई बम धमाकों से जुड़े टाडा मामले में जब संजय दत्त पुणे की येरवडा सेंट्रल जेल में बंद थे, तब उनकी बहनों—प्रिया दत्त और नम्रता दत्त—ने जेल की सख्त पाबंदियों के बीच जाकर अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा था।
जेल के भीतर का वो भावुक पल : Raksha Bandhan
विशेष अनुमति: जेल के कड़े नियमों के बावजूद, भाई-बहन के इस पवित्र त्योहार को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने नम्रता और प्रिया दत्त को मुलाकात की विशेष अनुमति दी थी।
सख्त सुरक्षा और तलाशी: सुरक्षा जांच की तमाम औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद जब दोनों बहनें जेल के मुलाकात कक्ष में पहुंचीं, तो माहौल पूरी तरह से गमगीन और भावुक हो गया।
बहनों का दुलार और भावुक संजय: जेल के कपड़ों में खड़े अपने भाई की कलाई पर जब बहनों ने राखी बांधी, तो संजय दत्त अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए। बहनों ने उन्हें तिलक लगाया और मिठाई खिलाकर उनके सुरक्षित जीवन की प्रार्थना की।
भइया का अनोखा तोहफा: जेल के भीतर कोई कीमती सामान न होने के बावजूद, संजय दत्त ने बहनों को देने के लिए वो कूपन संभालकर रखे थे, जो उन्हें जेल में काम करने के बदले मेहनताने के रूप में मिलते थे। उन्होंने अपनी बहनों को वही कूपन और आशीर्वाद उपहार स्वरूप दिए थे।
Raksha Bandhan : यह प्रसंग आज भी इस बात की मिसाल है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों और सलाखें कितनी भी ऊंची हों, भाई-बहन के प्रेम और अटूट रिश्ते को कोई कानून या दीवार कैद नहीं कर सकती।
