निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने बताया कि इस नए कानून को लेकर नागरिकों से एक सप्ताह तक सुझाव भी मांगे गए हैं। यह कानून गुरुग्राम की सीमा में सभी निवासियों, संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर लागू होगा।
नए नियमों का सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब लोगों को अपने घरों और प्रतिष्ठानों में दो की जगह पाँच रंग के कूड़ेदान रखने होंगे। कचरे को उसके स्रोत पर ही अलग-अलग करना अनिवार्य होगा।
निर्माण और तोड़फोड़ (C&D) के कचरे के लिए सफेद बैग का इस्तेमाल करना होगा।
निगम ने लापरवाही पर लगने वाले जुर्माने की राशि कई गुना बढ़ा दी है, ताकि खुले में कचरा जलाने और फेंकने पर लगाम लगाई जा सके।
- खुले में कचरा जलाना: ऐसा करने पर ₹5,000 से ₹20,000 तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
- खुले में कूड़ा फेंकना: किसी भी वाहन या सार्वजनिक स्थल पर कूड़ा फेंकने पर ₹25,000 से ₹1 लाख तक का भारी जुर्माना लगेगा और मुकदमा भी दर्ज हो सकता है।
- कचरा न छांटना: आवासीय क्षेत्रों में पहली बार उल्लंघन पर ₹200 और तीसरी बार उल्लंघन पर ₹1,000 तक का जुर्माना लगेगा।
होटल और अस्पताल जैसे वे प्रतिष्ठान जहाँ प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा निकलता है, उन्हें थोक कचरा जनरेटर माना जाएगा। इनके लिए गीले कचरे को परिसर के अंदर ही कंपोस्टिंग या प्रोसेसिंग के माध्यम से संसाधित करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, स्ट्रीट वेंडरों को डिस्पोजेबल (सिंगल-यूज) वस्तुओं का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी।
यह नया कानून गुरुग्राम की स्वच्छता व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन लाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत स्वच्छता को बढ़ावा देने और शहर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को व्यवस्थित करने के लिए गुरुग्राम नगर निगम ने ‘सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एंड हैंडलिंग बायलॉज, 2025’ तैयार किया है। इसको लेकर प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय को भेज दिया है। इसमें लोगों से भी सुझाव मांगे गए हैं।”