Last Wish एक ‘मुन्ना’ की अंतिम पुकार: “मेरे अंतिम संस्कार में जरूर आना”
गुरुग्राम में एंजेल चिल्ड्रेन एकेडमी के संचालक की संदिग्ध मौत, कुर्सी पर मिला शव और सिर में लगी थी गोली

Last Wish : गुरुग्राम। शिक्षा के मंदिर में जहाँ बच्चों की किलकारियां गूंजनी चाहिए थीं, वहां शनिवार की सुबह एक गहरा सन्नाटा और अपनों से बिछड़ने का दर्द पसरा मिला। गांधीनगर स्थित ‘एंजेल चिल्ड्रेन एकेडमी’ के संचालक शैलेंद्र कुमार कर्ण (50) का सफर संदिग्ध परिस्थितियों में थम गया। जिस कुर्सी पर बैठकर वे कभी बच्चों के भविष्य की रूपरेखा तैयार करते थे, उसी कुर्सी पर आज उनका निष्प्राण शरीर मिला। सिर में लगी गोली और पास पड़ी पिस्टल इस कहानी के पीछे के उस गहरे एकांत की ओर इशारा कर रही है, जिसे वे पिछले तीन साल से जी रहे थे।
विरह की स्याही से लिखा आखिरी पैगाम
शैलेंद्र का जीवन किसी खुली किताब की तरह था, जिसके पन्ने पिछले कुछ समय से विरह की स्याही से काले पड़ रहे थे। पुलिस को मौके से एक डायरी मिली है, जो किसी नोट से ज्यादा एक टूटे हुए दिल की चीख महसूस होती है। डायरी के हर पन्ने पर अपनी पत्नी ‘सुजाता’ (जिन्हें वे प्यार से झुन्नू कहते थे) के प्रति अगाध प्रेम और उन्हें खोने का गम साफ झलकता है।

उन्होंने अपने अंतिम संदेश में लिखा: Last Wish
“मेरी झुन्नू, तुम तो मुझको भूल गई, पर मैं तुम्हें नहीं भूल पा रहा। मैं जा रहा हूँ… पर मेरे जाने के बाद तुम स्कूल को संभालना। मैंने तुम्हें बहुत कष्ट दिया, मुझे क्षमा कर देना। लेकिन मेरी एक अंतिम इच्छा है—मेरे अंतिम संस्कार में तुम जरूर आना।”
यह पंक्तियाँ किसी पत्थर दिल इंसान को भी झकझोर देने के लिए काफी हैं। 32 साल का साथ जब टूटता है, तो इंसान अंदर से कितना खाली हो जाता है, शैलेंद्र का यह अंतिम खत उसी खालीपन की गवाही दे रहा है।
सवालों के घेरे में ‘संदिग्ध अंत’
भले ही प्राथमिक रूप से इसे एक दुखद निर्णय माना जा रहा है, लेकिन घटनास्थल के हालात कई अनसुलझे सवाल छोड़ गए हैं। शैलेंद्र के हाथ जिस स्थिति में कुर्सी पर मिले और जिस तरह पिस्टल उनके पैरों के बीच थी, उसने पुलिस को गहन जांच के लिए मजबूर कर दिया है। पड़ोसियों का कहना है कि वे एक सुलझे हुए इंसान थे, लेकिन पत्नी से अलगाव के बाद वे अक्सर खामोश रहने लगे थे। हाल ही में जिस मकान में वे 25 साल से रह रहे थे, उसका बिक जाना भी शायद उनके मानसिक तनाव की एक वजह रहा हो।
एक प्रेम कहानी का कारुणिक अंत
पटना के कंकरबाग से आकर गुरुग्राम में अपनी पहचान बनाने वाले ‘मुन्ना’ (शैलेंद्र का घरेलू नाम) ने कभी सोचा भी न होगा कि उनका अंत इतना एकाकी होगा। बिना बच्चों के इस दंपती के बीच तीन साल पहले आई दूरियां आज एक ऐसी खाई बन गई, जिसे मौत भी शायद पूरी तरह न भर पाए।
पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज के जरिए इस रहस्यमयी मौत की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। लेकिन इस पूरी घटना ने समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या टूटते रिश्तों का बोझ इतना भारी हो जाता है कि इंसान जीवन की राह ही छोड़ देता है?











