Delhi- NCR में डीजल-पेट्रोल गाड़ियों पर रोक के खिलाफ याचिका खारिज, जानें क्या है नया आदेश
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिका में नामित सभी आरोपी 'लोक सेवक' (Public Servants) की श्रेणी में आते हैं।

Delhi- NCR में पुराने पेट्रोल और डीजल गाड़ियों के संचालन पर प्रतिबंध लगाने के मामले में सुनवाई करते हुए गुरुग्राम के अतिरिक्ति जिला एवं सत्र न्यायधीश अमित गौतम की अदलात ने याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने निचली अदालत के पूर्व के आदेश को बरकरार रखा।
बता दे कि यह याचिका केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिरसा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर की गई थी।
याचिकाकर्ता (अधिवक्ता) का आरोप था कि अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी (NGT) के आदेशों की गलत व्याख्या करते हुए एनसीआर में 15 साल पुरानी पेट्रोल और 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों पर प्रतिबंध लगाया है। याचिका में मांग की गई थी कि इन नियमों के कारण आम जनता को परेशानी हो रही है, इसलिए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिका में नामित सभी आरोपी ‘लोक सेवक’ (Public Servants) की श्रेणी में आते हैं। कानूनी प्रावधानों के अनुसार, किसी भी लोक सेवक के खिलाफ उनके आधिकारिक कर्तव्य के दौरान किए गए कार्यों के लिए मुकदमा चलाने से पहले सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी लेना अनिवार्य है।
अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता ने इस मामले में आवश्यक सरकारी स्वीकृति प्राप्त नहीं की थी। इससे पहले निचली अदालत ने भी पिछले साल 14 जुलाई को इसी आधार पर याचिका खारिज कर दी थी। ऊपरी अदालत ने अब उस फैसले को सही ठहराते हुए याचिका को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है।
वर्तमान में एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्रों (जिसमें गुरुग्राम भी शामिल है) में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 10 साल से पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों के चलने पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है। कोर्ट के इस ताजा फैसले के बाद अब इन नियमों में बदलाव की संभावना फिलहाल समाप्त हो गई है।









