Gurugram में बड़ा खुलासा: MCG के 30 हजार बकायेदारों पर 1 अरब से ज़्यादा टैक्स बाकी

MCG के प्रॉपर्टी टैक्स विभाग ने इस वित्तीय वर्ष (2025-26) में अब तक ₹261 करोड़ से अधिक का टैक्स वसूल लिया है। हालांकि, बड़े बकायेदारों की लापरवाही के चलते वसूली का लक्ष्य अभी भी दूर है।

MCG : गुरुग्राम नगर निगम (एमसीजी) का खजाना खाली होता जा रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि शहर के चारों ज़ोनों में 30,000 बड़े प्रॉपर्टी टैक्स बकायेदारों पर एक अरब रुपये से अधिक का बकाया लंबित है, जिसे वसूलने में निगम के अधिकारी अब तक नाकाम रहे हैं। हालांकि, अधिकारियों ने दावा किया है कि इस वित्तीय वर्ष को समाप्त होने से पहले, यानी मार्च से पहले, वसूली प्रक्रिया को युद्धस्तर पर तेज किया जाएगा।

MCG के प्रॉपर्टी टैक्स विभाग ने इस वित्तीय वर्ष (2025-26) में अब तक ₹261 करोड़ से अधिक का टैक्स वसूल लिया है। हालांकि, बड़े बकायेदारों की लापरवाही के चलते वसूली का लक्ष्य अभी भी दूर है। निगम प्रशासन ने टैक्सेशन ब्रांच के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वसूली कार्य में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सख्त कार्रवाई करते हुए, निगम ने अब तक 53 बड़े व्यावसायिक भवनों को सील कर दिया है और इस प्रक्रिया से ₹20 करोड़ से अधिक की वसूली की जा चुकी है। निगम ने हाल ही में कुछ बड़े बकायेदारों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया है:

अप्पू घर सील: सेक्टर-29 स्थित प्रसिद्ध अप्पू घर एम्यूजमेंट पार्क को सील कर दिया गया है। पार्क को चलाने वाली फर्म पर प्रॉपर्टी टैक्स के मद में ₹7,43,50,299 का भारी बकाया था। बार-बार नोटिस भेजने के बाद भी भुगतान न होने पर यह कार्रवाई की गई।

वासुदेव ग्रेनाइट्स पर एक्शन: पालम विहार क्षेत्र में स्थित वासुदेव ग्रेनाइट्स की बिल्डिंग को भी सील किया गया है, जिस पर ₹1,19,86,642 का प्रॉपर्टी टैक्स लंबित था।

झाड़सा में सीलिंग: गांव झाड़सा में भी एक प्रॉपर्टी को ₹67,69,116 के बकाये के चलते सील कर दिया गया।

नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने बताया, “प्रॉपर्टी टैक्स वसूलने को लेकर चारों जोन के अधिकारियों के साथ बैठकें की जा चुकी हैं। भवन मालिकों को एक्ट के अनुसार नोटिस दिए जा रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि मार्च तक वसूली में तेजी लाई जाए। जिन भवन मालिकों की ओर से लापरवाही बरती जा रही है, उनके भवन सील किए जा रहे हैं।”

सीलिंग की प्रक्रिया
प्रॉपर्टी टैक्स बकाया होने पर भवन मालिक को तीन अलग-अलग नोटिस जारी किए जाते हैं।

नोटिस का जवाब न मिलने पर भवन सील करने की प्रक्रिया शुरू की जाती है।

सील की गई प्रॉपर्टी को टैक्स जमा करने के बाद ही डी-सील किया जाता है।

निगम के चारों जोन में डिफाल्टरों की प्रॉपर्टी सील करने का अभियान लगातार चलाया जा रहा है।

Sunil Yadav

सुनील यादव पिछले लगभग 15 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों में ( India Tv, Times Now,… More »
Back to top button

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker!