Sad News : एक साथ उठी तीन अर्थियों ने नम कर दी सबकी आंखें, गांव में छाया मातम और घरों में बुझ गए चूल्हे
फिरोजपुर झिरका के पास दर्दनाक हादसे में सोनू, अनिल और रवि की मौत; बाल्मीकि मोहल्ले में पसरा मातम, टला जयंती का जश्न

Sad News/सोहना (गुरुग्राम)।
रविवार की भोर सोहना के बाल्मीकि मोहल्ले के लिए सुबह की रोशनी नहीं, बल्कि ताउम्र न भूलने वाला अंधकार लेकर आई। एक पारिवारिक समारोह में हंसते-खिलखिलाते शामिल होकर लौट रहे चार अपनों पर काल ने ऐसा झपट्टा मारा कि पूरे इलाके की रूह कांप उठी। फिरोजपुर झिरका के पास एक तेज रफ्तार ट्राले और इको गाड़ी की भीषण भिड़ंत में सोनू, अनिल और रवि की सांसें सदा के लिए थम गईं, जबकि अभिषेक नूंह के नल्हड़ अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।
“अब किसे पापा कहेगी मेरी दो महीने की बिटिया?” : Sad News
इस हादसे ने सबसे गहरा जख्म सोनू के परिवार को दिया है। सोनू, जो पहले नगर परिषद में काम करते थे, हाल ही में काम छूटने के कारण बेरोजगार थे। लेकिन तंगहाली के बीच भी दो महीने पहले घर में जन्मी नन्ही बिटिया और दो अन्य बच्चों की मुस्कान उनकी हिम्मत बनी हुई थी।
सोनू की असमय मौत Sad News की खबर मिलते ही उनकी पत्नी बेसुध हो गईं। सिसकियों के बीच उनकी जुबां से बस एक ही सवाल निकल रहा था— “हे भगवान! ये कैसा न्याय है? मेरी दो महीने की मासूम किसे पापा कहकर पुकारेगी? मेरे बच्चों का लालन-पालन कौन करेगा?” सोनू के जाने से परिवार का इकलौता सहारा भी खत्म हो गया।
एक ही मोहल्ला, दो अर्थियां और सन्नाटे में डूबा गांव : Sad News
दर्द की यह कहानी (Sad News) यहीं खत्म नहीं होती। कर्मबीर ने अपना जवान बेटा अनिल खो दिया, तो उनके भाई ने अपना दामाद रवि (निवासी फिरोजगांधी कॉलोनी, गुरुग्राम)। अनिल भी सोहना नगर परिषद में सफाईकर्मी थे और अपने पीछे तीन छोटे-छोटे मासूम बच्चों को छोड़ गए हैं।
जब पोस्टमार्टम के बाद सोनू और अनिल के शव एक साथ बाल्मीकि मोहल्ले पहुंचे, तो मंजर इतना दर्दनाक था कि सख्त से सख्त दिल वाला इंसान भी अपने आंसू न रोक सका। एक ही मोहल्ले से जब एक साथ दो अर्थियां उठीं, तो हवाओं में सिर्फ चीख-पुकार और मातम का सन्नाटा था। मोहल्ले में किसी भी घर का चूल्हा नहीं जला, हर आंख नम थी और हर कदम पीड़ितों को ढांढस बंधाने उनके घर की ओर बढ़ रहा था।
खुशी के ढोल खामोश, बाल्मीकि जयंती समारोह स्थगित : Sad News
रविवार को पूरे मोहल्ले में बाल्मीकि जयंती का पावन पर्व धूमधाम से मनाने की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। चारों तरफ खुशियों का माहौल था, लेकिन पलक झपकते ही जयंती की खुशियां मातम में तब्दील हो गईं। मोहल्ले पर टूटे इस दुख के पहाड़ को देखते हुए सभी आयोजनों को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया।
Sad News : सोनू, अनिल और रवि की यह असामयिक विदाई पूरे क्षेत्र को ऐसा दर्द दे गई है, जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकेगी।
