गुरुग्राम नगर निगम (MCG) की बैठक में ‘चमचा’ शब्द पर मचा घमासान: पार्षदों के बीच जमकर हुई तू-तू, मैं-मैं
निगम की मर्यादा तार-तार: पार्षदों के बीच 'चमचा' युद्ध, निगमायुक्त के रवैये पर भी बरसे जनप्रतिनिधि

MCG : सेक्टर-18 स्थित हिपा (HIPA) परिसर में सोमवार को आयोजित नगर निगम गुरुग्राम (MCG) की सामान्य सदन बैठक विकास कार्यों पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी, लेकिन यह बैठक व्यक्तिगत आरोपों और ‘चमचा’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल के कारण हंगामे की भेंट चढ़ गई। सदन में उस समय मर्यादा की सारी सीमाएं टूट गईं जब पार्षद अनूप सिंह और दलीप साहनी के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
‘चमचा’ शब्द पर बिगड़ा सदन का माहौल
बैठक के दौरान माहौल तब सबसे ज्यादा तनावपूर्ण हो गया जब पार्षद अनूप सिंह और दलीप साहनी आमने-सामने आ गए। चर्चा के दौरान किसी बात पर अनूप सिंह को ‘चमचा’ शब्द सुनाई दिया, जिस पर वे बुरी तरह उखड़ गए। उन्होंने कड़ा विरोध जताते हुए सवाल किया कि सदन के भीतर “चमचा” क्यों कहा गया?
देखते ही देखते दोनों पार्षदों के बीच व्यक्तिगत छींटाकशी शुरू हो गई। अनूप सिंह ने आरोप लगाया कि इस तरह की असंसदीय भाषा का इस्तेमाल सदन की गरिमा के खिलाफ है। वहीं दलीप साहनी के साथ हुई उनकी बहस इतनी तेज थी कि दूसरे पार्षदों और अधिकारियों को बीच-बचाव करना पड़ा। शोर-शराबा इतना बढ़ गया कि मेयर राजरानी मल्होत्रा को सदन की कार्यवाही को कुछ देर के लिए रोकना पड़ा। लंच के बाद भी दोनों पक्षों के बीच तल्खी कम नहीं हुई और इस विवाद की गूँज पूरी बैठक में सुनाई देती रही।
निगमायुक्त के ‘फोन न उठाने’ पर भी बरसे पार्षद
विवाद की शुरुआत हालांकि पेयजल और बुनियादी सुविधाओं से हुई थी। पार्षदों ने निगमायुक्त प्रदीप दहिया पर आरोप लगाया कि वे पार्षदों का फोन नहीं उठाते और न ही व्हाट्सएप संदेशों का जवाब देते हैं। वार्ड-36 के पार्षद ने कहा कि जब अधिकारी जनप्रतिनिधियों की बात नहीं सुनेंगे, तो जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा?
इस पर निगमायुक्त ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अधिकारी भी जवाब देना जानते हैं। उन्होंने पार्षदों की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “नेता बनकर सुर्खियां बटोर लोगे”, जिससे पार्षद और अधिक भड़क गए।
मेयर की अपील बेअसर
मेयर राजरानी मल्होत्रा ने बार-बार पार्षदों से शालीनता बरतने और व्यक्तिगत आरोपों से बचने की अपील की। उन्होंने कहा, “यह सदन जनता की समस्याओं को सुलझाने के लिए है, न कि आपस में उलझने के लिए।” लेकिन दलीप साहनी और अनूप सिंह के बीच छिड़ी ‘जुबानी जंग’ ने बैठक के मुख्य एजेंडे को हाशिए पर धकेल दिया।
पूरी बैठक में विकास कार्यों से ज्यादा चर्चा पार्षदों के व्यवहार और अधिकारियों की कार्यशैली पर होती रही। ‘चमचा’ शब्द का विवाद बैठक खत्म होने के बाद भी गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा।
निष्कर्ष: गुरुग्राम नगर निगम की यह बैठक इस बात का प्रमाण रही कि जब जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद की मर्यादा टूटती है, तो शहर के विकास से जुड़े गंभीर मुद्दे पीछे छूट जाते हैं।