Gurugram की हाईराइज सोसाइटी में बड़ा हादसा टला: लिफ्ट में 15 मिनट तक फंसा रहा 3 साल का मासूम
रामप्रस्था सिटी की घटना: घरेलू सहायिका की गोद से गिरते-गिरते बचा बच्चा; चौथी और पांचवीं मंजिल के बीच अचानक रुकी लिफ्ट, निवासियों ने मेंटेनेंस कंपनी पर जड़े आरोप

Gurugram
साइबर सिटी गुरुग्राम (Gurugram )की बहुमंजिला सोसायटियों में लिफ्ट की बदहाली और मेंटेनेंस में लापरवाही का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला (Gurugram ) सेक्टर-37डी स्थित रामप्रस्था सिटी (Ramprastha City) के ‘ऐज ब्लॉक’ से सामने आया है, जहां एक 3 साल का मासूम बच्चा अपनी घरेलू सहायिका के साथ करीब 15 मिनट तक लिफ्ट में फंसा रहा। इस घटना के बाद से सोसाइटी के निवासियों में काफी रोष है और उन्होंने किसी बड़े हादसे की आशंका जताई है।
झटके के साथ रुकी लिफ्ट, गोद से गिरते-गिरते बचा बच्चा : Gurugram
मिली जानकारी के मुताबिक, ऐज ब्लॉक के K-टावर की पांचवीं मंजिल पर रहने वाले एक परिवार का तीन वर्षीय बच्चा अपनी घरेलू सहायिका के साथ नीचे जाने के लिए लिफ्ट में सवार हुआ था। लिफ्ट जैसे ही चौथी और पांचवीं मंजिल के बीच पहुंची, वह तेज झटके के साथ अचानक बंद हो गई।
झटका इतना तेज था कि बच्चा सहायिका की गोद से नीचे गिरते-गिरते बचा। लिफ्ट अटकने के बाद घरेलू सहायिका ने तुरंत बच्चे के परिजनों को फोन पर इसकी सूचना दी।
15 मिनट तक अटकी रहीं सांसें : Gurugram
घटना की खबर मिलते ही परिजन तुरंत मौके पर पहुंचे और सुरक्षा कर्मियों को अलर्ट किया। इसके बाद (Gurugram ) सोसाइटी के सुरक्षा गार्ड्स ने कड़ी मशक्कत के बाद लिफ्ट का दरवाजा खोलकर बच्चे और महिला को सुरक्षित बाहर निकाला। लगभग 15 मिनट तक लिफ्ट में कैद रहने के कारण बच्चा काफी सहम गया था।
आए दिन खराब होती हैं लिफ्ट, निवासियों में गुस्सा : Gurugram
K-टावर के निवासी आशुतोष ठाकुर समेत अन्य स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सोसाइटी में लिफ्टों का रखरखाव (Maintenance) ठीक ढंग से नहीं किया जा रहा है। आए दिन लिफ्ट में लोगों के फंसने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। रखरखाव एजेंसी की इस लापरवाही से कभी भी कोई गंभीर हादसा हो सकता है।
विभागीय जांच की मांग : Gurugram
हादसे से आक्रोशित निवासियों ने अब इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्ट्रेट विभाग (Electrical Inspectorate Department) से गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि रामप्रस्था सिटी सोसाइटी की सभी लिफ्टों की तकनीकी जांच कराई जाए और दोषी मेंटेनेंस एजेंसी पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी मासूम या बुजुर्ग की जान जोखिम में न पड़े।
