Mission Yamuna: मुख्य सचिव का सख्त निर्देश, प्रदूषण नियंत्रण के लिए हरियाणा में हर नाले पर बनेगी ड्रेन-वाइज कमेटी

मुख्य सचिव ने अभियान की गति और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया है। उन्होंने निर्देश दिया कि यमुना में गिरने वाले हर प्रमुख नाले के लिए अलग-अलग ड्रेन-वाइज कमेटियां गठित की जाएं।

Mission Yamuna :  हरियाणा सरकार ने पवित्र यमुना नदी की स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण के अपने प्रयासों में उल्लेखनीय तेजी ला दी है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आज हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अपशिष्ट जल शोधन, औद्योगिक अनुपालन और सीवरेज अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण पर विशेष जोर दिया गया, ताकि यमुना पुनर्जीवन के लक्ष्य को समय पर हासिल किया जा सके।

मुख्य सचिव ने अभियान की गति और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया है। उन्होंने निर्देश दिया कि यमुना में गिरने वाले हर प्रमुख नाले के लिए अलग-अलग ड्रेन-वाइज कमेटियां गठित की जाएं।

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि यमुना में मिलने वाले 11 प्रमुख नालों से प्रतिदिन बहने वाले  1511.55 मिलियन लीटर (MLD) अपशिष्ट जल में से लगभग 1000 MLD जल पहले से ही उपचारित किया जा रहा है।

राज्य ने सीवरेज शोधन क्षमता में अभूतपूर्व विस्तार किया है:

औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन (Industrial Effluent Management) में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। राज्य में  184.5  MLD क्षमता के 17 कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) संचालित हैं। 146  MLD क्षमता के आठ नए प्लांट प्रस्तावित हैं। अधिकांश बड़ी औद्योगिक इकाइयां या तो CETP से जुड़ चुकी हैं या उन्होंने स्वयं के अपशिष्ट शोधन संयंत्र (ETP) स्थापित किए हैं।

सीवरेज नेटवर्क का कार्य अंतिम चरण में:

राज्य ने यमुना कैचमेंट एरिया के 34 शहरों में सीवरेज नेटवर्क का कार्य लगभग पूरा कर लिया है। प्रस्तावित  1632  किलोमीटर सीवर लाइन में से 1626.6  किलोमीटर लाइन बिछाई जा चुकी है। फरीदाबाद में शेष  5.4  किलोमीटर कार्य 31 दिसंबर तक पूरा हो जाएगा।

शोधन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ राज्य सरकार ट्रीटेड पानी के पुन: उपयोग (Reuse of Treated Water) को भी प्राथमिकता दे रही है। उपचारित पानी पर आधारित तीन सिंचाई परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि छह परियोजनाएं प्रगति पर हैं। इससे ताजे पानी के स्रोतों पर निर्भरता में महत्वपूर्ण कमी आएगी।

बैठक में धनौरा एस्केप, ड्रेन नंबर 2, बुढ़िया नाला और गौंची ड्रेन सहित सभी प्रमुख नालों पर चल रहे सीवर टैपिंग कार्यों की निरंतर प्रगति की जानकारी दी गई। गुरुग्राम में 100  MLD क्षमता के प्रस्तावित एसटीपी जैसे नए संयंत्रों के निर्माण से आने वाले वर्षों में यमुना में प्रदूषण भार और भी कम होने की उम्मीद है।

Sunil Yadav

सुनील यादव पिछले लगभग 15 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों में ( India Tv, Times Now,… More »
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