New toll system: 1 मई से शुरू हो रहा नया टोल सिस्टम! ना फास्टैग-ना टोल प्लाजा, अब GPS काटेगा टोल, जानें डिटेल

New Toll System: भारत की सड़कों पर सफर करते हुए आपने अकसर टोल प्लाजा (Toll Plaza) पर लंबी लाइनों फालतू देरी और टोल चार्ज की झंझट को झेला होगा। पहले जहां कैश में टोल चुकाना पड़ता था वहीं 2016 में फास्टैग (FASTag) के आने के बाद थोड़ी राहत जरूर मिली। लेकिन अब समय आ गया है और भी स्मार्ट सफर का क्योंकि केंद्र सरकार एक नई तकनीक को लागू करने जा रही है जो टोल टैक्स वसूली को पूरी तरह डिजिटल ट्रांसपेरेंट और hassle-free बना देगी।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में एक बड़ा ऐलान करते हुए बताया कि अगले 15 दिनों में भारत सरकार GPS आधारित टोल प्रणाली लागू करने जा रही है। इस नई नीति से न केवल टोल वसूली की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव आएगा बल्कि आम यात्रियों को भी काफी राहत मिलेगी।New toll system
GPS आधारित टोल टैक्स प्रणाली
नई नीति के तहत देश में टोल टैक्स अब गाड़ी की दूरी के हिसाब से वसूला जाएगा न कि टोल प्लाजा पार करने के आधार पर। यानी जितनी दूरी आप हाईवे पर तय करेंगे उतना ही टोल कटेगा। यह पूरी प्रक्रिया जीपीएस (GPS) और ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) तकनीक पर आधारित होगी।

हर गाड़ी में एक विशेष डिवाइस – ऑन-बोर्ड यूनिट (OBU) – इंस्टॉल की जाएगी। यह डिवाइस सैटेलाइट के ज़रिए आपकी गाड़ी की मूवमेंट को ट्रैक करेगी और जैसे-जैसे आप हाईवे पर ड्राइव करेंगे आपकी तय की गई दूरी के मुताबिक टोल अपने आप आपके बैंक अकाउंट या डिजिटल वॉलेट से कटता जाएगा। इस प्रोसेस में न तो टोल प्लाजा पर रुकना पड़ेगा और न ही किसी इंसान से इंटरैक्शन करना होगा।New toll system
फास्टैग से GPS की ओर
2016 में जब फास्टैग लाया गया था तब टोल गेट्स पर रुकावटें काफी कम हुईं। फास्टैग में RFID (Radio Frequency Identification) तकनीक का उपयोग होता था जिसमें टोल गेट पर लगे सेंसर आपके गाड़ी पर लगे टैग को पढ़कर टोल काट लेते थे। लेकिन इस तकनीक में एक बड़ी दिक्कत थी – दूरी के आधार पर चार्ज नहीं होता था। एक जैसे टोल सभी गाड़ियों से लिए जाते थे चाहे किसी ने 5 किमी की दूरी तय की हो या 50 किमी की।
GPS आधारित टोल प्रणाली इस कमज़ोरी को खत्म कर देगी। अब हर किलोमीटर का हिसाब होगा जिससे कोई भी वाहन मालिक ना तो ज्यादा चार्ज देगा और ना ही कम। यानी पूरी तरह से फेयर सिस्टम।New toll system

कब से लागू होगा नया सिस्टम?
नितिन गडकरी ने साफ कर दिया है कि 1 मई 2025 से भारत में GPS आधारित टोल सिस्टम की शुरुआत हो जाएगी। हालांकि इसे एक ही बार में सभी गाड़ियों पर लागू नहीं किया जाएगा। सबसे पहले यह सिस्टम कमर्शियल व्हीकल्स – जैसे ट्रक और बसों – पर लागू होगा। इसके बाद धीरे-धीरे यह निजी वाहनों पर भी लागू किया जाएगा।

इसके पीछे सरकार की सोच साफ है पहले बड़े वाहनों पर इसे टेस्ट कर के तकनीकी खामियों को दूर करना फिर पूरे देश में रोल आउट करना। इसके अलावा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) इस पूरे सिस्टम को फेज वाइज़ लागू करेगा।New toll system
नई प्रणाली के जबरदस्त फायदे
GPS आधारित टोलिंग सिर्फ टेक्नोलॉजी का उन्नत रूप नहीं बल्कि यह सिस्टम यात्रियों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। इसके कई फायदे हैं:
🔹 दूरी आधारित टोल – जितना चला उतना पैसा। यानी कोई ओवरचार्जिंग नहीं।
🔹 टोल प्लाजा पर रुकने की ज़रूरत नहीं – सीधे निकल जाओ लाइन में लगने का झंझट खत्म।
🔹 ट्रांसपेरेंट सिस्टम – ऑटोमेटेड चार्जिंग से भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म।
🔹 ईंधन और समय की बचत – कम स्टॉपेज का मतलब कम फ्यूल खपत और जल्दी पहुंचना।
🔹 कार्बन उत्सर्जन में कमी – पर्यावरण के लिए भी बेहतरीन कदम।
🔹 ट्रैफिक कंजेशन कम होगा – टोल प्लाजा पर जाम लगने की समस्या से राहत।
🔹 फास्ट प्रोसेसिंग – रियल टाइम ट्रैकिंग और टोल कटने से पूरा सिस्टम होगा स्मूद। New toll system
गाड़ियों में कैसे लगेगा GPS डिवाइस?
OBU या On-Board Unit को गाड़ी में फिट करना अनिवार्य होगा। इसके लिए सरकार रजिस्ट्रेशन के समय ही यह डिवाइस लगवाने की योजना पर काम कर रही है। पहले से चल रही गाड़ियों के लिए अलग से सेंटर बनाए जाएंगे जहां यह डिवाइस इंस्टॉल किया जाएगा।
यह डिवाइस GNSS सैटेलाइट से जुड़ा होगा जो गाड़ी की लोकेशन स्पीड और हाईवे मूवमेंट को ट्रैक करेगा। इस डेटा के आधार पर टोल राशि तय होगी और आपके बैंक या वॉलेट से कट जाएगी।
सरकार UPI नेट बैंकिंग और डिजिटल वॉलेट के ज़रिए भुगतान को सपोर्ट करेगी जिससे पेमेंट प्रोसेस और भी आसान बन जाएगा।New toll system











