Prince Murder Case में पुलिसकर्मियों को CBI कोर्ट से झटका, विशेष अदालत ने सुनाया अहम फैसला

Prince Murder Case : गुरुग्राम के चर्चित प्रिंस हत्याकांड में जांच के दौरान लापरवाही और एक निजी बस परिचालक को झूठे आरोप में फंसाने के मामले में अब चार पुलिसकर्मियों पर आरोप तय होने का रास्ता साफ हो गया है। पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने पुलिसकर्मियों की डिस्चार्ज (बरी) करने की मांग वाली अर्जियों को 29 नवंबर 2025 को खारिज कर दिया । यह जानकारी अदालत के आदेश से स्पष्ट होती है कि अभियुक्तों की ओर से प्रस्तुत दलीलों को स्वीकार नहीं किया गया और उनके खिलाफ पर्याप्त प्रथम दृष्टया सबूत पाए गए हैं।
अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ धारा 120-B, 166-A, 167, 194, 330 और 506 आईपीसी सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला बनता है, इसलिए उन्हें चार्जशीट का सामना करना होगा। आरोप तय करने के लिए अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2025 को तय की गई है।

क्या है पूरा मामला?
यह मामला 8 सितंबर 2017 का है, जब गुरुग्राम के एक निजी स्कूल में दूसरी क्लास के छात्र प्रिंस की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। वारदात के बाद स्थानीय पुलिस ने जल्दबाजी में बस परिचालक अशोक कुमार को गिरफ्तार किया और दावा किया कि उसी ने हत्या की है। बाद में जांच पर सवाल उठे और प्रदेश सरकार ने केस को सीबीआई को सौंप दिया।
सीबीआई की जांच में बड़ा उलटफेर हुआ। एजेंसी ने पाया कि हत्या बस परिचालक ने नहीं बल्कि स्कूल के ही 12वीं कक्षा के छात्र ने की थी। इसके बाद सीबीआई ने बस परिचालक को निर्दोष माना और वास्तविक आरोपी छात्र को गिरफ्तार किया।
पुलिस पर लगे आरोप
सीबीआई की जांच के अनुसार, स्थानीय पुलिस ने जल्दबाजी में स्कूल के बस परिचालक को दोषी बताने की कोशिश की, और जांच में गंभीर अनियमितताएँ बरतीं। इस संबंध में पुलिस अधिकारियों नरेंद्र सिंह खटाना (A-1), बीरम सिंह (A-2), शमशेर सिंह (A-3) और सुभाष चंद (A-4) पर आरोप लगाए गए हैं। चारों आरोपी फिलहाल जमानत पर हैं।
अदालत में दायर याचिकाओं में आरोपियों की ओर से कहा गया था कि उन्हें मामले से मुक्त कर दिया जाए, लेकिन अदालत ने इसे अस्वीकार करते हुए माना कि पुलिसकर्मियों पर झूठा फंसाने, दबाव डालने, गलत सबूत तैयार करने और गैरकानूनी तरीके से पूछताछ करने जैसी गंभीर लापरवाही के आरोप प्रथम दृष्टया साबित होते हैं।

अदालत का सख्त रुख
सीबीआई स्पेशल जज ने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपियों की डिस्चार्ज याचिका में दम नहीं है और उनके खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। अदालत ने आरोपी नरेंद्र सिंह खटाना की व्यक्तिगत उपस्थिति से उस दिन की छूट भी प्रदान की, जैसा कि रिपोर्ट में दर्ज है।
अगला कदम
अब 9 दिसंबर 2025 को अदालत इन चारों पुलिसकर्मियों पर औपचारिक रूप से आरोप तय करेगी, जिसके बाद ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। प्रिंस हत्याकांड गुरुग्राम और पूरे देश में बेहद चर्चित हुआ था, और इस मामले में पुलिस की भूमिका पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सीबीआई द्वारा साक्ष्यों के आधार पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोप तय होना इस केस में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।











