PWD Rest House में लगने लगी अदालत, कोर्ट में लगी आग की जांच के लिए SIT गठित

PWD Rest House : गुरुग्राम जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में रिकॉर्ड रूम में लगी आग की घटना के बाद न्यायिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए प्रशासन, न्यायपालिका एवं अधिवक्ताओं के समन्वय से तेजी से कार्य किया जा रहा है। मंगलवार को लगभग सभी अदालतों का आवश्यक रिकॉर्ड एवं न्यायिक कार्यवाही पुरानी कोर्ट बिल्डिंग से वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में स्थानांतरित कर दी गई। इसके साथ ही पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में अदालतों का संचालन भी सुचारू रूप से जारी रहा।
प्रशासन एवं न्यायपालिका की ओर से यह सुनिश्चित किया गया कि आमजन को न्यायिक कार्यों में किसी प्रकार की असुविधा न हो। जरूरी एवं अत्यावश्यक मामलों की सुनवाई नियमित रूप से की गई तथा अधिवक्ताओं एवं पक्षकारों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गईं। इस पूरी प्रक्रिया में गुरुग्राम बार एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ताओं का सराहनीय सहयोग देखने को मिला।
बार एसोसिएशन के प्रधान चंद्रकांत शर्मा ने कहा कि न्यायिक कार्यवाही को निरंतर बनाए रखने के लिए बार एसोसिएशन प्रशासन एवं न्यायपालिका को पूरा सहयोग दे रही है। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता है कि अदालतों का कार्य बिना किसी व्यवधान के चलता रहे तथा आमजन को किसी प्रकार की परेशानी न उठानी पड़े। उन्होंने आमजन से अपील की कि किसी प्रकार की अफवाहों या भ्रम की स्थिति से बचें, न्यायिक कार्य पूरी गंभीरता एवं व्यवस्थित तरीके से संचालित हो रहे हैं।
कोर्ट में लगी आग की जांच करेगी SIT
वहीं, एफएसएल टीम एवं सीन ऑफ क्राइम की टीम ने घटनास्थल का विस्तृत निरीक्षण किया और आग लगने के कारणों की जांच प्रारंभ की। घटना की गहन जांच एवं सभी पहलुओं की निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच सुनिश्चित करने के लिए एसीपी सदर धर्मबीर सिंह की अध्यक्षता में एक सात सदस्यों का विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन भी किया गया है, यह एसआईटी डीसीपी वेस्ट करण गोयल के सुपरविजन में कार्य करेगी।
एसीपी धर्मबीर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि एसआईटी टीम में एसएचओ शिवाजी नगर, सेक्टर 10 सीआइए इंचार्ज, साइबर इंचार्ज वेस्ट, एसआई संजय व नरपाल तथा हेड कांस्टेबल गोविंद शामिल है।
आमजन को असुविधा न हो, न्यायिक व्यवस्था सुचारू रखना हमारी प्राथमिकता : जिला एवं सत्र न्यायाधीश
जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र सुरा ने कहा कि न्यायपालिका का प्रयास है कि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड पुनर्निर्माण, वैकल्पिक व्यवस्थाओं एवं न्यायिक कार्यों की निरंतरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।