हरियाणा के किसानों को सैनी सरकार का बड़ा तोहफा, सरकार लाई नई स्कीम, अब मिलेगा सीधे मोटा फायदा
हरियाणा के किसानों के लिए खुशखबरी है। अब वर्षों से लंबित भूमि विवादों को सुलझाने और संपत्ति के बंटवारे की प्रक्रिया में तेजी आएगी। हरियाणा सरकार ने हरियाणा भूमि राजस्व (संशोधन) अधिनियम लागू किया है

Haryana News: हरियाणा के किसानों के लिए खुशखबरी है। अब वर्षों से लंबित भूमि विवादों को सुलझाने और संपत्ति के बंटवारे की प्रक्रिया में तेजी आएगी। हरियाणा सरकार ने हरियाणा भूमि राजस्व (संशोधन) अधिनियम लागू किया है। यह अधिनियम विशेष रूप से उन मामलों में राहत प्रदान करेगा, जहां संयुक्त परिवारों के बीच भूमि के स्वामित्व को लेकर जटिलताएं हैं। वित्त आयुक्त एवं गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि संशोधित कानून उन प्रमुख समस्याओं का समाधान करता है, जिनमें परिवार के कई सदस्य संयुक्त रूप से भूमि के एक टुकड़े के मालिक होते हैं। पहले की व्यवस्था के तहत, यदि सभी सह-मालिक, जैसे भाई-बहन या अन्य रिश्तेदार, भूमि के बंटवारे पर सहमत नहीं होते थे, तो सरकार इसे विभाजित नहीं कर सकती थी। अब इस संशोधन के माध्यम से इन मामलों को तेजी से और अधिक प्रभावी ढंग से निपटाया जा सकेगा।
धारा 111-ए को बढ़ाया गया और पति-पत्नी को अपवाद बनाया गया
नए कानून के तहत, धारा 111-ए को लगभग सभी प्रकार के भूमि मालिकों पर लागू करने के लिए बढ़ाया गया है, केवल पति-पत्नी को प्रावधान से बाहर रखा गया है। इसका मतलब है कि अब रक्त संबंधियों के बीच आम जमीन पर होने वाले अधिकांश विवादों को जल्दी से जल्दी सुलझाना संभव होगा।
राजस्व अधिकारी अब स्वतः ही नोटिस ले सकेंगे
संशोधन के तहत राजस्व अधिकारी अब संज्ञान में आने पर संयुक्त भूस्वामियों को स्वतः ही नोटिस जारी कर सकेंगे। इन नोटिसों के माध्यम से सभी हितधारकों को आपसी सहमति से भूमि के विभाजन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए छह महीने का समय दिया जाएगा। इससे भूमि अभिलेखों की नियमितता सुनिश्चित होगी तथा प्रत्येक स्वामी को अपने हिस्से पर स्पष्ट अधिकार होगा।
धारा 114 समाप्त, अब एकल स्वामी भी कर सकेंगे आवेदन
एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव में धारा 114 को समाप्त किया गया। पहले इस धारा के तहत राजस्व अधिकारियों को यह देखना होता था कि अन्य सह-स्वामी भी विभाजन के पक्ष में हैं या नहीं, तथा उन्हें भी आवेदक के रूप में शामिल करना अनिवार्य था। अब केवल एक भागीदार द्वारा आवेदन किए जाने पर भी उसके हिस्से का बंटवारा हो सकेगा, चाहे अन्य सह-स्वामी सहमत हों या नहीं।
न्यायिक विवाद कम होंगे, नागरिकों को लाभ होगा
डॉ. मिश्रा ने कहा कि संशोधन भूमि प्रशासन को तेज, सरल तथा नागरिक केंद्रित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसका उद्देश्य न केवल अदालतों में लंबित भूमि विवादों को कम करना है, बल्कि प्रत्येक भूस्वामी को अपने हिस्से का पूर्ण स्वामित्व और स्वतंत्र उपयोग का अधिकार सुनिश्चित करना भी है।