Toll System : सरकार ने टोल वूसली का नया सिस्टम रोका ! अब क्या होगा ?

Toll System : केंद्र की मोदी सरकार ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की महत्वाकांक्षी योजना सैटेलाइट-आधारित टोल वसूली (GNSS) को फिलहाल आगे न बढ़ाने का फैसला किया है । यह प्रोजेक्ट देशभर में टोल लेने के तरीके को पूरी तरह बदलने वाला था, लेकिन वाहनों में ट्रैकिंग सिस्टम लगाने से जुड़ी गोपनीयता और सुरक्षा चुनौतियों के कारण इसे स्थगित कर दिया गया है।

GNSS (Global Navigation Satellite System) मॉडल के तहत हर वाहन में एक ऑन-बोर्ड यूनिट (OBU) लगाई जानी थी, जो यात्रा के दौरान वाहन की लोकेशन, रूट और व्यवहार से जुड़ा डेटा लगातार रिकॉर्ड करती। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे डिवाइस नागरिकों की प्राइवेसी पर बड़ा खतरा बन सकते हैं और संवेदनशील जानकारी के लीक होने या दुरुपयोग होने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही, VIP मूवमेंट ट्रैक होने जैसी सुरक्षा आशंकाओं ने भी सरकार को इस योजना पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया।

सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी थी कि 1 मई से सैटेलाइट-टोलिंग लागू करने संबंधी कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया था। परीक्षण के तौर पर GNSS तकनीक का इस्तेमाल बेंगलुरु–मैसूर एक्सप्रेसवे और हरियाणा के कुछ हिस्सों में किया गया था, जहाँ दूरी आधारित टोल कटने की व्यवस्था चलाई गई। लेकिन अब इस पायलट प्रोजेक्ट को भी होल्ड पर रख दिया गया है।

अब बदल जाएगी टोल सिस्टम की दिशा: नंबर प्लेट से कटेगा टोल, FASTag रहेगा जारी

GNSS योजना पर विराम लगने के बाद सरकार अब ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक पर फोकस कर रही है। इस सिस्टम में किसी भी ट्रैकिंग डिवाइस की जरूरत नहीं पड़ेगी। हाईवे पर लगाए गए हाई-टेक कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे और टोल राशि सीधे FASTag वॉलेट से कट जाएगी। इससे वाहन टोल प्लाजा पर बिना रुके गुजर सकेंगे और यात्रा और भी सहज हो जाएगी।

सड़क परिवहन मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, ANPR आधारित ‘बाधारहित टोलिंग’ (Barrier-Free Tolling) को चुनिंदा टोल प्लाज़ा पर लागू करने की तैयारी चल रही है। यह तरीका आधुनिक भी है और नागरिकों की निजता की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है।

क्यों रोकी गई Global Navigation Satellite System योजना ?

  • वाहन ट्रैकिंग से नागरिकों की निजता प्रभावित होने की आशंका

  • संवेदनशील डेटा के दुरुपयोग का जोखिम

  • VIP मूवमेंट के ट्रैक होने की चिंता

  • राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े खतरे

  • लगातार मॉनिटरिंग से प्राइवेसी उल्लंघन की संभावना

सरकार के लिए प्राइवेसी और सुरक्षा प्राथमिकता हैं, इसलिए Global Navigation Satellite System जैसे हाई-ट्रैकिंग मॉडल को फिलहाल लागू नहीं किया जाएगा।

नई तकनीक आएगी, लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं

सैटेलाइट टोलिंग पर रोक का फैसला स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार हाईवे टोलिंग को आधुनिक बनाने के साथ-साथ नागरिकों की सुरक्षा और निजता से समझौता नहीं करना चाहती। अब उम्मीद है कि ANPR + FASTag आधारित नया मॉडल देशभर में टोलिंग सिस्टम को तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने में मदद करेगा।

Sunil Yadav

सुनील यादव पिछले लगभग 15 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों में ( India Tv, Times Now,… More »
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